रांची और जमशेदपुर समेत 15 जिलों में मूसलाधार बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया आंधी और भारी वज्रपात का रेड अलर्ट

रांची और जमशेदपुर समेत 15 जिलों में मूसलाधार बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया आंधी और भारी वज्रपात का रेड अलर्ट

बंगाल की खाड़ी में उठे भीषण चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का तांडव अब झारखंड के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। इस शक्तिशाली चक्रवात के प्रभाव से पूरे राज्य का मौसम अचानक बदल गया है और राजधानी रांची, लौहनगरी जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद समेत राज्य के करीब 15 जिलों में बीती रात से ही रुक-रुक कर मूसलाधार बारिश और गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली का प्रकोप जारी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और रांची मौसम केंद्र ने आपदा की आशंका को देखते हुए अगले 48 घंटों के लिए विशेष सतर्कता बरतने की हिदायत दी है। कई इलाकों में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल रही हैं, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है और प्रशासन ने लोगों को बेवजह घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है।

झारखंड के 15 जिलों में चक्रवात 'अर्नब' का हाहाकार और बारिश का कहर

चक्रवात 'अर्नब' के जमीनी इलाकों (लैंडफॉल) की ओर बढ़ने के साथ ही झारखंड के पूर्वी, मध्य और दक्षिणी हिस्सों में इसका सबसे ज्यादा असर दर्ज किया गया है। जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम), सरायकेला-खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, खूंटी, रांची, रामगढ़, हजारीबाग, धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, देवघर, दुमका, जामताड़ा और लातेहार में बीती शाम से ही काली घटाएं छाई हुई हैं और लगातार तेज बौछारें गिर रही हैं। निचले इलाकों में पानी भरने की खबर है, जिससे सड़कों पर जलजमाव हो गया है और यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई जगहों पर जलभराव के कारण वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। निचले स्तर के पुल-पुलियों के ऊपर से पानी बहने की वजह से कई ग्रामीण इलाकों का संपर्क मुख्य शहरों से कट गया है।

वज्रपात और तेज रफ्तार आंधी को लेकर मौसम विभाग की सख्त चेतावनी

मौसम केंद्र रांची ने बुलेटिन जारी करते हुए चेतावनी दी है कि चक्रवाती तूफान की वजह से बादलों में तीव्र गर्जन हो रहा है, जिससे वज्रपात (ठनका गिरने) का गंभीर खतरा बना हुआ है। पिछले 24 घंटों में राज्य के कई हिस्सों से पेड़ उखड़ने, बिजली के खंभे गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं सामने आई हैं। मौसम विभाग के अनुसार, जब तक चक्रवात का दबाव कम नहीं होता, तब तक बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। किसानों और खेत में काम करने वाले मजदूरों के साथ-साथ आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे और पानी से भरे इलाकों में शरण न लें। आंधी के कारण कच्चे मकानों और टीन-शेड वाले ढांचों को भी भारी नुकसान पहुंचने की आशंका व्यक्त की गई है।

रांची और जमशेदपुर में जनजीवन बेपटरी, बिजली और परिवहन सेवाएं प्रभावित

राजधानी रांची और औद्योगिक शहर जमशेदपुर में चक्रवाती बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से थाम दिया है। रांची के निचली बस्तियों और व्यस्त बाजार वाले इलाकों में जलजमाव के कारण जनजीवन ठप सा हो गया है। जमशेदपुर में स्वर्णरेखा और खरकई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिसे देखते हुए जिला प्रशासन ने नदी तट के आसपास रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट होने के निर्देश जारी किए हैं। चक्रवात 'अर्नब' की वजह से तेज हवाओं के थपेड़ों से कई जगहों पर बिजली के तार टूट गए हैं, जिससे शहर से लेकर गांव तक घंटों बिजली गुल है। रेल और सड़क परिवहन पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है; लंबी दूरी की ट्रेनें धीमी गति से चलाई जा रही हैं और राजमार्गों पर दृश्यता (विजिबिलिटी) बेहद कम होने के कारण गाड़ियां रेंग-रेंग कर चल रही हैं।

आपदा प्रबंधन टीम (NDRF और SDRF) हाई अलर्ट पर, कंट्रोल रूम स्थापित

चक्रवात के बढ़ते खतरे और 15 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए झारखंड सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गए हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) की टीमों को संवेदनशील और प्रभावित जिलों में तैनात कर दिया गया है। जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला स्तरीय कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे सक्रिय रखें। स्वास्थ्य विभाग को जलजनित बीमारियों से निपटने और नजदीकी अस्पतालों में आपातकालीन वार्ड तैयार रखने को कहा गया है। प्रशासन लगातार माइकिंग के जरिए लोगों को सतर्क कर रहा है और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दे रहा है।

किसानों की फसलों को भारी नुकसान और आगे कैसा रहेगा मौसम का मिजाज

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का असर अगले दो से तीन दिनों तक झारखंड के विभिन्न हिस्सों में बना रहेगा। इस बेमौसम और अत्यधिक भारी बारिश के कारण राज्य के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। खेतों में कटी या खड़ी धान की फसलें, सब्जियां और अन्य व्यावसायिक फसलें पानी में डूबने से बर्बाद हो गई हैं। मौसम विभाग के अनुसार, जैसे-जैसे यह चक्रवाती हवा का दबाव उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ेगा, बारिश की तीव्रता में धीरे-धीरे कमी आएगी। हालांकि, तब तक लोगों को मौसम के कड़े मिजाज का सामना करना पड़ेगा और पूरी सावधानी बरतनी होगी।