AI की पढ़ाई करने वालों को मिलेंगे 200000, UG के लिए 1 लाख, PhD वालों को 80 हजार महीना

AI की पढ़ाई करने वालों को मिलेंगे 200000, UG के लिए 1 लाख, PhD वालों को 80 हजार महीना

आधुनिक तकनीक और डिजिटल क्रांति के इस दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) न केवल उद्योगों का चेहरा बदल रहा है, बल्कि यह भविष्य के करियर का सबसे बड़ा और सबसे भरोसेमंद जरिया भी बनता जा रहा है। भारत को वैश्विक स्तर पर एआई टेक्नोलॉजी का सुपरपावर बनाने और देश के प्रतिभावान छात्रों को इस क्षेत्र में शोध व अध्ययन के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार और अग्रणी शैक्षणिक संस्थानों ने एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत की है। नए नीतिगत फैसलों के तहत एआई और उससे जुड़ी एडवांस्ड तकनीकों की पढ़ाई करने वाले मेधावी छात्रों और शोधकर्ताओं को अभूतपूर्व वित्तीय सहायता देने की घोषणा की गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत एआई क्षेत्र में विशेष दक्षता हासिल करने वाले छात्रों को ₹2,00,000 की एकमुश्त अनुदान राशि, अंडरग्रेजुएट (UG) स्तर की पढ़ाई करने वाले युवाओं को ₹1,00,000 का प्रोत्साहन पैकेज और पीएचडी (PhD) स्तर पर गहन शोध करने वाले रिसर्च स्कॉलर्स को ₹80,000 प्रति माह तक का भारी-भरकम स्टाइपेंड दिया जाएगा।

तकनीकी शिक्षा को सुलभ और आकर्षक बनाने के लिए तैयार किए गए इस विशेष मॉडल में स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) स्तर के छात्रों के लिए अलग-अलग श्रेणियां तय की गई हैं। जो छात्र मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों या आईआईटी और एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में बीटेक इन एआई, डेटा साइंस या मशीन लर्निंग जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले रहे हैं, उन्हें उनके शैक्षणिक प्रदर्शन और मेरिट के आधार पर ₹1,00,000 तक की छात्रवृत्ति सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। इसके अलावा, जो विद्यार्थी एआई के कोर डोमेन में उन्नत प्रोजेक्ट्स और इनोवेटिव प्रोटोटाइप विकसित कर रहे हैं, उन्हें प्रोत्साहन राशि के रूप में सीधे ₹2,00,000 की ग्रांट उपलब्ध कराई जाएगी। इस वित्तीय मदद का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रतिभावान छात्र को केवल पैसों की तंगी या महंगी लैब फीस के कारण अपनी तकनीकी पढ़ाई और इनोवेटिव विचारों को बीच में न छोड़ना पड़े।

एआई के क्षेत्र में उच्चस्तरीय शोध (Research and Development) को गति देने के लिए डॉक्टरेट यानी पीएचडी (PhD) कर रहे रिसर्च स्कॉलर्स के लिए सबसे बड़ा और आकर्षक प्रावधान किया गया है। पीएचडी स्कॉलर्स को अब हर महीने ₹80,000 तक का फैलोशिप स्टाइपेंड प्रदान किया जाएगा ताकि वे बिना किसी आर्थिक चिंता के अपना पूरा ध्यान एआई मॉडल डेवलपमेंट, जनरेटिव एआई, न्यूरल नेटवर्क, रोबोटिक्स और हेल्थकेयर एआई जैसे गंभीर व उपयोगी विषयों पर केंद्रित कर सकें। आमतौर पर उच्च शिक्षा में मिलने वाली अन्य फेलोशिप की तुलना में यह राशि काफी अधिक है, जिससे देश के बेहतरीन दिमागों को विदेश जाने के बजाय अपने ही देश के संस्थानों में रहकर विश्वस्तरीय रिसर्च करने की प्रेरणा मिलेगी। इस फेलोशिप के साथ-साथ शोधकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में अपने रिसर्च पेपर प्रस्तुत करने और आधुनिक कंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर हासिल करने के लिए अतिरिक्त रिसर्च ग्रांट भी मुहैया कराई जाएगी।

इस आकर्षक स्कॉलरशिप और फेलोशिप योजना का लाभ उठाने के लिए शिक्षा मंत्रालय और संबंधित एआई अनुसंधान परिषदों द्वारा एक एकीकृत डिजिटल पोर्टल तैयार किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत पात्र होने के लिए उम्मीदवारों को किसी मान्यता प्राप्त भारतीय विश्वविद्यालय या राष्ट्रीय महत्व के संस्थान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या उससे संबंधित संबद्ध शाखा में नामांकित होना अनिवार्य होगा। चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और मेरिट-आधारित रखा गया है, जिसमें उम्मीदवारों के पिछले अकादमिक रिकॉर्ड, एआई प्रोजेक्ट प्रपोजल, नेशनल लेवल टेस्ट स्कोर (जैसे GATE या NET) और इंटरव्यू में प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाएगी। शिक्षा जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना के लागू होने से देश में लाखों कुशल एआई प्रोफेशनल्स तैयार होंगे, जो न केवल भारत के आईटी और स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे बल्कि भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सबसे बड़ा वैश्विक नॉलेज हब बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे।