राम मंदिर चंदा चोरी: आरोपियों को कानूनी मदद देगी VHP? विपक्ष के 2000 करोड़ के दावे पर आलोक कुमार का पलटवार
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे की कथित चोरी का मामला इन दिनों देश की सियासत के केंद्र में है। इस संवेदनशील मुद्दे पर चल रही बयानबाजियों के बीच विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार का एक बेहद महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। उन्होंने इस पूरी घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की वकालत की है। जब उनसे पूछा गया कि क्या आरोपियों के बीजेपी के पास जाने पर वीएचपी उनकी मदद करेगी, तो उन्होंने दोटूक जवाब दिया।
'वे हमारे कार्यकर्ता नहीं, कर्मचारी थे' - कानूनी मदद पर वीएचपी का रुख
आरोपियों को कूटनीतिक या कानूनी मदद मिलने के सवाल को आलोक कुमार ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, "ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है और न ही अभी तक ऐसा कुछ सामने आया है। इस काल्पनिक सवाल का कोई मतलब नहीं है। जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, वे हमारे कार्यकर्ता नहीं हैं, बल्कि वे वहां के कर्मचारी थे।"
उन्होंने आगे कहा, "चंदा चोरी के आरोपियों के लिए मेरे मन में रत्ती भर भी सहानुभूति नहीं है। मैं तो उन्हें सपनों में भी जेल के पीछे ही देखना चाहता हूँ। हालांकि, न्याय प्रणाली का सम्मान होना चाहिए। कुछ लोग सीसीटीवी (CCTV) में संदिग्ध हरकतें करते दिखे हैं और कुछ ने जुर्म कबूल भी किया है, जिससे लगता है कि वे दोषी हो सकते हैं, लेकिन भारत की न्याय व्यवस्था में अंतिम फैसला केवल अदालत ही करती है। चुनाव नजदीक होने के कारण किसी का मीडिया ट्रायल कर उसकी इज्जत नहीं उछाली जानी चाहिए।"
2,000 करोड़ की चोरी का दावा करने वाले नेताओं को पुलिस बुलाए
विपक्षी नेताओं द्वारा लगाए जा रहे बड़े आरोपों पर आलोक कुमार ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "बड़े-बड़े नेता दावा कर रहे हैं कि 2,000 करोड़ रुपये की चोरी हुई है। पुलिस को एक बार उन्हें बुलाकर पूछना चाहिए कि आखिर उनके पास इस दावे को सच साबित करने के क्या सबूत हैं? अगर कोई सबूत नहीं है, तो महज सनसनी, असंतोष और समाज में हिंसा फैलाने के लिए अफवाह उड़ाना भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353 के तहत एक गंभीर अपराध है।"
बार एसोसिएशन के फैसले को बताया अजीब, दिया संविधान का हवाला
अयोध्या बार एसोसिएशन द्वारा आरोपियों का केस न लड़ने के फैसले पर भी वीएचपी अध्यक्ष ने असहमति जताई। उन्होंने कहा, "मुझे बार एसोसिएशन का यह फैसला थोड़ा अजीब लगा। सुप्रीम कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत कानूनी सहायता पाना हर आरोपी का मौलिक अधिकार है। नैतिक, कानूनी और संवैधानिक रूप से बार एसोसिएशन ऐसा कोई प्रस्ताव पास नहीं कर सकती जो किसी को वकील रखने के अधिकार से वंचित करे।"
चंपत राय के इस्तीफे की सराहना और SIT जांच पर भरोसा
राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से चंपत राय के हटने के फैसले को आलोक कुमार ने एक सराहनीय कदम बताया। उन्होंने कहा, "जब यह बात उठी कि पद पर बने रहने से जांच प्रभावित हो सकती है या गवाहों पर दबाव आ सकता है, तो चंपत राय ने एफआईआर (FIR) दर्ज होने के महज दो दिन के भीतर इस्तीफा दे दिया। उनके इस कदम की जितनी तारीफ की जाए, कम है।"
विपक्ष द्वारा मामले की सीबीआई (CBI) जांच की मांग पर वीएचपी अध्यक्ष ने यूपी पुलिस और स्थानीय जांच एजेंसियों का बचाव किया। उन्होंने कहा, "विपक्ष जो यूपी पुलिस पर सवाल उठाता है, वही केंद्र की बीजेपी सरकार होने के नाते कल सीबीआई पर भी सवाल उठाएगा। हमें अपनी जांच एजेंसियों पर भरोसा रखना चाहिए। पूरा हिंदू समाज और मीडिया इस मामले पर नजर रखे हुए है, इसलिए कुछ भी गलत छिपाया नहीं जा सकता।" एसआईटी (SIT) जांच की अवधि 15 दिन बढ़ाए जाने को भी उन्होंने सही ठहराया ताकि भविष्य के लिए फुलप्रूफ सुरक्षा उपाय सुझाए जा सकें।