पंजाब में ₹1000 की महिला योजना शुरू होते ही घमासान: 4 लाख करोड़ के कर्ज और 4 साल की देरी पर विपक्ष के तीखे सवाल

पंजाब में ₹1000 की महिला योजना शुरू होते ही घमासान: 4 लाख करोड़ के कर्ज और 4 साल की देरी पर विपक्ष के तीखे सवाल

पंजाब की भगवंत मान सरकार ने राज्य की महिलाओं के लिए 'मुख्यमंत्री मांवां धीयां सत्कार योजना' (Mukhya Mantri Mawan Dhiyan Satkar Yojana) का आधिकारिक शंखनाद कर दिया है। सरकार ने जुलाई, अगस्त और सितंबर महीने की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजनी शुरू कर दी है। हालांकि, भारी कर्ज के संकट से जूझ रहे पंजाब में इस योजना के लागू होते ही विपक्षी दलों ने चौतरफा हमला बोल दिया है। 4 साल की देरी, बकाया राशि और राज्य के बढ़ते कर्ज को लेकर सूबे की सियासत में उबाल आ गया है।

किसे मिलेगा लाभ और कौन रहेगा बाहर? जानें पात्रता के कड़े नियम

सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत वित्तीय सहायता की राशि को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है:

  • वित्तीय सहायता: सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1,000 रुपये प्रति माह और दलित (SC) वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह मिलेंगे।

  • आयु सीमा: इस योजना का लाभ 18 से 60 वर्ष की आयु वाली महिलाओं को दिया जाएगा।

  • इन्हें मिलेगी छूट: विधवा पेंशन या दिव्यांग पेंशन का लाभ ले रही महिलाओं को भी इस योजना से जोड़ा गया है।

  • इन्हें रखा गया बाहर: सरकारी कर्मचारियों, सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त (Retired) महिलाओं और आयकर (Income Tax) देने वाली महिलाओं को इस योजना के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

  • ट्विस्ट: योजना के तहत जुलाई से सितंबर तक की राशि तो आ रही है, लेकिन विपक्षी दावों के मुताबिक अप्रैल से जून तक का पैसा इसमें शामिल नहीं है।

'4 साल की देरी और 51,000 का बकाया' - कांग्रेस ने सरकार को घेरा

आम आदमी पार्टी (AAP) ने 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान महिलाओं को 1,000 रुपये प्रति माह देने की गारंटी दी थी। अब चुनाव से ठीक पहले इसे लागू करने पर पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। राजा वडिंग ने मांग की है कि सरकार पिछले 4 वर्षों के बकाये के रूप में राज्य की हर पात्र महिला के खाते में एकमुश्त 51,000 रुपये ट्रांसफर करे।

बीजेपी और अकाली दल ने लगाया 'चुनावी धोखे' और कर्ज का आरोप

पंजाब बीजेपी के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, ऐसे में आचार संहिता लगने के डर से ठीक पहले योजना शुरू करना महिलाओं के साथ धोखा है।

दूसरी तरफ, शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रवक्ता अर्शदीप सिंह कलेर ने तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार राज्य के बुनियादी और संवेदनशील मुद्दों (जैसे बेअदबी मामला) से जनता का ध्यान भटकाने के लिए नया कर्ज लेकर इस मुफ्त योजना को अमलीजामा पहना रही है।

कर्ज और मुफ्त योजनाओं का उलझा गणित: कहां से आएगा 9300 करोड़?

पंजाब सरकार की माली हालत और मुफ्त योजनाओं (Freebies) को लेकर भी आर्थिक विशेषज्ञों के बीच चिंता बनी हुई है। आंकड़ों की मानें तो:

  • कर्ज का बोझ: साल 2022 में जब मौजूदा सरकार सत्ता में आई थी, तब राज्य पर 2.82 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अब बढ़कर 4 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है। हाल ही में सरकार ने 1,500 करोड़ रुपये का नया कर्ज भी लिया है।

  • बजटीय प्रावधान: इस नई महिला सत्कार योजना को चलाने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 9,300 करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया गया है।

  • पुरानी योजनाएं: इसके अतिरिक्त, पंजाब सरकार पहले से ही घरेलू, कृषि और औद्योगिक क्षेत्र में मुफ्त बिजली और महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा जैसी योजनाओं पर हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही है। ऐसे में इस नए खर्च से राज्य के खजाने पर दबाव और बढ़ना तय माना जा रहा है।

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