शिक्षा क्षेत्र में भारत का ऐतिहासिक रिकॉर्ड: पहली बार 1 करोड़ के पार पहुंची शिक्षकों की फौज, मंत्रालय ने जारी किए नए आंकड़े

शिक्षा क्षेत्र में भारत का ऐतिहासिक रिकॉर्ड: पहली बार 1 करोड़ के पार पहुंची शिक्षकों की फौज, मंत्रालय ने जारी किए नए आंकड़े

शिक्षा जगत में नया कीर्तिमान: 1 करोड़ के पार हुई गुरुओं की संख्या

भारतीय स्कूल शिक्षा व्यवस्था ने वैश्विक पटल पर एक नया इतिहास रच दिया है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) 2.0 और जिलों के लिए जारी PGI-D 2025-26 की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, देश में कार्यरत शिक्षकों की संख्या पहली बार 1 करोड़ के जादुई आंकड़े को पार कर गई है। सरकारी डेटा के मुताबिक, वर्तमान में देश के भीतर करीब 1.03 करोड़ से अधिक शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जो भारतीय साक्षरता और शैक्षणिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।

14.67 लाख स्कूलों में पढ़ रहे हैं 24.72 करोड़ छात्र

शिक्षा मंत्रालय के नए आंकड़े बताते हैं कि भारत का स्कूली नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े शैक्षिक तंत्रों में से एक बन चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, इस समय पूरे भारत में कुल 14.67 लाख स्कूल संचालित हो रहे हैं, जिनमें लगभग 24.72 करोड़ छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद अब यह बड़ा सवाल भी उठने लगा है कि शिक्षकों की यह रिकॉर्ड संख्या क्या आने वाले समय में देश के सुदूर इलाकों तक शिक्षा की गुणवत्ता (Quality Education) में भी उतना ही बड़ा सुधार ला पाएगी।

जानिए क्या है PGI इंडेक्स और कैसे होता है स्कूलों का मूल्यांकन?

मंत्रालय इन आंकड़ों के जरिए राज्यों और जिलों में स्कूल शिक्षा की जमीनी स्थिति का सटीक आकलन करता है। इसके लिए सरकार परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) व्यवस्था का उपयोग करती है, जिसमें राज्यों को कोई पारंपरिक रैंकिंग नहीं दी जाती, बल्कि उन्हें उनके परफॉर्मेंस के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों (ग्रेड्स) में विभाजित किया जाता है। इस मूल्यांकन प्रक्रिया में कुल 1000 अंक निर्धारित होते हैं, जिन्हें 70 कड़े मानकों (Indicators) के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वितरित किया जाता है।

इन खास मानकों के आधार पर मापी जाती है शिक्षा की गुणवत्ता

PGI और PGI-D के तहत स्कूलों का मूल्यांकन करते समय कई महत्वपूर्ण पहलुओं को परखा जाता है। इसमें मुख्य रूप से बच्चों की पढ़ाई और उनके सीखने का स्तर, स्कूल तक छात्रों की आसान पहुंच, स्कूल की इमारत व बुनियादी सुविधाएं, सभी बच्चों को मिलने वाले समान अवसर, स्कूलों का प्रशासनिक प्रबंधन, शिक्षकों की डिजिटल शिक्षा और उनकी स्पेशल ट्रेनिंग जैसे बिंदु शामिल होते हैं।

अब जिलों का भी होगा कड़ा टेस्ट, कमियां सुधारने में मिलेगी मदद

इस बार की व्यवस्था में जिलों के मूल्यांकन के लिए विशेष रूप से PGI-D फ्रेमवर्क को लागू किया गया है। इसके तहत अब हर जिले के भीतर कक्षा की पढ़ाई, बच्चों की सुरक्षा, शिक्षकों की उपलब्धता और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बारीकी से जांच होगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य इन विस्तृत आंकड़ों के जरिए शिक्षा व्यवस्था की जमीनी कमियों को पहचानना और उनके आधार पर सटीक नीतियां तैयार करना है, ताकि देश के हर कोने में स्कूल शिक्षा को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाया जा सके।

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