क्या आपने भी गलत दिशा में लगाई है श्रीकृष्ण की तस्वीर? जन्माष्टमी से पहले...
सनातन संस्कृति में भगवान श्रीकृष्ण को जगत का पालनहार, प्रेम का प्रतीक और आनंद का देवता माना जाता है। घरों में कान्हा की तस्वीर या मूर्ति रखना न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करता है, बल्कि घर के वातावरण को भी पूरी तरह से पवित्र और ऊर्जावान बना देता है। जब भी श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व नजदीक आता है, तो लोग अपने घरों की साफ-सफाई करने के साथ-साथ भगवान की नई तस्वीरें स्थापित करते हैं या पुरानी तस्वीरों की जगह बदलते हैं। लेकिन कई बार अनजाने में लोग वास्तु शास्त्र के नियमों को नजरअंदाज कर देते हैं और भगवान कृष्ण की तस्वीर को घर की किसी भी गलत दिशा में लगा देते हैं। वास्तु जानकारों के अनुसार, यदि भगवान की तस्वीर गलत स्थान या दिशा पर स्थापित की जाए, तो सकारात्मक ऊर्जा के बजाय घर में नकारात्मक दोष उत्पन्न होने लगते हैं। इसलिए जन्माष्टमी का पर्व शुरू होने से पहले यह बेहद आवश्यक हो जाता है कि हम वास्तु के उन जरूरी नियमों को समझें और सही दिशा का चुनाव करें ताकि घर में बरकत और सुख-शांति बनी रहे।
घर में भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर लगाने की सबसे उत्तम और सही दिशा कौन सी है?
वास्तु शास्त्र और फेंगशुई के नियमों के मुताबिक घर में देवी-देवताओं की स्थापना के लिए दिशाओं का चयन बहुत सोच-समझकर किया जाना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर या बाल गोपाल की मूर्ति हमेशा घर की उत्तर या पूर्व दिशा (ईशान कोण) में लगानी चाहिए। उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा माना जाता है, और जब इस दिशा में भगवान कृष्ण की तस्वीर स्थापित की जाती है, तो घर में आर्थिक संपन्नता और समृद्धि के द्वार अपने आप खुलने लगते हैं। इसके अलावा पूर्व दिशा से सूर्य की सकारात्मक और ऊर्जावान किरणें आती हैं, जो घर के सदस्यों के मान-सम्मान और स्वास्थ्य में वृद्धि करती हैं। यदि संभव हो तो कान्हा की तस्वीर या मूर्ति को इस प्रकार रखें कि उनका मुख हमेशा अंदर की तरफ या दक्षिण दिशा की ओर हो और पूजा करने वाले का मुंह उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ रहे। इस छोटी सी व्यवस्था से घर का वास्तु पूरी तरह संतुलित हो जाता है और दैवीय कृपा प्राप्त होती है।
किन गलत दिशाओं में भूलकर भी नहीं लगानी चाहिए श्रीकृष्ण की तस्वीर?
अक्सर लोग अपनी सुविधा के अनुसार घर के किसी भी कोने में भगवान की तस्वीर टांग देते हैं, जो वास्तु के नियमों के अनुसार बिल्कुल भी उचित नहीं माना गया है। घर की दक्षिण, पश्चिम या नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम दिशा) में भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर कभी भी नहीं लगानी चाहिए। दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना गया है, और इस तरफ देवी-देवताओं का वास या उनकी तस्वीरें लगाने से जीवन में अनावश्यक संघर्ष, मानसिक तनाव और बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा बेडरूम, सीढ़ियों के नीचे, बाथरूम के ठीक सामने या घर के मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक ऊपर भी श्रीकृष्ण की तस्वीर या मूर्ति नहीं लगानी चाहिए। सीढ़ियों के नीचे या ऐसे स्थानों पर तस्वीर लगाने से भगवान का अनादर होता है, जिससे घर की बरकत रुक जाती है और परिवार के सदस्यों के बीच आपसी कलह व मनमुटाव बढ़ने की पूरी आशंका बनी रहती है।
बालगोपाल की तस्वीर या मूर्ति रखते समय किन अन्य वास्तु बातों का रखें विशेष ध्यान?
दिशाओं के अलावा कुछ ऐसे छोटे लेकिन बेहद महत्वपूर्ण नियम भी हैं जिन्हें भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर लगाते समय हमेशा ध्यान में रखना चाहिए। सबसे पहली बात यह है कि घर में स्थापित की जाने वाली तस्वीर या मूर्ति खंडित, फटी हुई या पुरानी और धुंधली नहीं होनी चाहिए। अगर तस्वीर का फ्रेम पुराना हो गया है या कांच टूट गया है, तो जन्माष्टमी से पहले उसे तुरंत बदल लें या नदी में प्रवाहित कर दें। इसके अलावा पूजा घर में भगवान की एक ही रूप की बहुत सारी तस्वीरें आमने-सामने लगाने से भी बचना चाहिए। बाल गोपाल की मूर्ति हमेशा ऐसी जगह रखें जहां उनकी साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जा सके और वहां किसी भी प्रकार की गंदगी या कूड़ा-कचरा न हो। यदि आप इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखते हैं, तो आपके घर में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहेगा और भगवान कृष्ण की असीम अनुकंपा आपके परिवार पर सदैव बनी रहेगी।
जन्माष्टमी के दिन ऐसे करें भगवान की तस्वीर की स्थापना और वास्तु दोष निवारण
इस बार जन्माष्टमी के पावन अवसर पर यदि आप अपने घर में नए सिरे से भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर या बालगोपाल की मूर्ति स्थापित कर रहे हैं, तो इसे एक विधिवत अनुष्ठान के रूप में करें। सुबह स्नान करने के बाद घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) को गंगाजल छिड़ककर पूरी तरह पवित्र कर लें, और उसके बाद पीले या लाल रंग के साफ वस्त्र पर कान्हा की तस्वीर को आदर के साथ स्थापित करें। तस्वीर स्थापित करने के बाद उन्हें माखन-मिश्री का भोग लगाएं, तुलसी का पत्ता अर्पित करें और विधि-विधान से उनकी पूजा-अर्चना करें। ऐसा करने से न केवल आपके घर का पुराना वास्तु दोष समाप्त होगा, बल्कि घर में सुख, शांति, प्रेम और वैभव का स्थाई वास भी हो जाएगा। कान्हा का यह जन्मोत्सव आपके जीवन के सभी संकटों को दूर कर दे और आपके घर में खुशियों के नए दीप जलाए, इसी कामना के साथ वास्तु के इन नियमों का पालन अवश्य करें।