Dholpur Nikay Chunav 2026: धौलपुर निकाय चुनाव को लेकर आज खुलेगा आरक्षण का सबसे बड़ा पत्ता, सभापति और 6 अध्यक्ष पदों के लिए निकलेगी लॉटरी; मची सियासी हलचल
राजस्थान के राजनीतिक गलियारों और धौलपुर जिले में इस वक्त सबसे बड़ी चर्चा का विषय स्थानीय निकाय चुनाव और उससे जुड़ी आरक्षण की स्थिति बना हुआ है। धौलपुर जिले के नगरीय निकायों के आगामी चुनावों को लेकर प्रशासनिक तैयारियां अपने चरम पर पहुंच चुकी हैं और आज का दिन जिले के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद निर्णायक साबित होने जा रहा है। स्वायत्त शासन विभाग (DLB) और जिला प्रशासन की देखरेख में आज धौलपुर नगर परिषद के सभापति और जिले के अन्य 6 नगर निकायों के अध्यक्ष पदों के लिए वर्गवार आरक्षण की लॉटरी निकाली जा रही है। इस लॉटरी प्रक्रिया के खुलते ही यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि आने वाले चुनावों में कौन सी सीट किस वर्ग (एससी, एसटी, ओबीसी या सामान्य महिला) के लिए आरक्षित होगी। जैसे-जैसे लॉटरी की सुई आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे धौलपुर से लेकर जयपुर तक के राजनीतिक दिग्गजों और संभावित उम्मीदवारों की धड़कनें तेज हो गई हैं, और सभी की निगाहें प्रशासनिक मंच पर टिकी हुई हैं।
धौलपुर निकाय चुनाव और आरक्षण प्रक्रिया का पूरा गणित
किसी भी लोकतांत्रिक और स्थानीय निकाय चुनाव की नींव उसका आरक्षण ढांचा होता है, जो यह तय करता है कि किस क्षेत्र से किस वर्ग का प्रतिनिधि मैदान में उतरेगा। धौलपुर जिले की बात करें तो यहाँ नगर परिषद और नगर पालिकाओं के कुल मिलाकर 7 प्रमुख निकाय प्रमुख पद हैं, जिसमें 1 सभापति पद धौलपुर नगर परिषद का और 6 अध्यक्ष पद जिले की विभिन्न नगर पालिकाओं (जैसे बसेड़ी, राजाखेड़ा, सरमथुरा, मनिया और अन्य स्थानीय निकाय) के शामिल हैं। पिछले कई दिनों से राजनीतिक दलों और जनता के बीच इस बात को लेकर कयासों का बाजार गर्म था कि किस निकाय में किस वर्ग को प्रतिनिधित्व मिलेगा। आज होने वाली इस पारदर्शी लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से तमाम संवैधानिक नियमों और चक्रानुक्रम (Rotation System) के आधार पर सभी सातों पदों की स्थिति पर से पर्दा उठ जाएगा, जिससे चुनावी रणनीतिकारों को अपनी आगे की चाल चलने का पूरा मौका मिल जाएगा।
भरतपुर संभाग और धौलपुर में राजनीतिक दलों की हलचल
भरतपुर संभाग के अंतर्गत आने वाले धौलपुर जिले में स्थानीय निकाय चुनाव हमेशा से ही हाई-प्रोफाइल और प्रतिष्ठा का प्रश्न रहे हैं। यहाँ कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों ही प्रमुख दलों के साथ-साथ निर्दलीय और स्थानीय क्षत्रप अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। आरक्षण की घोषणा से ठीक पहले तक दोनों ही दलों के नेता अपने-अपने हिसाब से गुणा-गणित लगाने में व्यस्त थे। कई मौजूदा पार्षदों और पूर्व अध्यक्षों की नजरें इस बात पर टिकी थीं कि कहीं उनकी पसंदीदा सीट आरक्षित वर्ग में न चली जाए या फिर यदि वह सामान्य या महिला वर्ग के लिए खुलती है, तो वे अपनी दावेदारी को किस तरह मजबूत करेंगे। जैसे ही आज लॉटरी के परिणाम सामने आएंगे, वैसे ही जिले के राजनीतिक समीकरण रातों-रात बदल जाएंगे और टिकट बंटवारे की जोड़तोड़ का असली खेल शुरू हो जाएगा।
संभावित उम्मीदवारों और दावेदारों में बढ़ी बेचैनी
आरक्षण के पत्तों के खुलने के साथ ही धौलपुर के हर वार्ड और हर निकाय क्षेत्र में सरगर्मी अचानक से बहुत तेज हो गई है। जिन नेताओं ने पिछले पांच सालों से जमीन पर रहकर जनता के बीच काम किया है और चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे, वे आज टीवी स्क्रीन, सोशल मीडिया और प्रशासनिक दफ्तरों के जरिए हर एक अपडेट पर नजर बनाए हुए हैं। यदि किसी कद्दावर नेता की सीट सुरक्षित या उनकी पसंद के आरक्षण में आ जाती है, तो उनके खेमे में जश्न का माहौल बन जाता है, वहीं दूसरी ओर यदि कोई सीट किसी अन्य वर्ग के लिए आरक्षित हो जाती है, तो वहां के स्थापित चेहरों को या तो दूसरा रास्ता तलाशना पड़ता है या फिर अपने किसी करीबी और सहयोगी को मैदान में उतारने की रणनीति बनानी पड़ती है। इस प्रकार की लॉटरी प्रक्रिया कई बार स्थापित दिग्गजों के राजनीतिक करियर पर विराम लगा देती है तो कई नए और युवा चेहरों के लिए अचानक से सुनहरे दरवाजे खोल देती है।
चुनाव आयोग की तैयारियां और आगे का चुनावी कार्यक्रम
स्वायत्त शासन विभाग द्वारा आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब यह माना जा रहा है कि राज्य निर्वाचन आयोग कभी भी धौलपुर सहित प्रदेश के अन्य नगरीय निकायों के लिए आधिकारिक चुनावी तारीखों का ऐलान कर सकता है। आचार संहिता लगने से पहले सभी राजनीतिक दलों के पास अपनी जमीन मजबूत करने और मतदाताओं को साधने के लिए बहुत कम समय बचेगा। जिला प्रशासन ने भी निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से चुनाव संपन्न कराने के लिए अपनी कमर कस ली है। मतदान केंद्रों का निर्धारण, मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन और प्रशासनिक अधिकारियों की ड्यूटियां तय करने जैसे तमाम कार्य तेजी से निपटाए जा रहे हैं। धौलपुर की जनता इस बात को लेकर बेहद उत्सुक है कि उनके शहर की सरकार की कमान इस बार किसके हाथ में जाएगी और नया निकाय प्रमुख उनके विकास के सपनों को कितना पंख दे पाएगा।