खूंटी में जन्माष्टमी को लेकर सुबह से ही मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, अखंड...

खूंटी में जन्माष्टमी को लेकर सुबह से ही मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, अखंड...

झारखंड के जनजातीय बहुल और सांस्कृतिक रूप से जीवंत जिले खूंटी में इस बार भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी का पर्व बेहद उत्साह, उमंग और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। सुबह के सूर्योदय के साथ ही शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक के सभी छोटे-बड़े मंदिरों में भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था, जिससे पूरा क्षेत्र बालगोपाल के जयकारों से गूंज उठा। पारंपरिक लोक संस्कृति और आधुनिक आस्था के इस अनूठे संगम में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी बड़े उल्लास के साथ मंदिरों की ओर खिंचे चले आ रहे हैं। शहर के मुख्य मंदिरों को भव्य तरीके से फूलों, अमरूद के पत्तों और रंग-बिरंगी विद्युत रोशनी से सजाया गया है, जिससे हर आने जाने वाले की निगाहें ठहर जाती हैं। खूंटी की फिजाओं में इस समय केवल और केवल कान्हा के नाम की गूंज सुनाई दे रही है, और चारों तरफ एक ऐसा पावन और आध्यात्मिक वातावरण बन गया है जो हर किसी के मन को शांति और दिव्यता से भर रहा है।

सुबह से ही मंदिरों में गूंज रहे मंत्र और शंखनाद, भक्तों की लंबी कतारें

खूंटी जिला मुख्यालय स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर और शिव मंदिरों में आज सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। सुबह की मंगला आरती और विशेष पूजा-अर्चना के बाद से ही मंदिर के कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिए गए थे, जिसके बाद महिलाओं और युवाओं की लंबी-लंबी कतारें अनुशासनबद्ध तरीके से अपनी बारी का इंतजार करती नजर आईं। कई श्रद्धालुओं ने आज के दिन भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखा है और मंदिरों में पहुंचकर फल, फूल, पंचामृत और मक्खन-मिश्री का भोग अर्पित कर रहे हैं। मंदिरों के पुजारियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच भगवान की आराधना कराई जा रही है, जिससे पूरा मंदिर परिसर सकारात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि खूंटी की पावन भूमि पर इस तरह का सामूहिक अनुष्ठान आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द को और अधिक मजबूत करता है, जो इस पर्व की असली खूबसूरती है।

अखंड हरि कीर्तन की गूंज से भक्तिमय हुआ पूरा खूंटी शहर का जनजीवन

जन्माष्टमी के इस पावन अवसर पर खूंटी के विभिन्न शहरी और ग्रामीण इलाकों में पिछले 24 घंटों से लगातार अखंड हरि कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। ढोल, मंजीरों, करताल और मृदंग की थाप पर गूंजते 'हरे कृष्ण, हरे राम' के महामंत्र ने पूरे इलाके के जनजीवन को पूरी तरह से भक्तिमय बना दिया है। कीर्तन मंडली के सदस्यों द्वारा गाए जा रहे सुरीले भजनों और कृष्ण लीला के पदों को सुनकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया है। चौराहों और गली-मोहल्लों में सजे पांडालों से आ रही इन मधुर ध्वनियों ने न केवल बुजुर्गों बल्कि युवा पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है। जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए शरबत, फल और प्रसाद का वितरण किया जा रहा है, जो यहां की स्थानीय आतिथ्य परंपरा और मिलनसार स्वभाव का एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहा है।

शाम ढलते ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आकर्षक झांकियों का होगा भव्य आयोजन

जैसे-जैसे दिन ढल रहा है और रात का समय नजदीक आ रहा है, खूंटी में जन्माष्टमी का उत्साह अपने चरम पर पहुंचता जा रहा है। शाम के समय स्थानीय युवा संगठनों और मंदिर समितियों द्वारा भगवान कृष्ण के जन्म प्रसंग पर आधारित बेहद खूबसूरत और आकर्षक झांकियां सजाई जा रही हैं, जिन्हें देखने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। इसके अलावा कई स्थानों पर बच्चों के लिए फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता, कृष्ण रूप सज्जा और सांस्कृतिक नृत्य कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया है, जिसमें नन्हें-मुन्ने बच्चे कान्हा और राधा बनकर सभी का मन मोह रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर भी सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की चप्पे-चप्पे पर तैनाती की गई है ताकि श्रद्धालु बिना किसी बाधा के इस महान पर्व का आनंद उठा सकें। मध्य रात्रि ठीक बारह बजे जब भगवान का जन्म होगा, तब विशेष महाआरती के बाद पंजरी और माखन-मिश्री का प्रसाद वितरित कर इस भव्य उत्सव का समापन धूमधाम से किया जाएगा।

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