वर्ल्ड कप विनर होने के बावजूद टीम इंडिया से बाहर क्यों? अनिल कुंबले ने टीम मैनेजमेंट पर दागे तीखे सवाल, की ये बड़ी मांग
भारतीय क्रिकेट टीम के महानतम लेग स्पिनर और पूर्व मुख्य कोच अनिल कुंबले (Anil Kumble) ने टीम इंडिया के मौजूदा टीम सेलेक्शन पर एक बड़ा और हैरान करने वाला बयान दिया है। कुंबले ने टी20 वर्ल्ड कप चैंपियन टीम के एक प्रमुख स्पिनर को लगातार प्लेइंग इलेवन और मुख्य स्क्वाड से बाहर रखने के फैसले पर गहरी नाराजगी जताई है। क्रिकेट पंडितों और फैंस के बीच 'जम्बो' के नाम से मशहूर कुंबले ने टीम मैनेजमेंट के इस रवैये को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जो खिलाड़ी आपको बड़े टूर्नामेंट जिताने का दम रखता है, उसे इस तरह बेंच पर बैठाना या नजरअंदाज करना खिलाड़ी के आत्मविश्वास को पूरी तरह तोड़ देता है। उन्होंने कोच और कप्तान के सामने इस खिलाड़ी को लेकर एक बड़ी मांग भी रख दी है।
"चैंपियन खिलाड़ी के साथ ऐसा बर्ताव क्यों?" कुंबले का फूटा गुस्सा
एक खेल चैनल से बातचीत के दौरान अनिल कुंबले ने टीम इंडिया के हालिया दौरों और श्रृंखलाओं के लिए चुने गए कॉम्बिनेशन पर खुलकर बात की। कुंबले ने कहा, "मुझे यह देखकर बेहद हैरानी होती है कि एक स्पिनर जो कुछ ही समय पहले तक वर्ल्ड कप की पिचों पर विरोधी बल्लेबाजों को अपनी उंगलियों पर नचा रहा था, वह अचानक टीम के रडार से बाहर कैसे हो गया? क्या एक खराब सीरीज या टीम कॉम्बिनेशन के नाम पर आप अपने सबसे बड़े मैच विनर को ड्रॉप कर सकते हैं?" कुंबले का इशारा भारत के उस वर्ल्ड कप विनिंग कलाई के स्पिनर (Wrist Spinner) की तरफ था, जिसने मुश्किल परिस्थितियों में टीम इंडिया को कई मौकों पर जीत दिलाई है।
कलाई के स्पिनर्स (Wrist Spinners) की अनदेखी पड़ सकती है भारी
अनिल कुंबले का मानना है कि आधुनिक सफेद गेंद की क्रिकेट (White-Ball Cricket) में मिस्ट्री और रिस्ट स्पिनर्स की भूमिका सबसे अहम होती है, क्योंकि वे बीच के ओवरों (Middle Overs) में विकेट निकालने की गारंटी देते हैं। कुंबले ने टीम मैनेजमेंट की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा:
-
केवल ऑलराउंडर के विकल्प पर निर्भरता: टीम मैनेजमेंट आजकल केवल उन स्पिनर्स को तरजीह दे रहा है जो थोड़ी बल्लेबाजी कर लेते हैं। इसके चक्कर में एक प्योर और जेन्युइन विकेट-टेकिंग स्पिनर को बाहर बैठना पड़ रहा है, जो कि सही दृष्टिकोण नहीं है।
-
निरंतरता की कमी: खिलाड़ियों को लगातार दो-तीन मैचों के बाद ड्रॉप कर देने से वे अपनी लय खो देते हैं। किसी भी स्पिनर को खुद को साबित करने और परिस्थितियों के अनुकूल ढलने के लिए लंबा रन (Consistent Run) मिलना बेहद जरूरी है।
कुंबले ने टीम मैनेजमेंट के सामने रखी ये बड़ी मांग
पूर्व दिग्गज कप्तान ने मुख्य कोच और कप्तान से इस नीति को तुरंत बदलने का आग्रह किया है। उन्होंने मांग की है कि आगामी आईसीसी (ICC) इवेंट्स और महत्वपूर्ण द्विपक्षीय सीरीज को ध्यान में रखते हुए इस वर्ल्ड कप विनिंग स्पिनर को तुरंत मुख्यधारा में वापस लाया जाए। कुंबले ने कहा, "मैनेजमेंट को इस खिलाड़ी के साथ साफ तौर पर संवाद करना चाहिए। उसे टीम में सुरक्षा का अहसास कराएं और केवल इलेवन में शामिल न करें, बल्कि उसे गेंदबाजी आक्रमण की कमान सौंपे। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो भारत मिडिल ओवरों में विकेट लेने की अपनी सबसे धारदार क्षमता को खो देगा।"
फैंस और सोशल मीडिया पर भी चयनकर्ताओं के खिलाफ बहस तेज
अनिल कुंबले के इस बेबाक बयान के बाद सोशल मीडिया और खेल गलियारों में चयनकर्ताओं (Selectors) की भूमिका को लेकर बहस एक बार फिर छिड़ गई है। फैंस भी कुंबले की इस बात से पूरी तरह सहमत नजर आ रहे हैं कि भारत को केवल 'बैटिंग डेप्थ' बढ़ाने के चक्कर में अपने मुख्य गेंदबाजों की कुर्बानी नहीं देनी चाहिए। अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आगामी सीरीज के लिए जब टीम इंडिया का चयन होगा, तो क्या कुंबले की इस बड़ी मांग और तीखे सवालों का असर चयनकर्ताओं और मुख्य कोच के फैसलों पर दिखाई देता है या नहीं।