"मुआवजा सिर्फ गणित नहीं, अपूरणीय क्षति पर मरहम है"; सड़क हादसे में युवक की मौत पर सुप्रीम कोर्ट की भावुक व ऐतिहासिक टिप्पणी
देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत दिए जाने वाले मुआवजे को लेकर एक बेहद मानवीय और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि 'उचित मुआवजा' देने का कानूनी सिद्धांत केवल ठीक-ठीक गणितीय बराबरी या कैलकुलेशन का मामला नहीं है। यह कानून की सीमाओं के भीतर उन पीड़ित परिवारों को कुछ राहत और मरहम देने की मानवीय कोशिश है, जिन्होंने अपने जीवन में कभी न पूरी होने वाली कमी (अपूरणीय क्षति) का सामना किया है। अदालत ने कहा कि ऐसे हादसों के फैसलों में वित्तीय दावों के साथ-साथ मानवीय और भावनात्मक पहलू को भी ध्यान में रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
सीए के होनहार छात्र की मौत का मामला, सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजे में दखल देने से किया इनकार
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ (बेंच) ने चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA Final) की पढ़ाई कर रहे एक 20 वर्षीय होनहार युवक के माता-पिता को मिलने वाली राहत राशि को बरकरार रखा है। जून 2013 में दिल्ली में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में इस होनहार युवक की असमय मौत हो गई थी। कोर्ट ने बीमा कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि उनके सामने आया यह मामला एक ऐसे युवा की जान जाने से जुड़ा है, जिसके भीतर पेशेवर तौर पर आगे बढ़ने और एक बेहतरीन करियर बनाने की असीम संभावनाएं मौजूद थीं। ऐसे मामलों में केवल तकनीकी आंकड़ों के आधार पर राहत राशि को कम नहीं किया जा सकता।
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, ट्रिब्यूनल ने माना था ₹55,500 मासिक आय
यह कानूनी लड़ाई दिल्ली हाईकोर्ट के अगस्त 2022 के उस फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर आधारित थी, जिसमें मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) के आदेश को सही ठहराया गया था। ट्रिब्यूनल ने मृतक युवक की उच्च शिक्षा, उसकी पेशेवर योग्यताओं और करियर में संभावित तरक्की को ध्यान में रखते हुए उसकी काल्पनिक मासिक आय ₹55,500 तय की थी और उसके बुजुर्ग माता-पिता को 81.21 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरी गणना को सही ठहराते हुए माता-पिता के पक्ष में अंतिम फैसला सुनाया।
'फिलियल कंसोर्टियम' के तहत सुप्रीम कोर्ट ने और बढ़ाई रकम, अब मिलेंगे ₹82 लाख से ज्यादा
सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले में माता-पिता के दर्द को समझते हुए मुआवजे की रकम को और बढ़ा दिया है। बेंच ने कहा कि मृतक अविवाहित बेटे के माता-पिता 'फिलियल कंसोर्टियम' (माता-पिता को हुए गहरे भावनात्मक सदमे, प्यार, स्नेह और बुढ़ापे के सहारे के नुकसान की भरपाई) के पूरी तरह हकदार हैं। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि ट्रिब्यूनल द्वारा तय किए गए मुआवजे के अलावा, माता-पिता को प्रति व्यक्ति ₹40,000 की अतिरिक्त राशि दी जाए। इस निर्देश के बाद पीड़ित माता-पिता को मिलने वाला कुल मुआवजा ₹81,21,900 से बढ़कर अब ₹82,01,900 हो गया है, जिस पर तयशुदा ब्याज भी मिलेगा।