आंधी-तूफान का तांडव और वज्रपात की चेतावनी: झारखंड के 14 जिलों में झमाझम बरसेंगे मेघ
झारखंड के मौसम के मिजाज को लेकर मौसम विभाग की ओर से एक बार फिर से बेहद चेतावनी भरी और डरावनी खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे राज्य के लोगों और प्रशासनिक महकमे की सांसे अटका दी हैं। पिछले कुछ दिनों से लगातार उमस भरी गर्मी और चिपचिपी धूप से परेशान राज्यवासियों को भले ही बारिश की फुहारों का इंतजार था, लेकिन अब मौसम का यह नया रूप किसी बड़े खतरे की आहट लेकर आ रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र ने झारखंड के बोकारो, राजधानी रांची समेत कुल 14 जिलों में अगले कुछ घंटों के भीतर मूसलाधार बारिश, भयंकर वज्रपात (आकाशीय बिजली) और तीव्र गति से चलने वाले तूफानी हवाओं को लेकर ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी कर दिया है। इस दौरान बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली गिरने की घटनाओं के साथ-साथ पैंसठ किलोमीटर प्रति घंटे (65 KMPH) की रफ्तार से आंधी चलने की पूरी आशंका जताई गई है, जो कच्चे मकानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के लिए भारी तबाही का सबब बन सकती है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस दौरान बेहद सतर्क रहें और बेवजह अपने घरों से बाहर न निकलें, ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।
झारखंड के किन-किन 14 जिलों पर मंडरा रहा है सबसे बड़ा खतरा और क्या है मौसम विभाग का ताजा पूर्वानुमान
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार झारखंड के जिन चौदह जिलों में इस भयंकर मौसमी आपदा का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलने वाला है, उनमें बोकारो और रांची के अलावा रामगढ़, हजारीबाग, धनबाद, गिरिडीह, कोडरमा, चतरा, पलामू, गढ़वा, लोहरदगा, गुमला, खूंटी और सिमडेगा के कुछ हिस्से मुख्य रूप से शामिल हैं। इन सभी जिलों में मानसून की टफ लाइन और स्थानीय स्तर पर बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण बादलों का एक बहुत बड़ा और घना झुंड सक्रिय हो गया है, जो देखते ही देखते मूसलाधार बारिश में तब्दील हो रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बादलों की यह सक्रियता अगले चौबीस से अड़तालीस घंटों तक बनी रह सकती है, जिसके चलते कई इलाकों में जलभराव, ट्रैफिक जाम और निचले इलाकों में पानी भरने की गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन इकाइयों को पूरी तरह से मुस्तैद कर दिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके और प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों को तेजी से संचालित किया जा सके।
वज्रपात और 65 किलोमीटर की रफ्तार वाली हवाओं से जनजीवन पर मंडराता भारी संकट
इस बार के इस मौसमी बदलाव में सबसे खतरनाक पहलू तेज आंधी और आकाशीय बिजली यानी वज्रपात का गिरना है, जो पिछले कुछ समय में झारखंड में कई लोगों की जान ले चुका है। जब 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलती हैं, तो बड़े-बड़े होर्डिंग्स, पुराने पेड़ और कच्चे मकानों की छतें उखड़ने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे सड़क पर चल रहे वाहनों और राहगीरों की जान को सीधा जोखिम पैदा हो जाता है। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में काम कर रहे किसानों और मवेशी चराने वाले लोगों के लिए वज्रपात सबसे बड़ा काल बनकर सामने आता है, क्योंकि खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे बिजली गिरने की आशंका सर्वाधिक होती है। मौसम विभाग ने बार-बार यह चेतावनी दी है कि जब भी गरज-चमक के साथ आंधी शुरू हो, लोग तुरंत किसी पक्की इमारत या सुरक्षित आश्रय स्थल के भीतर चले जाएं और भूलकर भी किसी पेड़ या बिजली के खंभे के पास शरण न लें।
खेती-किसानी और फसलों पर पड़ने वाला बुरा असर, किसानों के चेहरों पर आई गहरी चिंता
झारखंड एक ऐसा राज्य है जहाँ की कृषि व्यवस्था मुख्य रूप से मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है, लेकिन इस प्रकार की बेमौसम और अत्यधिक तीव्र आंधी-तूफान वाली बारिश फसलों के लिए वरदान के बजाय अभिशाप बन जाती है। खेतों में लहलहाती धान की फसलें और अन्य मौसमी सब्जियां इस तेज हवा और मूसलाधार पानी के दबाव के कारण जमीन पर पूरी तरह से बिछड़ जाती हैं, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। पिछले कुछ हफ्तों से हुई कम बारिश के बाद जब अचानक इस तरह का भीषण चक्रवाती और तूफानी रूप देखने को मिलता है, तो खेतों में जलभराव के कारण पौधों की जड़ें सड़ने लगती हैं और फसलें बर्बाद होने की कगार पर पहुंच जाती हैं। किसानों के चेहरे इस कुदरती मार को देखकर मुरझा गए हैं और वे इस बात की चिंता में डूबे हैं कि यदि यह मौसम यूं ही बना रहा, तो इस बार उनकी पैदावार को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ेगा।
प्रशासन और जिला आपदा प्रबंधन की ओर से जारी की गई विशेष एडवाइजरी और सुरक्षा के निर्देश
इस आसन्न खतरे को देखते हुए झारखंड सरकार और विभिन्न जिलों के जिला प्रशासन ने आम जनता के लिए एक विस्तृत और सख्त एडवाइजरी जारी की है, जिसमें लोगों को घरों के अंदर रहने की हिदायत दी गई है। सभी जिला मुख्यालयों में आपातकालीन नियंत्रण कक्ष (Emergency Control Rooms) को चौबीस घंटे सक्रिय कर दिया गया है ताकि किसी भी दुर्घटना या पेड़ गिरने की सूचना मिलने पर तुरंत राहत दल को मौके पर भेजा जा सके। बिजली विभागों को भी यह निर्देश दिए गए हैं कि आंधी-तूफान के दौरान यदि किसी क्षेत्र में फॉल्ट आता है या तार टूटते हैं, तो तुरंत बिजली की आपूर्ति को काट दिया जाए ताकि किसी बड़े करंट हादसे से बचा जा सके। स्कूली बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है ताकि खराब मौसम के इस दौर में किसी को भी किसी प्रकार की असुविधा या खतरे का सामना न करना पड़े।