जम्मू-कश्मीर में कूरियर नेटवर्क पर सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर! आतंकी गतिविधियों और हथियारों की तस्करी रोकने के लिए कड़े नियम लागू
जन्नत कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद करने के लिए प्रशासन ने एक बेहद अहम और कड़ा कदम उठाया है। घाटी में सक्रिय आतंकी संगठनों, ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) और असामाजिक तत्वों द्वारा पार्सल और कूरियर सेवाओं (Courier Services) के जरिए हथियारों, गोला-बारूद, ड्रग्स या संदिग्ध सामग्री की तस्करी के प्रयासों को नाकाम करने के लिए कूरियर नेटवर्क पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी गई है।
क्यों पड़ी कूरियर नेटवर्क पर सख्ती की जरूरत?
हाल के दिनों में सुरक्षा एजेंसियों को खुफिया इनपुट मिले थे कि सीमा पार बैठे आंतकी आका और उनके स्थानीय मददगार घाटी में हिंसा फैलाने के लिए पारंपरिक रास्तों के साथ-साथ अब कोरियर और पार्सल डिलीवरी सेवाओं का गुप्त रूप से इस्तेमाल करने की फिराक में हैं। छोटे पार्सल के जरिए अवैध हथियार, नकदी या प्रतिबंधित सामग्री को एक जगह से दूसरी जगह आसानी से भेजने के कुचक्र का पर्दाफाश होने के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है।
कूरियर कंपनियों और संचालकों के लिए नए निर्देश
सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर जम्मू-कश्मीर में काम करने वाली सभी छोटी-बड़ी कूरियर और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए सख्त गाइडलाइंस तैयार की हैं:
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ग्राहकों की आईडी अनिवार्य: अब बिना वैध पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड या पैन कार्ड) के कोई भी व्यक्ति कूरियर या पार्सल बुक नहीं करा सकेगा। भेजने वाले और पाने वाले दोनों का पूरा विवरण दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है।
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पार्सल की स्कैनिंग और चेकिंग: संवेदनशील इलाकों में स्थित कूरियर कार्यालयों में आधुनिक स्कैनिंग मशीनों और सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी संदिग्ध वस्तु की समय रहते पहचान की जा सके।
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नियमित ऑडिट और निगरानी: पुलिस और खुफिया एजेंसियां समय-समय पर कूरियर कंपनियों के गोदामों और रिकॉर्ड्स का औचक निरीक्षण करेंगी ताकि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत लगाम लगाई जा सके।
सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा कदम
प्रशासन के इस सख्त रुख से जहां एक तरफ देशविरोधी ताकतों के नापाक मंसूबों को करारा झटका लगा है, वहीं आम नागरिकों की सुरक्षा भी पुख्ता हो रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन कड़े नियमों से पार्सल नेटवर्क का दुरुपयोग पूरी तरह रुकेगा और आतंकवाद के वित्तपोषण (Terror Financing) तथा हथियार तस्करी पर नकेल कसने में बड़ी मदद मिलेगी।