खुद को टाइगर कहने वाली ममता अब CJP से समझौता कर रही हैं, ये उनका पतन है- लॉकेट चटर्जी
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बयानों का दौर तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की वरिष्ठ नेत्री और पूर्व सांसद लॉकेट चटर्जी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर बेहद तीखा और आक्रामक हमला बोला है। लॉकेट चटर्जी ने कहा कि जो ममता बनर्जी खुद को बंगाल की 'टाइगर' कहती थीं और हर मुद्दे पर सीना तानकर लड़ने का दावा करती थीं, आज वही ममता बनर्जी और उनकी सरकार सुप्रीम कोर्ट या मुख्य न्यायाधीश (CJP) की व्यवस्थाओं के आगे घुटने टेकते हुए समझौते की मुद्रा में आ गई हैं। भाजपा नेत्री का यह बयान राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है और इस पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं।
ममता बनर्जी के राजनीतिक सफर और 'टाइगर' छवि पर तंज
लॉकेट चटर्जी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पूरे राजनीतिक अतीत और वर्तमान कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने अपने लंबे राजनीतिक करियर में हमेशा यह दिखाने की कोशिश की है कि वह किसी के सामने झुकती नहीं हैं और खुद को बंगाल की सबसे बड़ी बाघिन या 'टाइगर' मानती हैं। लेकिन हालिया कानूनी लड़ाइयों, केंद्रीय जांच एजेंसियों की सख्ती और न्यायालयों में चल रहे मामलों के बाद अब उनकी वह आक्रामक छवि पूरी तरह धूमिल हो चुकी है। लॉकेट चटर्जी का कहना है कि आज जिस तरह से ममता सरकार न्यायपालिका और प्रशासनिक दबाव के आगे झुक रही है, वह उनके वैचारिक पतन का स्पष्ट प्रमाण है।
न्यायपालिका और केंद्रीय व्यवस्थाओं के साथ टकराव का इतिहास
पश्चिम बंगाल सरकार और विभिन्न न्यायिक संस्थाओं तथा केंद्र सरकार के बीच टकराव का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में शिक्षक भर्ती घोटाला, आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड और कई अन्य गंभीर आपराधिक व प्रशासनिक मामलों को लेकर ममता बनर्जी सरकार का सुप्रीम कोर्ट, कलकत्ता हाईकोर्ट और केंद्रीय एजेंसियों से आमना-सामना होता रहा है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि जब तक राजनीतिक जमीन मजबूत थी, तब तक ममता सरकार कानून की धज्जियां उड़ाती रही, लेकिन अब जब शिकंजा कस चुका है, तो वे कानूनी और संस्थागत समझौतों का रास्ता तलाश रही हैं।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) का पलटवार और तीखा विरोध
लॉकेट चटर्जी के इस कड़े बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने भी तुरंत मोर्चा संभाल लिया है। टीएमसी प्रवक्ताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी के पास राज्य की जनता को दिखाने के लिए कोई विकास का मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए उनके नेता केवल व्यक्तिगत छींटाकशी और आधारहीन बयानबाजी करने में लगे हैं। टीएमसी का कहना है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हमेशा से संविधान, कानून और देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करती आई हैं, और भाजपा का यह दावा पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और झूठ का पुलिंदा है।
बंगाल की राजनीति और आगामी चुनावों पर पड़ने वाला असर
इस तरह के जुबानी हमलों और तीखी बयानबाजी से पश्चिम बंगाल का राजनीतिक तापमान लगातार गर्माता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में राज्य के भीतर कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार के मुद्दे और न्यायपालिका से जुड़े मामलों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच और अधिक आक्रामक संघर्ष देखने को मिलेगा। जहां एक तरफ भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाकर ममता सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रही है, वहीं टीएमसी इसे अपनी राजनीतिक ताकत और जनसमर्थन के दम पर खारिज करने की पूरी कोशिश कर रही है।