सिक्किम सुरंग हादसे में मारे गए झारखंड के 3 प्रवासी मजदूरों के शव आज पहुंचेंगे गांव, खूंटी में पसरा मातम
सिक्किम में हुए भीषण सुरंग हादसे (Sikkim Tunnel Accident) ने झारखंड के खूंटी जिले के एक परिवार और पूरे गांव को कभी न भरने वाला दर्द दे दिया है। इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले झारखंड के तीन गरीब प्रवासी मजदूरों के पार्थिव शरीर आज उनके पैतृक गांव पहुंच रहे हैं। अपनों के शव घर लौटने की खबर मिलते ही पूरे इलाके में कोहराम मच गया है और शोक की लहर दौड़ पड़ी है। रोजी-रोटी की तलाश में घर से दूर गए इन युवाओं की अचानक हुई मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। आइए जानते हैं इस पूरे हादसे और गांव के मौजूदा गमगीन माहौल के बारे में।
क्या था सिक्किम सुरंग हादसा और कैसे हुआ यह वज्रपात?
सिक्किम में चल रहे एक सड़क और निर्माण प्रोजेक्ट के दौरान अचानक हुए सुरंग हादसे ने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। टनल के भीतर हुए इस हादसे की चपेट में कई मजदूर आ गए थे, जिनमें झारखंड के खूंटी जिले के रहने वाले तीन मजदूर भी शामिल थे। मलबे में दबने और बचाव कार्य में देरी के चलते इन मजदूरों की जान चली गई। प्रशासनिक स्तर पर लंबी कागजी कार्रवाई और शवों को एयरलिफ्ट व एंबुलेंस के जरिए गृह राज्य भेजने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आखिरकार आज उनके शव उनके घर पहुंच रहे हैं।
खूंटी के गांवों में पसरा मातम, घर के इकलौते सहारे थे मृतक
इन प्रवासी मजदूरों के परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। घर की बदहाली दूर करने और दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने के लिए ये युवा अपने परिवार से दूर सिक्किम मजदूरी करने गए थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि जिस सफर पर वे घर चलाने के लिए निकल रहे हैं, वह उनका आखिरी सफर साबित होगा। आज जब उनके शव गांव की चौखट पर पहुंचेंगे, तो पूरा गांव नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई देगा। परिजनों की चीख-पुकार से वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा फट रहा है।
प्रशासन की ओर से मदद का आश्वासन
इस हृदयविदारक घटना के बाद राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के नुमाइंदे पीड़ित परिवारों के घर पहुंच रहे हैं। प्रशासन की ओर से मृतक मजदूरों के परिजनों को हरसंभव सरकारी सहायता, अनुग्रह राशि (Compensation) और ढांढस बंधाने का आश्वासन दिया गया है। हालांकि, अपनों को खोने के गम के आगे यह मदद बेहद कम प्रतीत हो रही है।