सोनम वांगचुक ने कैसे खत्म की भूख हड़ताल? देर रात सरकार ने मानी ये शर्तें पढ़ें इनसाइड स्टोरी
पर्यावरणविद् और प्रसिद्ध शिक्षाविद् सोनम वांगचुक द्वारा लद्दाख के अधिकारों और छठी अनुसूची को लेकर चलाया जा रहा आंदोलन देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ था। उनके अनशन और प्रदर्शन ने एक बार फिर केंद्र सरकार का ध्यान इस ठंडे रेगिस्तानी इलाके की गंभीर मांगों की ओर खींचा। आखिरकार, लंबी और मैराथन बैठकों के बाद देर रात सरकार और उनके प्रतिनिधियों के बीच सहमति बनी, जिसके बाद सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल खत्म करने का बड़ा ऐलान किया। आइए जानते हैं इस पूरी इनसाइड स्टोरी के बारे में कि पर्दे के पीछे आखिर क्या कुछ तय हुआ।
देर रात चली मैराथन बैठक और बनी सहमति
लद्दाख के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार पर लगातार दबाव बना रहे सोनम वांगचुक के आंदोलन का असर आखिरकार रंग लाया। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच कई दौर की उच्चस्तरीय बातचीत हुई। गतिरोध को तोड़ने के लिए गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच देर रात तक मंथन चला। इस दौरान सरकार ने लद्दाख की जनता से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सकारात्मक रुख दिखाया, जिसके बाद आंदोलन समाप्त करने का रास्ता साफ हो गया।
सरकार ने मानी कौन-कौन सी मुख्य शर्तें?
सोनम वांगचुक और उनके समर्थकों की मुख्य मांग लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष दर्जा देना, पर्यावरण की सुरक्षा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सुनिश्चित करना रही है। इनसाइड रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने लद्दाख के विकास और वहां के स्थानीय लोगों की संस्कृति, भूमि और भाषा के संरक्षण के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति के गठन और बातचीत के दायरे को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। सरकार के इस आश्वासन के बाद ही अनशन समाप्त करने का फैसला लिया गया।
आंदोलन खत्म होने के बाद लद्दाख में क्या हैं आगे के हालात?
भूख हड़ताल के समाप्त होने से लद्दाख से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में राहत की सांस ली गई है। सोनम वांगचुक के इस कदम ने यह साबित कर दिया है कि संवाद के जरिए बड़े से बड़े मुद्दों का हल निकाला जा सकता है। हालांकि, स्थानीय जनता और युवाओं की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन जमीन पर कितनी जल्दी और प्रभावी रूप से लागू होते हैं।