प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन की तैयारियों को लेकर बुलाई गई थी गाजियाबाद में अहम बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन की तैयारियों को लेकर बुलाई गई थी गाजियाबाद में अहम बैठक

उत्तर प्रदेश के प्रमुख और औद्योगिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण शहर गाजियाबाद (Ghaziabad) से राजनीति के गलियारों से एक ऐसी दिलचस्प और हैरान करने वाली खबर सामने आई है, जिसने स्थानीय प्रशासन और पार्टी संगठन के भीतर चल रही अंदरूनी कलह को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी जन्मदिन और उससे जुड़े सेवा पखवाड़े की तैयारियों की रूपरेखा तय करने के लिए नगर निगम कार्यालय में एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि शहर में किस प्रकार भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए, लेकिन यह महत्वपूर्ण सभा देखते ही देखते अखाड़े में तब्दील हो गई। मेयर और पार्षदों के बीच किसी बात को लेकर ऐसा वैचारिक और मौखिक टकराव शुरू हुआ कि दोनों पक्ष आपस में ही बुरी तरह भिड़ गए, जिससे वहां मौजूद तमाम अधिकारी और नेता भी सकते में आ गए।

क्या थी बैठक की मुख्य वजह और कैसे शुरू हुआ मेयर और पार्षदों के बीच विवाद?

प्राप्त स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, गाजियाबाद नगर निगम के सभागार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के कार्यक्रमों के सफल संचालन के लिए पार्षदों, अधिकारियों और शहर के प्रथम नागरिक यानी मेयर की एक संयुक्त बैठक आयोजित की गई थी। शुरुआत में सब कुछ सामान्य रूप से चल रहा था और वार्डों में सफाई व्यवस्था, विकास कार्यों और जन्मदिन के बैनर-पोस्टर लगाने को लेकर चर्चा हो रही थी। लेकिन जैसे ही बैठक में वार्डवार फंड आवंटन और पार्षदों द्वारा उठाए जाने वाले स्थानीय विकास के मुद्दों पर बात पहुंची, माहौल अचानक गरमा गया। पार्षदों का आरोप था कि उनके क्षेत्रों की समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है और निगम प्रशासन उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। इसी तीखी नोकझोंक के बीच बात इतनी बढ़ गई कि मेयर और पार्षदों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते खुलेआम हंगामे में बदल गई।

विकास कार्यों और प्रोटोकॉल को लेकर पार्षदों में लंबे समय से सुलग रहा था असंतोष

गाजियाबाद के इस राजनीतिक घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि जनता के बीच काम करने वाले चुने हुए प्रतिनिधियों और शीर्ष प्रशासनिक पदों पर बैठे लोगों के बीच संवाद की कमी किस हद तक बढ़ सकती है। पार्षदों का लंबे समय से यह शिकवा रहा है कि नगर निगम के बड़े फैसलों में उनकी राय को उचित महत्व नहीं दिया जाता है, जिसके कारण उनके अपने वार्डों में जनता के तीखे सवालों का सामना उन्हें करना पड़ता है। प्रधानमंत्री के जन्मदिन जैसे बड़े और राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रम की बैठक में इस तरह की कलह सामने आने से संगठन के भीतर भी चिंता की लहर दौड़ गई है। स्थानीय नागरिकों और विपक्षी दलों ने भी इस तकरार को लेकर चुटकी लेनी शुरू कर दी है, क्योंकि जिस मंच पर एकता और सेवा का संदेश दिया जाना चाहिए था, वहां आपसी खींचतान जगजाहिर हो गई।

पार्टी संगठन और उच्च स्तर पर पहुंची शिकायत, डैमेज कंट्रोल में जुटे बड़े नेता

गाजियाबाद नगर निगम की इस बैठक में हुए हाई-वोल्टेज ड्रामे की गूंज अब लखनऊ और पार्टी के प्रदेश मुख्यालय तक पहुंच चुकी है। स्थानीय संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इस पूरे मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए दोनों पक्षों से रिपोर्ट तलब की है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर किस परिस्थिति में स्थिति इतनी बेकाबू हो गई। पार्टी के नेता अब डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं ताकि प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अभियानों पर इस आंतरिक कलह का कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। पार्षदों और मेयर के बीच की इस तनातनी को दूर करने के लिए बंद कमरे में सुलह-सफाई के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन शहर भर में इस राजनीतिक तकरार की चर्चाएं इन दिनों सबसे बड़ा हॉट टॉपिक बनी हुई हैं।

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