संघर्ष और हौसले की मिसाल: फौजी पिता ने लड़ी कारगिल की लड़ाई, अब बेटे ने श्रीलंका में शतक ठोक कर दिखाया दम
क्रिकेट के मैदान पर कई ऐसी कहानियां देखने को मिलती हैं जो इंसान के अंदर छिपे अदम्य साहस और कभी हार न मानने वाले जज्बे को बयां करती हैं. ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी भारतीय क्रिकेट टीम के युवा और प्रतिभाशाली विकेटकीपर-बल्लेबाज ध्रुव जुरेल (Dhruv Jurel) की है. श्रीलंका की धरती पर खेले गए टेस्ट मुकाबले में शतकीय पारी खेलकर उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है कि विपरीत परिस्थितियों से लड़कर कैसे शिखर पर पहुंचा जाता है। उनके इस शानदार प्रदर्शन के पीछे उनके परिवार का वह त्याग और संघर्ष छुपा है, जिसे जानकर हर किसी की आंखें नम हो जाएंगी.
कारगिल के रण बांकुरे के बेटे हैं ध्रुव जुरेल
ध्रुव जुरेल का यहां तक पहुंचना किसी परी कथा से कम नहीं है। उनके पिता नेम सिंह जुरेल भारतीय सेना में हवलदार रहे हैं और देश के लिए साल 1999 के कारगिल युद्ध में दुश्मन का डटकर मुकाबला कर चुके हैं. एक सैनिक का बेटा होने के नाते अनुशासन और संघर्ष उन्हें विरासत में मिला है। शुरुआत में उनके पिता चाहते थे कि ध्रुव पढ़ाई-लिखाई पूरी कर सेना में अधिकारी बनें और देश की सेवा करें, लेकिन ध्रुव के दिल में तो क्रिकेट बसता था। उन्होंने अपने सपनों को पूरा करने के लिए हर मुश्किल का डटकर सामना किया।
जब मां को बेचने पड़े थे अपने गहने
किस्मत और सपनों के बीच सबसे बड़ी दीवार आर्थिक तंगी थी। जब ध्रुव अपने शुरुआती दिनों में क्रिकेट की ट्रेनिंग ले रहे थे, तब उनके पास अच्छे क्रिकेट उपकरण खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। ऐसे कठिन समय में उनकी मां ने आगे बढ़कर अपने बेटे के सपनों को टूटने से बचाने के लिए अपने गहने तक बेच दिए थे. मां का वह त्याग और परिवार का अटूट समर्थन ही था कि ध्रुव ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर उत्तर प्रदेश से लेकर भारतीय टीम तक का सफर तय किया।
श्रीलंका की पिच पर चमका बल्ला, अनोखे अंदाज में दी श्रद्धांजलि
श्रीलंका के खिलाफ सीरीज के दौरान मैदान पर उतरी भारतीय टीम के लिए ध्रुव जुरेल ने संकटमोचन की भूमिका निभाते हुए शानदार शतकीय पारी खेली. मुश्किल वक्त में क्रीज पर डटकर खेलना और अपनी टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाना उनके फौजी खून की गवाही देता है. शतक पूरा करने के बाद उन्होंने जिस अंदाज में मैदान पर सैल्यूट किया और अपने बाइसेप्स पर 'जय जवान, जय किसान' के टैटू को दिखाया, उसने पूरी दुनिया का दिल जीत लिया. यह जश्न सिर्फ एक रन बनाने का नहीं था, बल्कि उन तमाम कुर्बानियों को समर्पित था जो उनके पिता और परिवार ने दी हैं.