लखनऊ में दो दिन बंद रहेंगी शराब की दुकान, सरकारी छुट्टी भी नहीं, तब क्यों लिया एक्शन?

लखनऊ में दो दिन बंद रहेंगी शराब की दुकान, सरकारी छुट्टी भी नहीं, तब क्यों लिया एक्शन?

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत राज्य के कई हिस्सों में रहने वाले लोगों और शौकीनों के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। आमतौर पर जब भी बाजार में शराब की दुकानें बंद रहती हैं, तो लोगों के जहन में सबसे पहले किसी बड़े राष्ट्रीय पर्व, धार्मिक त्योहार या किसी गजेटेड सरकारी छुट्टी (Government Holiday) का ख्याल आता है। लेकिन इस बार मामला बिल्कुल अलग और दिलचस्प है, क्योंकि कैलेंडर में दूर-दूर तक किसी आम सरकारी छुट्टी का नामोनिशान नहीं होने के बावजूद जिला प्रशासन ने राजधानी में दो दिनों तक शराब की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने का सख्त आदेश जारी कर दिया है। इस अचानक लिए गए प्रशासनिक फैसले के बाद से लोगों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर जब कोई बड़ा त्योहार या सामान्य अवकाश नहीं है, तो प्रशासन ने किस मजबूरी या बड़ी वजह के चलते यह कड़ा एक्शन लिया है। आइए जानते हैं कि इस पूरे घटनाक्रम और पाबंदी के पीछे की असली और पुख्ता वजह क्या है।

जिला प्रशासन द्वारा जारी किए गए आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार, लखनऊ में शराब के ठेके, मॉडल शॉप, बीयर की दुकानें और बार किसी आम दिन की तरह नहीं खुलेंगे। प्रशासन ने इसके लिए साफ तौर पर दो तारीखें तय की हैं, जिनके दौरान शहर के चप्पे-चप्पे पर आबकारी विभाग की कड़ी नजर रहेगी। पहली तारीख मतदान की प्रक्रिया से जुड़ी है जबकि दूसरी तारीख इसके नतीजों यानी मतगणना से संबंधित है। इन तय तारीखों पर शहर के किसी भी कोने में वैध या अवैध रूप से शराब बेचने की अनुमति नहीं होगी, और यदि कोई दुकानदार नियमों को ताक पर रखकर अपनी दुकान का शटर खोलने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत भारी जुर्माने और लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के इस फरमान के बाद शहर के शराब कारोबारियों में भी हड़कंप मच गया है और वे लगातार यह सुनिश्चित करने में लगे हैं कि उनके प्रतिष्ठान पूरी तरह से बंद रहें।

अब सवाल यह उठता है कि जब कोई सार्वजनिक राष्ट्रीय अवकाश नहीं है, तो यह पाबंदी क्यों लगाई गई है? इसका सीधा और स्पष्ट जवाब उत्तर प्रदेश में चल रहे विधान परिषद (MLC) यानी स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव से जुड़ा हुआ है। लोकतंत्र के इस बड़े पर्व को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी, भयमुक्त और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए निर्वाचन आयोग और स्थानीय प्रशासन बेहद सख्त रुख अपनाता है। चुनाव आचार संहिता और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के नियमों के मुताबिक, मतदान और मतगणना के दौरान किसी भी प्रकार की असामाजिक गतिविधियों, मतदातों को प्रलोभन देने या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की संभावनाओं को शून्य करने के लिए 'ड्राई डे' (Dry Day) घोषित करना अनिवार्य होता है। चूंकि लखनऊ में एमएलसी चुनाव के लिए मतदान और उसके बाद वोटों की गिनती का कार्य होना है, इसलिए बिना किसी सरकारी त्योहार के भी इन चुनिंदा दिनों पर प्रशासनिक विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए दुकानों को बंद रखने का यह फैसला लिया गया है।

जिलाधिकारी और आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने संयुक्त रूप से स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव की शुचिता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। राजधानी के सभी इलाकों में पुलिस बलों को गश्त बढ़ाने और अवैध शराब की तस्करी या डंपिंग करने वालों पर शिकंजा कसने के सख्त निर्देश दे दिए गए हैं। खुफिया तंत्र को भी पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है ताकि कोई भी शख्स नियमों की धज्जियां न उड़ा सके। प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि इस अनिवार्य बंदी के चलते दुकानदारों या लाइसेंसधारकों को किसी भी तरह का वित्तीय मुआवजा या छूट नहीं दी जाएगी, और तय नियमों का पालन करना हर हाल में हर कारोबारी की जिम्मेदारी होगी। यदि आप भी इन निर्धारित दिनों पर किसी पार्टी या निजी जरूरत के लिए खरीदारी की सोच रहे थे, तो अपने कदम रोक लीजिए क्योंकि कानून का डंडा सख्ती से चलने के लिए पूरी तरह तैयार है और लोकतंत्र के इस महापर्व में शांति बनाए रखना ही प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।