झारखंड में सूखे की आहट! मानसून की सुस्त चाल से धान की बुवाई ठप, 16 जिलों में 60% से कम बरसे बादल

झारखंड में सूखे की आहट! मानसून की सुस्त चाल से धान की बुवाई ठप, 16 जिलों में 60% से कम बरसे बादल

झारखंड के अन्नदाताओं के लिए इस साल खरीफ सीजन की शुरुआत बेहद चिंताजनक रही है। जून का महीना खत्म होने को है, लेकिन राज्य में मानसून की सुस्त रफ्तार ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। खेतों में पर्याप्त नमी न होने के कारण कई जिलों में धान की बुवाई और नर्सरी (पौध) तैयार करने का काम पूरी तरह ठप पड़ा है।

आंकड़ों में समझिए स्थिति की गंभीरता: 60% कम हुई बारिश

अधिकारियों से मिले आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड में इस साल जून के महीने में सामान्य से करीब 60 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।

  • सालाना औसत का संकट: 23 जून तक राज्य में अमूमन 122.6 मिलीमीटर बारिश हो जानी चाहिए थी, लेकिन इस बार महज 49.5 मिलीमीटर वर्षा ही रिकॉर्ड की गई है।

  • सबसे प्रभावित जिले: गढ़वा और साहिबगंज की स्थिति सबसे बदतर है, जहां क्रमशः 99% और 98% कम बारिश हुई है। रांची और दुमका को छोड़ दें तो बाकी सभी जिलों में मानसून का अकाल है।

खेतों में पसरा सन्नाटा, किसानों ने बयां किया दर्द

सामान्य तौर पर जून के आखिरी हफ्ते तक धान की नर्सरी तैयार हो जाती है और जुलाई के पहले सप्ताह से रोपाई शुरू हो जाती है। लेकिन इस बार हालात बिल्कुल उलट हैं।

"हम तो नर्सरी भी तैयार नहीं कर पाए"

गढ़वा जिले के किसान भूषण सिंह ने बताया, "इस समय तक हमारे खेत और नर्सरी तैयार हो जाते थे। इस बार बारिश न होने से हम शुरुआत भी नहीं कर पाए हैं।" वहीं लातेहार के गारू प्रखंड के किसान मनोरंजन किशन ने नाराजगी जताते हुए कहा कि खेतों की तैयारी तो प्रभावित हुई ही है, साथ ही सरकार की तरफ से अभी तक धान के बीज भी मुहैया नहीं कराए गए हैं।

मौसम विभाग की भविष्यवाणी: क्या जुलाई में मिलेगी राहत?

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिमी मानसून ने 12 जून को झारखंड में दस्तक तो दी थी, लेकिन उसके बाद यह कमजोर पड़ गया।

रांची मौसम विज्ञान केंद्र के उपनिदेशक अभिषेक आनंद ने उम्मीद जताई है कि मानसून अब धीरे-धीरे आगे बढ़ेगा और अगले दो-तीन दिनों में गढ़वा और पलामू जिलों को भी कवर कर लेगा। मौसम विभाग के अनुसार, 26 जून के बाद मानसून के दोबारा सक्रिय होने की संभावना है, जिससे जुलाई के पहले हफ्ते में राज्य में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।

धान संकट के बीच सरकार का 'प्लान-बी' और वैकल्पिक खेती की सलाह

बिगड़ते हालात को देखते हुए बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) के शोध निदेशक पी.के. सिंह ने किसानों को धान के बजाय कम पानी में उगने वाली वैकल्पिक फसलों को अपनाने की सलाह दी है।

झारखंड की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने बताया कि सरकार अल नीनो (El Nino) के खतरे को देखते हुए पूरी तरह अलर्ट है। सरकार ने संकट से निपटने के लिए रणनीति बनाई है:

  • जलवायु-अनुकूल फसलें: मडुआ, मक्का और दलहन जैसी कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

  • अतिरिक्त आय के साधन: किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री से राहत पैकेज की मांग: कृषि मंत्री तिर्की ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ हुई ऑनलाइन बैठक में झारखंड के कम वर्षा वाले प्रभावित जिलों के लिए विशेष राहत पैकेज जारी करने की मांग भी उठाई है।

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