डोनाल्ड ट्रंप का महा-एलान: 'यह हमला नहीं, ईरान को गुनाहों की सजा है', अमेरिकी एयरस्ट्राइक से तेहरान दहला, दागीं मिसाइलें

डोनाल्ड ट्रंप का महा-एलान: 'यह हमला नहीं, ईरान को गुनाहों की सजा है', अमेरिकी एयरस्ट्राइक से तेहरान दहला, दागीं मिसाइलें

मिडिल ईस्ट में महायुद्ध के आसार: अमेरिकी बमबारी से कांपा ईरान

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख के बाद अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और विनाशकारी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस हवाई हमले में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रणनीतिक समुद्री रास्तों के आसपास स्थित ईरानी सैन्य ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया गया। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह ऑपरेशन करीब दस दिन पहले हुई कार्रवाई की तुलना में पांच गुना अधिक व्यापक, शक्तिशाली और अत्यधिक विनाशकारी रहा है, जिसने ईरान के सैन्य ढांचे को भारी चोट पहुंचाई है।

डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा संदेश: यह केवल जवाबी हमला नहीं, सीधी सजा है

व्हाइट हाउस और अमेरिकी सैन्य कमांडरों ने साफ कर दिया है कि यह केवल एक सामान्य जवाबी सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करने के लिए तेहरान को दी गई एक कठोर 'सजा' है। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, अप्रैल में हुए नाजुक युद्धविराम के बाद से यह अमेरिका का सबसे तीव्र और आक्रामक सैन्य अभियान है, जो आने वाले कई घंटों और दिनों तक लगातार जारी रह सकता है। अमेरिकी सेना का मुख्य लक्ष्य ईरान की उन घातक सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह खत्म करना है, जिनका इस्तेमाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जलमार्गों में वाणिज्यिक जहाजों को डराने, धमकाने और उन पर हमले करने के लिए किया जा रहा था।

तेहरान का खतरनाक पलटवार: ओमान सागर में अमेरिकी वॉरशिप पर मिसाइल अटैक

इस भीषण बमबारी के जवाब में ईरान की सेना ने भी अत्यधिक आक्रामक रुख अपनाते हुए अमेरिकी नौसेना पर सीधा हमला बोल दिया है। ओमान सागर में गश्त कर रहे अमेरिकी वॉरशिप को निशाना बनाकर ईरान ने एक साथ कई घातक एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दागे हैं। स्थानीय खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी युद्धपोतों की तरफ कम से कम दो आधुनिक क्रूज मिसाइलें तेजी से बढ़ीं, हालांकि अमेरिकी रक्षा तंत्र द्वारा इन्हें हवा में रोकने या इनसे हुए नुकसान की आधिकारिक पुष्टि अभी की जानी बाकी है। ईरान का यह पलटवार उसके तटीय इलाकों पर हुई भीषण बमबारी और अमेरिका द्वारा तेल व्यापार पर मिली विशेष रियायतों को अचानक रद्द किए जाने के विरोध में किया गया सीधा जवाबी एक्शन माना जा रहा है।

बंदर अब्बास और केश्म द्वीप धमाकों से दहले, कई बंदरगाहों पर लगी भीषण आग

ईरान की सरकारी मीडिया और स्थानीय नागरिकों ने देश के कई प्रमुख रणनीतिक हिस्सों में एक के बाद एक कई बड़े धमाकों की पुष्टि की है। विशेष रूप से तटीय शहर बंदर अब्बास, सीरिक और केश्म द्वीप के आसपास के आसमान में अमेरिकी लड़ाकू विमानों की गर्जना और मिसाइल फटने की आवाजें सुनी गईं। बंदर अब्बास के सबसे व्यस्त शाहिद हक्कानी बंदरगाह और सीरिक पियर पर अमेरिकी मिसाइलें गिरने के बाद आसमान छूती लपटें और भीषण आग देखी गई है। ईरान ने अभी तक अपने सैन्य बुनियादी ढांचे को हुए कुल नुकसान का आधिकारिक और विस्तृत आंकड़ा दुनिया के सामने जारी नहीं किया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर भारी तबाही की आशंका जताई जा रही है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले के बाद भड़का अमेरिका का गुस्सा

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस महा-अभियान के पीछे की मुख्य वजह स्पष्ट करते हुए बताया कि हाल ही में मंगलवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से शांतिपूर्वक गुजर रहे तीन बड़े वाणिज्यिक व्यापारिक जहाजों पर ईरान समर्थित ताकतों द्वारा कायराना हमले किए गए थे। अमेरिका ने वैश्विक मंच से चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता को बाधित करने या वैश्विक अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाने की किसी भी कोशिश की ईरान को बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। अमेरिका का यह कदम वैश्विक व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया एक बड़ा सैन्य संकल्प है।

ईरान ने लगाया समझौता तोड़ने का गंभीर आरोप, कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह बंद

इन विनाशकारी हमलों के तुरंत बाद तेहरान में ईरान के विदेश मंत्रालय ने बेहद तीखी और कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ईरान का आरोप है कि वाशिंगटन ने दोनों देशों के बीच पूर्व में हुए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding) का पूरी तरह से और बार-बार खुला उल्लंघन किया है। ईरानी राजनयिकों ने कहा कि देश अपनी संप्रभुता, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए हर संभव सैन्य कदम उठाने का संप्रभु अधिकार सुरक्षित रखता है। इसके साथ ही ईरान ने इस द्विपक्षीय समझौते को तोड़ने से उत्पन्न होने वाले किसी भी भयानक वैश्विक या क्षेत्रीय परिणाम के लिए पूरी तरह से अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है।

तेल प्रतिबंध फिर से लागू, वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सप्लाई चेन संकट में

इस बड़े सैन्य हमले के समानांतर अमेरिका ने आर्थिक मोर्चे पर भी ईरान की कमर तोड़ने की तैयारी कर ली है। वाशिंगटन ने ईरान के कच्चे तेल के पूरे कारोबार पर दोबारा सख्त आर्थिक प्रतिबंध लागू करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इसके कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन ठप होने का खतरा पैदा हो गया है। हालिया घटनाक्रम ने खाड़ी क्षेत्र में लंबे समय से लागू बेहद नाजुक युद्धविराम को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। अगर दोनों देशों के बीच यह तनाव लंबा खिंचता है, तो इसका सीधा असर न केवल मिडिल ईस्ट की सुरक्षा पर बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार व्यवस्था पर पड़ेगा।

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