Guru Purnima 2026: कब है गुरु पूर्णिमा? जानें सही डेट, पूजा का शुभ मुहूर्त, दुर्लभ योग और इस दिन क्या करें-क्या नहीं
सनातन संस्कृति में आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व है, जिसे गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima 2026) या व्यास पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। यह दिन हमारे जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महापर्व है। इस दिन महर्षि वेद व्यास का जन्म भी हुआ था, जिन्हें मानव जाति का पहला गुरु माना जाता है।
आइए जानते हैं साल 2026 में गुरु पूर्णिमा की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, बनने वाले विशेष योग और इस दिन किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
गुरु पूर्णिमा 2026: शुभ मुहूर्त और तिथि
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि का आरंभ और समापन समय इस प्रकार रहेगा:
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पूर्णिमा तिथि आरंभ: जुलाई 2026 में पूर्णिमा तिथि के नियमानुसार (पंचांगीय गणना के अनुसार)।
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पूजा और स्नान-दान का शुभ समय: इस पावन दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना और अपने गुरु का पूजन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
इस दिन बनने वाले शुभ योग
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, गुरु पूर्णिमा के दिन कई दुर्लभ और शुभ योगों का संयोग बन रहा है। इस दिन गुरु और चंद्रमा केक विशिष्ट स्थान पर होने से ज्ञान, बुद्धि और आर्थिक समृद्धि के मार्ग खुलते हैं। इसवक्त किए गए अनुष्ठान, दान और जप-तप का कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है।
गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करें? (What to Do)
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गुरु पूजन: इस दिन अपने गुरु के पास जाएं, उनका आशीर्वाद लें और उन्हें वस्त्र, फल या दक्षिणा भेंट करें। यदि गुरु भौतिक रूप से उपस्थित न हों, तो उनका मानसिक स्मरण कर उनकी तस्वीर की पूजा करें।
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वेद व्यास का स्मरण: वेदों के रचयिता महर्षि वेद व्यास का पूजन करें और 'व्यास पूजन' की परंपरा का निर्वाह करें।
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दान-पुण्य: इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, चने की दाल और पीली वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
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मंत्र जाप: भगवान विष्णु, शिव या अपने इष्ट देव के साथ-साथ 'गुरु मंत्र' का कम से कम 108 बार जाप करें।
गुरु पूर्णिमा के दिन क्या न करें? (What NOT to Do)
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गुरु का अनादर भूलकर भी न करें: इस दिन या किसी भी दिन अपने गुरु, माता-पिता या बड़ों का अपमान न करें। ऐसा करने से कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर होता है और जीवन में असफलता मिलने लगती है।
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तामसिक भोजन से दूरी: इस पवित्र दिन लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन का सेवन करने से बचना चाहिए। पूरी तरह सात्विक रहें।
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अपशब्द न बोलें: किसी के प्रति मन में द्वेष न रखें और न ही किसी को अपशब्द कहें। क्रोध और अहंकार से दूर रहकर शांत मन से ईश्वर और गुरु की आराधना करें।
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अंधेरे में न रखें घर: इस दिन शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं। घर में अंधेरा रखना या साफ-सफाई न करना नकारात्मकता को बुलावा देता है।