झारखंड की राजनीति के चर्चित चेहरे जयराम महतो का अनूठा और देसी अंदाज

झारखंड की राजनीति के चर्चित चेहरे जयराम महतो का अनूठा और देसी अंदाज

भारतीय राजनीति के फलक पर जब कोई युवा नेता अपने अनोखे संघर्ष और जमीन से जुड़े तेवर के दम पर उभरता है, तो जनता के बीच उसकी लोकप्रियता किसी फिल्मी स्टार से कम नहीं होती है। झारखंड की राजनीति में इन दिनों अपनी बुलंद आवाज और अनूठी शैली के लिए पहचाने जाने वाले युवा विधायक जयराम महतो एक बार फिर से सुर्खियों के केंद्र में आ चुके हैं। अपनी आक्रामक भाषण शैली और छात्र-युवा आंदोलनों से राजनीतिक सफर तय करने वाले जयराम महतो इन दिनों किसी बड़े राजनीतिक भाषण या धरने-प्रदर्शन के कारण चर्चा में नहीं हैं, बल्कि उनके जीवन से जुड़ा एक बेहद प्यारा, पारिवारिक और दिलचस्प किस्सा सामने आया है। राजनीति की चकाचौंध से दूर जब एक कद्दावर नेता अपने गांव की माटी में पहुंचता है, तो वहां के समीकरण कैसे बदल जाते हैं, यह घटना उसका सबसे जीवंत उदाहरण है।

पीएचडी की परीक्षा से पहले गांव पहुंचे विधायक और पारिवारिक माहौल

एक तरफ जहां जयराम महतो उच्च शिक्षा और अकादमिक जगत में अपनी पहचान बनाने के लिए अपनी पीएचडी (PhD) की महत्वपूर्ण परीक्षा की तैयारियों में जुटे हुए थे और परीक्षा देने से ठीक पहले आशीर्वाद लेने अपने पैतृक गांव पहुंचे थे, वहीं दूसरी तरफ घर पहुंचते ही उनका सामना एक ऐसी घरेलू परिस्थिति से हो गया जिसकी उन्होंने शायद कल्पना भी नहीं की होगी। राजनैतिक मंचों पर सरकार और बड़ी-बड़ी व्यवस्थाओं को अपने तर्कों से घेरने वाले युवा विधायक जब अपने घर की चारदीवारी के भीतर पहुंचे, तो वे एक आम पोते की भूमिका में नजर आए। गांव के साधारण परिवेश में जब वे अपनी दादी और परिवार के अन्य बुजुर्गों से मिले, तो वहां का माहौल पूरी तरह से राजनीतिक चर्चाओं से हटकर विशुद्ध पारिवारिक और अपनेपन से भर गया, जिसे देखकर हर कोई अपनी हंसी नहीं रोक पाया।

पढ़ाई छोड़ दादी की अनोखी जिद: 'अब पहले पोते की शादी देखनी है'

जब जयराम महतो ने अपनी दादी के सामने अपनी पीएचडी की परीक्षा और उच्च शिक्षा से जुड़ी बातें छेड़नी चाहीं, तो उनकी दादी ने पढ़ाई-लिखाई और किताबों की उन लंबी-चौड़ी बातों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया। ग्रामीण परिवेश की सादगी और अपने पोते के प्रति स्नेह से भरी दादी ने दो टूक शब्दों में अपनी जिद सामने रख दी कि अब पोते की पढ़ाई बहुत हो चुकी है और उन्हें किताबों से ज्यादा घर में बहू लाने की फिक्र सता रही है। दादी का यह कहना था कि डिग्री और चुनाव अपनी जगह हैं, लेकिन अब उम्र हो चली है और वे अपने पोते के सिर पर सेहरा बंधा हुआ देखना चाहती हैं। एक तरफ जहां देश और राज्य के भविष्य की नीतियां तय करने वाला विधायक अकादमिक परीक्षा पास करने की जद्दोजहद में था, वहीं घर की बुजुर्गवार मुखिया की प्राथमिकताएं बिल्कुल अलग और ठेस देसी अंदाज में सामने आ गई।

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ यह प्यारा और मनोरंजक वाकया

आज के दौर में सोशल मीडिया की दुनिया हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर पैनी नजर रखती है, और जब झारखंड के इस लोकप्रिय युवा नेता से जुड़ा यह पारिवारिक वाकया इंटरनेट पर आया, तो उसने देखते ही देखते तहलका मचा दिया। एक्स (पूर्व ट्विटर), इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर इस खबर और इससे जुड़े वीडियो को हजारों लोगों ने शेयर किया है। लोग इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि भले ही कोई व्यक्ति कितना भी बड़ा नेता या सेलिब्रिटी क्यों न बन जाए, लेकिन अपने घर और परिवार के सामने वह हमेशा एक आम इंसान ही रहता है। इंटरनेट यूजर्स ने दादी और पोते के इस खट्टे-मीठे संवाद पर बेहद प्यारे और मजेदार कमेंट्स किए हैं, जिससे यह साबित होता है कि जनता राजनेताओं के इस मानवीय और सहज रूप को देखना बहुत पसंद करती है।

राजनीति की व्यस्तता और पारिवारिक जिम्मेदारियों का खूबसूरत संतुलन

जयराम महतो के जीवन से जुड़ा यह वाकया हमें यह सिखाता है कि सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक व्यस्तताओं के बीच भी पारिवारिक जड़ें और अपनों का प्यार कितना मायने रखता है। एक तरफ जहाँ वे झारखंड की जनता के हक और अधिकारों की लड़ाई विधानसभा से लेकर सड़क तक लड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अपने गांव की माटी और बुजुर्गों के लाड़-प्यार से उनका जुड़ाव आज भी पूरी तरह से बरकरार है। पीएचडी की परीक्षा देने से पहले दादी का आशीर्वाद लेना और उनकी उस नटखट जिद का सामना करना, जिसमें शादी की बात सबसे ऊपर थी, उनके जीवन के संघर्षशील पहलू को एक बेहद खूबसूरत मानवीय रंग देता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि झारखंड की राजनीति को नई दिशा देने वाले जयराम महतो अपनी पढ़ाई और राजनीतिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी दादी की इस बहुचर्चित जिद को कब और कैसे पूरा करते हैं।