एक साथ सिजेरियन से जन्मे थे 3 सगे भाई-बहन, पानी से भरे गड्ढे में डूबने से तीनों की मौत
झारखंड के लातेहार जिले से एक ऐसी हृदयविदारक और झकझोर देने वाली खबर आई है, जिसने पूरे इलाके को सुन्न कर दिया है। बालूमाथ प्रखंड क्षेत्र के आरा गांव में शुक्रवार की देर शाम एक ही परिवार के तीन मासूम सगे भाई-बहनों की पानी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। इस खौफनाक हादसे के बाद से पूरे गांव में चूल्हा तक नहीं जला है और पीड़ित माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।
ये तीनों बच्चे कोई साधारण भाई-बहन नहीं थे, बल्कि डॉक्टरों के कड़े प्रयासों के बाद सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए एक साथ ही इस दुनिया में आए थे। नियति का क्रूर खेल देखिए कि जिस तरह इन तीनों ने एक साथ जन्म लिया था, उसी तरह मौत ने भी इन्हें एक ही साथ अपनी आगोश में ले लिया।
फायरक्ले निकालने के लिए खोदा गया पुराना गड्ढा बना काल
मृतक बच्चों की पहचान आरा गांव के निवासी द्वारिका गंझु के बच्चों के रूप में हुई है, जिनमें 9 वर्षीय माही कुमार, 6 वर्षीय दीपिका कुमारी और मात्र 3 साल का छोटा बेटा आर्यन कुमार शामिल थे। परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार की शाम तीनों बच्चे घर के पास ही स्थित एक बड़े गड्ढे की तरफ खेलने गए थे। यह गड्ढा सालों पहले पत्थर (फायरक्ले) निकालने के लिए खोदा गया था, जिसमें हमेशा गहरा पानी भरा रहता था।
गर्मी और उमस से राहत पाने के लिए मासूम बच्चे इस गड्ढे के पानी में नहाने के लिए उतर गए। पानी की गहराई का अंदाजा न होने के कारण एक-एक कर तीनों बच्चे गहरे पानी में समा गए और दम घुटने से मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
डॉक्टरों ने देखते ही घोषित किया मृत, अस्पताल में मची चीख-पुकार
काफी देर तक जब बच्चे घर नहीं लौटे, तो परिजनों ने उनकी खोजबीन शुरू की। गड्ढे के पास बच्चों के कपड़े और सामान देखकर अनहोनी की आशंका हुई। स्थानीय ग्रामीणों की मदद से जब पानी में तलाश की गई, तो तीनों बच्चों के शव बरामद हुए।
ग्रामीणों और परिजनों ने बिना समय गंवाए तीनों को आनन-फानन में बालूमाथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया। वहां ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. दयानंद कुमार ने गहन जांच के बाद तीनों मासूमों को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों की इस घोषणा के बाद अस्पताल परिसर चीख-पुकार और आंसुओं से गूंज उठा।
एनटीपीसी कन्वेयर बेल्ट के पास था डेंजर जोन, पिता हैं सीसीएल कर्मी
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा जिस स्थान पर हुआ, वह एनटीपीसी (NTPC) द्वारा निर्माणाधीन कन्वेयर बेल्ट के बिल्कुल समीप स्थित है। यहां खनन कार्य के बाद गड्ढों को खुला छोड़ दिया गया था, जो बारिश और स्थानीय जलभराव के कारण मौत का कुआं बन चुके थे।
मृतक बच्चों के पिता द्वारिका गंझु तेतरियाखांड कोलियरी में सीसीएल (CCL) कर्मी के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने रोते हुए बताया कि उनके ये तीनों बच्चे सिजेरियन ऑपरेशन से एक साथ जन्मे थे और उनके पूरे जीवन की खुशियां इन्हीं बच्चों से जुड़ी थीं। इस हादसे ने हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह उजाड़ दिया है।
पुलिस ने शुरू की वैधानिक जांच, पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए शव
इस भीषण हादसे की भनक मिलते ही बालूमाथ के प्रभारी थाना प्रभारी अमित कुमार, सब इंस्पेक्टर गौतम कुमार और देवेंद्र सिंह तुरंत पुलिस बल के साथ बालूमाथ अस्पताल परिसर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने पीड़ित परिवार से मिलकर घटना की विस्तृत जानकारी ली और घटनास्थल का मुआयना किया।
पुलिस प्रशासन ने शवों को पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है कि इतने खतरनाक गड्ढे को बिना किसी सुरक्षा घेरे (Fencing) के खुला क्यों छोड़ा गया था।