फहीम खान के घर AK-47 से अंधाधुंध फायरिंग मामले में 22 साल बाद फैसला, शाहिद

फहीम खान के घर AK-47 से अंधाधुंध फायरिंग मामले में 22 साल बाद फैसला, शाहिद

झारखंड के कोयलांचल और अपराध जगत के इतिहास में धनबाद का वासेपुर हमेशा से खूनी रंजिशों, बाहुबलियों की जंग और गैंगवार के लिए चर्चित रहा है। इसी वासेपुर की जमीन पर दो दशक पहले घटी एक ऐसी सनसनीखेज वारदात, जिसने पूरे सूबे के पुलिस महकमे और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया था, उस पर आखिरकार अदालत का अंतिम फैसला आ गया है। मामला साल 2004 का है, जब वासेपुर के बेताज बादशाह माने जाने वाले फहीम खान के कमर मखदूमी रोड स्थित आवास पर दुश्मनों ने अत्याधुनिक AK-47 राइफलों से अचानक अंधाधुंध हमला बोल दिया था। बीस मिनट से भी ज्यादा समय तक चली इस ताबड़तोड़ गोलीबारी में पूरे इलाके में चीख-पुकार और दहशत का माहौल कायम हो गया था। इस खूनी हमले के दौरान फहीम खान के वफादार बॉडीगार्ड की गोलियों से भूनकर मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि जान बचाने की अफरा-तफरी में फहीम खान के भाई समेत कई लोग छत से नीचे कूद गए थे। इस ऐतिहासिक और बहुचर्चित हत्याकांड में 22 वर्षों के लंबे कानूनी इंतजार के बाद आखिरकार अदालत ने अपना कड़ा फैसला सुनाते हुए न्याय का परचम लहराया है।

धनबाद के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) की अदालत ने इस 22 साल पुराने गंभीर आपराधिक मामले में अपना फैसला सुनाते हुए मुख्य अभियुक्तों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद मुख्य साजिशकर्ता और शूटर शाहिद आलम उर्फ मजनू, उसके सहयोगी अरशद और एक अन्य आरोपी को फहीम खान के बॉडीगार्ड की हत्या, जानलेवा हमले और अवैध हथियारों के इस्तेमाल (आर्म्स एक्ट) के तहत दोषी करार दिया है। फैसला सुनाए जाते वक्त कोर्ट रूम के बाहर और धनबाद अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि किसी भी संभावित अप्रिय घटना या गैंगवार को रोका जा सके। सजा के बिंदुओं पर सुनवाई के लिए अदालत ने अगली तारीख तय की है, जहां इन तीनों दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। 22 सालों तक चली इस लंबी अदालती लड़ाई के बाद आए इस फैसले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कानून के हाथ चाहे जितने लंबे हों, देर से ही सही लेकिन इंसाफ जरूर मिलता है।

घटना के दिन की खौफनाक दास्तान को याद करते हुए चश्मदीदों और पुलिस की केस डायरी के पन्ने उस मंजर की भयावहता को साफ बयां करते हैं। बीती तारीख को दोपहर के वक्त जब फहीम खान के घर पर दैनिक गतिविधियां चल रही थीं, तभी अचानक एक दोपहिया और चार पहिया वाहनों से पहुंचे आधा दर्जन से अधिक नकाबपोश और आधुनिक हथियारों से लैस अपराधियों ने फहीम खान की हवेली को चारों तरफ से घेर लिया था। हमलावरों के पास प्रतिबंधित AK-47 राइफलें थीं, जिनसे उन्होंने बिना कोई मौका दिए सीधे मुख्य द्वार और कमरों पर गोलियों की बौछार शुरू कर दी। अचानक हुए इस अप्रत्याशित हमले से फहीम खान के सुरक्षाकर्मियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। फहीम के वफादार अंगरक्षक (बॉडीगार्ड) ने अपने मालिक के परिवार की रक्षा के लिए जैसे ही जवाबी मोर्चा संभालने की कोशिश की, हमलावरों की AK-47 से निकली दर्जनों गोलियां उसके सीने को छलनी कर गईं और उसने मौके पर ही तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। घर के भीतर मौजूद अन्य सदस्यों और फहीम के भाई ने अपनी जान बचाने के लिए बदहवासी में पहली मंजिल की छत से सीधे नीचे छलांग लगा दी थी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

धनबाद का वासेपुर क्षेत्र हमेशा से फहीम खान गैंग और उसके प्रतिद्वंद्वी गुटों (जैसे साबिर आलम और गॉडविन खान सिंडिकेट) के बीच खूनी गैंगवार का गवाह रहा है। इस AK-47 हमले की पृष्ठभूमि भी कोयलांचल में रंगदारी, स्क्रैप टेंडर और जमीनों के कारोबार पर वर्चस्व स्थापित करने की होड़ से जुड़ी हुई थी। हमले के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दर्जनों कारतूस के खोखे बरामद किए थे और एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की तलाश में छापेमारी शुरू की थी। 22 वर्षों तक चले इस लंबे ट्रायल के दौरान दर्जनों गवाहों के बयान दर्ज कराए गए, फॉरेंसिक सबूतों की जांच हुई और आखिरकार अदालत ने आरोपियों को दोषी पाया। इस ऐतिहासिक फैसले के आने के बाद वासेपुर और धनबाद के संवेदनशील इलाकों में पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। जगह-जगह फ्लैग मार्च निकाले जा रहे हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि वर्चस्व की इस पुरानी रंजिश में कोई नया मोड़ न आने पाए।