ये सब यहां नहीं चलता, तूफानी फिफ्टी जड़कर संजू सैमसन ने आलोचकों को दिया करारा जवाब
भारतीय क्रिकेट जगत में जब भी टैलेंट, क्लास और आक्रामकता की बात होती है, तो विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन (Sanju Samson) का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। अपनी शानदार बल्लेबाजी और शालीन स्वभाव के लिए मशहूर संजू ने हाल ही में मैदान पर एक ऐसा तूफानी अर्धशतक जड़ा है, जिसने उनके आलोचकों का मुंह पूरी तरह से बंद कर दिया है। पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और क्रिकेट गलियारों में संजू की तुलना लगातार नए और उभरते हुए युवा खिलाड़ियों से की जा रही थी, जिस पर अब इस विस्फोटक बल्लेबाज ने अपने बल्ले से करारा जवाब दिया है। मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संजू ने जिस बेबाक अंदाज में अपनी बात रखी और कहा कि "ये सब यहां नहीं चलता", उसने पूरी महफिल लूट ली। उनके इस बयान और धमाकेदार पारी के बाद से खेल प्रेमियों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि संजू ने आखिरकार आलोचकों को यह बता दिया है कि उनका अनुभव और क्लास का स्तर बिल्कुल अलग है, और अब शायद ही कोई उनकी तुलना किसी अन्य खिलाड़ी से करने की हिम्मत करेगा।
क्या था पूरा विवाद और क्यों हो रही थी संजू सैमसन की तुलना?
भारतीय घरेलू क्रिकेट और आईपीएल के मंच से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक हर युवा खिलाड़ी जब शानदार प्रदर्शन करता है, तो खेल पंडित अक्सर उसकी तुलना स्थापित खिलाड़ियों से करने लगते हैं। हाल ही के हफ्तों में सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे ट्रेंड्स चल रहे थे जहां युवा खिलाड़ियों की चमक के आगे संजू सैमसन के आंकड़ों और निरंतरता को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे थे। कुछ क्रिकेट फैंस और एक्सपर्ट्स लगातार यह कयास लगा रहे थे कि नई पीढ़ी के खिलाड़ी अब संजू की जगह लेने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस तरह की लगातार हो रही तुलनाओं से संजू सैमसन के चाहने वाले भी खासे आहत थे। लेकिन एक शानदार और दबाव से भरी पारी खेलकर संजू ने यह साबित कर दिया कि फॉर्म अस्थायी होती है लेकिन क्लास हमेशा स्थायी रहती है। उन्होंने अपने खेल से आलोचकों को यह संदेश दे दिया कि मैदान पर उतरकर रन बनाना और देश के लिए मैच जिताना ही किसी भी खिलाड़ी की असली पहचान होती है, न कि सोशल मीडिया पर होने वाली बेतुकी तुलनाएं।
मैदान पर आया संजू के बल्ले का तूफान, खेली यादगार और मैच जिताऊ पारी
मुकाबले के दौरान जब संजू सैमसन क्रीज पर उतरे, तो उनकी टीम शुरुआती झटकों से जूझ रही थी और विपक्षी गेंदबाजों का दबाव पूरी तरह से हावी था। ऐसी कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बल्लेबाजी करने आए संजू ने अपने चिर-परिचित अंदाज में धैर्य और आक्रामकता का बेहतरीन मिश्रण पेश किया। उन्होंने मैदान के चारों और खूबसूरत शॉट लगाते हुए महज कुछ ही गेंदों में अपनी तूफानी फिफ्टी पूरी कर ली। उनकी इस पारी में छक्कों और चौकों की ऐसी बरसात देखने को मिली जिसने गेंदबाजों के होश उड़ा दिए। संजू ने जिस परिपक्वता के साथ पारी को संभाला और तेजी से रन बनाए, उसने टीम को न सिर्फ एक सम्मानजनक और सुरक्षित स्कोर तक पहुंचाया, बल्कि मैच का पासा भी पूरी तरह से पलट दिया। उनकी इस बल्लेबाजी को देखकर स्टेडियम में बैठे दर्शक और टीवी स्क्रीन के सामने बैठे फैंस झूम उठे।
मैच के बाद का वो बेबाक बयान: 'ये सब यहां नहीं चलता, मैदान पर परफॉर्मेंस बोलती है'
मैच समाप्त होने के बाद जब संजू सैमसन मैन ऑफ द मैच या प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए मीडिया के सामने आए, तो उनके चेहरे पर एक आत्मविश्वास से भरी मुस्कान थी। जब उनसे पिछले कुछ दिनों से चल रही तुलनाओं और आलोचनाओं के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही संजीदगी और बेबाकी से जवाब देते हुए कहा कि मैदान के बाहर क्या चल रहा है और लोग क्या बातें कर रहे हैं, इससे उनका ध्यान कभी भटका नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सोशल मीडिया की बातें या किसी के साथ की जाने वाली तुलनाएं मैदान पर रन नहीं बनाती हैं, क्योंकि 'ये सब यहां मैदान पर नहीं चलता'। संजू के इस एक वाक्य ने स्पष्ट कर दिया कि वे इन बाहरी चीजों से पूरी तरह से परे रहकर केवल अपने खेल पर ध्यान केंद्रित करना पसंद करते हैं।
करियर के इस मोड़ पर संजू का यह तेवर भारतीय टीम के लिए कितना है महत्वपूर्ण?
संजू सैमसन भारतीय क्रिकेट के उन बदनसीब खिलाड़ियों में शुमार रहे हैं जिन्हें अपनी काबिलियत के मुताबिक लगातार मौके मिलने में हमेशा संघर्ष करना पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद जब भी उन्हें मौका मिला है उन्होंने अपनी छाप छोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस तूफानी पारी और उनके इस खरी-खरे बयान ने यह दिखा दिया है कि अब संजू मानसिक रूप से और अधिक मजबूत हो चुके हैं। आने वाले अंतरराष्ट्रीय दौरों और घरेलू टूर्नामेंटों के लिहाज से संजू का यह फॉर्म और उनका यह बेखौफ रवैया टीम मैनेजमेंट के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है। क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संजू इसी निरंतरता के साथ अपने बल्ले का जौहर दिखाते रहे, तो आने वाले समय में उनके आलोचकों को बोलने का कोई मौका नहीं मिलेगा और वे भारतीय टीम के एक स्थाई और सबसे भरोसेमंद मैच विनर बनकर उभरेंगे।