पिता सीए तो बेटा 'सुपर CA', हैरी पॉटर के फैन राजन काबरा ने फाउंडेशन, इंटर और फाइनल में AIR 1 लाकर रचा इतिहास
देश की सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण मानी जाने वाली चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) की परीक्षा में एक ऐसा अकल्पनीय और ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित हुआ है, जिसने पूरे शिक्षा जगत और कॉर्पोरेट सेक्टर को चकित कर दिया है। सामान्य तौर पर सीए परीक्षा के किसी एक पड़ाव में देश भर में टॉप करना ही किसी भी छात्र के लिए जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, लेकिन एक मेधावी युवा ने सीए की तीनों सीढ़ियों को एक के बाद एक फतेह करते हुए नया इतिहास रच दिया है। मशहूर काल्पनिक पात्र 'हैरी पॉटर' के दीवाने और किताबों में डूबे रहने वाले राजन काबरा ने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) द्वारा आयोजित सीए फाउंडेशन, सीए इंटरमीडिएट और सीए फाइनल तीनों की राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में ऑल इंडिया रैंक 1 (AIR 1) हासिल कर एक ऐसा रिकॉर्ड कायम कर दिया है जिसे तोड़ पाना किसी चमत्कार से कम नहीं होगा।
राजन काबरा की इस अकल्पनीय और शानदार सफलता के पीछे उनके पारिवारिक माहौल और संस्कारों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। राजन के पिता स्वयं एक जाने-माने और अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) हैं। बचपन से ही अपने घर के भीतर बहियों, फाइनेंशियल रिपोर्ट्स, बैलेंस शीट्स और नंबरों का ताना-बाना देखते हुए राजन का रुझान भी फाइनेंस और अकाउंटेंसी की दुनिया की तरफ बढ़ता चला गया। पिता को दिन-रात कड़ी मेहनत करते और कॉर्पोरेट जगत में सम्मान पाते देखकर राजन ने बेहद कम उम्र में ही यह ठान लिया था कि वे भी चार्टर्ड अकाउंटेंट ही बनेंगे। हालांकि, पिता के सीए होने से उन पर एक अलग प्रकार का सामाजिक और मानसिक दबाव भी था, लेकिन राजन ने इस दबाव को अपनी ताकत में बदला और हर दिन खुद को बेहतर बनाने के लिए जी-तोड़ मेहनत शुरू कर दी।
राजन काबरा की सफलता की कहानी केवल किताबी कीड़ा बने रहने की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक बेहद सुनियोजित और संतुलित जीवनशैली का अनुपम उदाहरण है। राजन काल्पनिक उपन्यासों, विशेषकर विश्वप्रसिद्ध लेखिका जे.के. रोलिंग की 'हैरी पॉटर' सीरीज़ के बहुत बड़े फैन हैं। पढ़ाई के भारी-भरकम तनाव से खुद को मुक्त रखने के लिए वे अक्सर हैरी पॉटर की किताबें पढ़ा करते थे और फैंटेसी की दुनिया में खोकर अपने दिमाग को तरोताजा करते थे। वे कभी भी 14 से 16 घंटे की थकाऊ पढ़ाई पर विश्वास नहीं करते थे, बल्कि उनका मानना था कि 6 से 8 घंटे की एकाग्र और लक्षित पढ़ाई किसी भी परीक्षा को क्रैक करने के लिए पर्याप्त होती है। हर विषय के कॉन्सेप्ट को गहराई से समझना, कठिन अध्यायों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटना और नियमित अंतराल पर रिवीजन करना ही राजन के इस 'सुपर सीए' बनने का सबसे बड़ा जादुई मंत्र साबित हुआ।
राजन की यह स्वर्णिम यात्रा तब शुरू हुई जब उन्होंने सीए फाउंडेशन की परीक्षा में देश भर में पहला स्थान (AIR 1) हासिल करके अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इसके बाद जब सीए इंटरमीडिएट के नतीजे आए, तो एक बार फिर टॉपर्स की लिस्ट में सबसे ऊपर राजन काबरा का ही नाम चमक रहा था। लोग हैरान थे कि कोई छात्र लगातार दो बार राष्ट्रीय स्तर पर टॉप कैसे कर सकता है। लेकिन असली धमाका तब हुआ जब आईसीएआई ने सीए फाइनल परीक्षा के नतीजे घोषित किए और राजन ने तीसरी बार भी ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर इतिहास के पन्नों में अपना नाम अमर कर लिया। एक ही छात्र द्वारा सीए के तीनों कठिनतम स्तरों में प्रथम स्थान पाना भारतीय शिक्षा के इतिहास में एक दुर्लभ घटना है, जिसे देखकर देश भर के शिक्षक, चार्टर्ड अकाउंटेंट और छात्र उन्हें 'सुपर सीए' की उपाधि दे रहे हैं।
अपनी इस ऐतिहासिक सफलता के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए राजन काबरा ने बेहद सादगी के साथ अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के मार्गदर्शन, गुरुओं के आशीर्वाद और अपनी निरंतरता को दिया। भविष्य की अपनी योजनाओं पर बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल पारंपरिक प्रैक्टिस तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि फाइनेंस, कॉर्पोरेट एडवाइजरी और स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग के क्षेत्र में कुछ नया और बड़ा करना चाहते हैं। सीए की तैयारी कर रहे देश के लाखों युवाओं को गुरुमंत्र देते हुए राजन ने कहा कि सीए की परीक्षा डरने के लिए नहीं बल्कि सही रणनीति से जीतने के लिए होती है। यदि आप अपनी गलतियों का लगातार विश्लेषण करते हैं, आईसीएआई के स्टडी मटीरियल पर पूरा भरोसा रखते हैं और तनाव से दूर रहकर अपनी हॉबीज के लिए भी समय निकालते हैं, तो दुनिया की कोई भी परीक्षा आपको शीर्ष पर पहुंचने से नहीं रोक सकती।