राजस्थान के किसानों के लिए कड़ा आदेश: डिग्गी और फार्म पॉण्ड पर तुरंत लगाएं लाल बोर्ड, वरना अटक जाएगा भारी-भरकम सरकारी अनुदान; जानिए नए नियम

राजस्थान के किसानों के लिए कड़ा आदेश: डिग्गी और फार्म पॉण्ड पर तुरंत लगाएं लाल बोर्ड, वरना अटक जाएगा भारी-भरकम सरकारी अनुदान; जानिए नए नियम

राजस्थान के अन्नदाता किसानों के लिए कृषि विभाग और राज्य सरकार की तरफ से एक बेहद महत्वपूर्ण और सख्त आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत खेतों में बनी जल संचयन संरचनाओं को लेकर नियमों में कड़ाई कर दी गई है। राज्य में लगातार बढ़ रही दुर्घटनाओं और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन किसानों ने अपने खेतों में डिग्गी या फार्म पॉण्ड (खेत तलाई) का निर्माण करवाया है, उन्हें अब अनिवार्य रूप से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होंगे। कृषि योजनाओं के तहत मिलने वाले सरकारी अनुदान और सब्सिडी का पूरा लाभ उठाने के लिए अब किसानों को अपने खेत की डिग्गी के पास चेतावनी देने वाला लाल बोर्ड और मजबूत फेंसिंग लगानी ही होगी। अगर किसी भी किसान ने विभाग द्वारा तय किए गए इन नए और कड़े सुरक्षा मानकों की अनदेखी की, तो उनका बकाया अनुदान रद्द किया जा सकता है या फिर प्रशासनिक स्तर पर रोक लगाई जा सकती है।

डिग्गी और फार्म पॉण्ड सुरक्षा को लेकर सरकार का सख्त कदम

राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधाओं को बेहतर बनाने और बारिश के पानी को संरक्षित करने के लिए सरकार द्वारा डिग्गी और फार्म पॉण्ड निर्माण पर भारी अनुदान दिया जाता है। हालांकि, पिछले कुछ समय से खेतों में बनी इन खुली जल संरचनाओं में डूबने से इंसानों और बेजुबान मवेशियों की दुर्घटनाओं के मामले सामने आए हैं, जिसे प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। इसी संवेदनशीलता को देखते हुए कृषि विभाग ने अब अनुदान के नियमों में सुरक्षा को पहली प्राथमिकता बना दिया है। विभाग का मानना है कि वित्तीय सहायता देने के साथ-साथ किसानों और ग्रामीण नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। यही कारण है कि अब हर उस डिग्गी या खेत तलाई पर जहां सरकारी पैसे या योजना का लाभ लिया गया है, सुरक्षा के इंतजामों की कड़ी जांच की जाएगी।

अनिवार्य रूप से लगाना होगा चेतावनी वाला लाल बोर्ड

नए नियमों के मुताबिक, प्रत्येक डिग्गी या फार्म पॉण्ड के किनारे एक स्पष्ट और दूर से दिखाई देने वाला चेतावनी बोर्ड (लाल बोर्ड) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इस लाल बोर्ड पर बड़े और स्पष्ट शब्दों में सुरक्षा संबंधी चेतावनियां लिखी होनी चाहिए ताकि आसपास से गुजरने वाले लोग, बच्चे या मवेशी समय रहते सतर्क हो सकें और किसी भी अनहोनी दुर्घटना से बचा जा सके। इसके साथ ही केवल बोर्ड लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि डिग्गी या तलाई के चारों तरफ मजबूत तारबंदी (Fencing) या बैरिकेडिंग करना भी अनिवार्य शर्तों में शामिल किया गया है ताकि कोई भी गलती से गहरे पानी की तरफ न जा सके।

अनुदान पाने के लिए इन नियमों का पालन करना अनिवार्य

राज्य के जिन किसानों ने हाल ही में डिग्गी या फार्म पॉण्ड का निर्माण कराया है या जो इसके लिए आवेदन करने की प्रक्रिया में हैं, उन्हें यह समझ लेना बेहद जरूरी है कि अब भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के दौरान इन सुरक्षा मानकों की कड़ी जांच की जाएगी। यदि कृषि विभाग के अधिकारी या जांच दल मौके पर पहुंचते हैं और डिग्गी के चारों तरफ न तो कोई लाल बोर्ड मिलता है और न ही सुरक्षा के लिए उचित तारबंदी या फेंसिंग की गई होती है, तो संबंधित किसान की फाइल को होल्ड पर रखा जा सकता है। ऐसी स्थिति में किसानों को मिलने वाली सब्सिडी या अनुदान राशि अटक सकती है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। सरकार का यह कदम पूरी तरह से जनहित और सुरक्षा को समर्पित है, ताकि विकास कार्यों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा का घेरा भी मजबूत किया जा सके।

कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन की किसानों से अपील

राज्य के कृषि विभाग और जिला प्रशासन ने सभी जिलों के किसानों से यह अपील की है कि वे किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई या अनुदान रुकने की समस्या से बचने के लिए तुरंत अपने खेतों में बनी डिग्गियों और फार्म पॉण्ड का निरीक्षण करें। यदि वहां सुरक्षा के पूरे इंतजाम नहीं हैं, तो वे जल्द से जल्द लाल बोर्ड और फेंसिंग का कार्य पूरा करवा लें। स्थानीय कृषि अधिकारियों को भी यह निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के किसानों को इस नए नियम के बारे में जागरूक करें और समय पर सत्यापन का कार्य पूरा करें। अन्नदाता किसानों से यह भी कहा गया है कि वे किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए सरकारी योजनाओं के सभी दिशा-निर्देशों का पूरी ईमानदारी से पालन करें, ताकि कृषि विकास के इस सफर में सुरक्षा और आर्थिक मदद दोनों का संतुलन बना रहे।

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