संदिग्ध चैट और एक ही नंबर वाले पांच नोटों की तस्वीरें; बिहार में जाली नोट कारोबार का खुलासा
बिहार में भारतीय जाली मुद्रा (Fake Indian Currency Note - FICN) का एक बेहद चौंकाने वाला और खौफनाक नेटवर्क सामने आया है, जिसने राज्य की पुलिस और खुफिया एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। जांच में सामने आया है कि जालसाज न केवल उच्च गुणवत्ता (High Quality) के नकली नोट छाप रहे थे, बल्कि एक ही सीरियल नंबर के पांच-पांच नोट तैयार कर उन्हें बाजार में खपाने की फिराक में थे। इस पूरे रैकेट का खुलासा पुलिस द्वारा जब्त किए गए मोबाइल फोनों में मिली संदिग्ध व्हाट्सएप चैट और तस्वीरों से हुआ है। सीमावर्ती इलाकों से लेकर राज्य के प्रमुख व्यापारिक शहरों तक फैले इस नेटवर्क ने स्थानीय अर्थव्यवस्था और सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और विशेष कार्यबल (STF) अब इस बात की तहकीकात में जुटे हैं कि इस जाली नोट गिरोह के तार अंतरराष्ट्रीय तस्करों से जुड़े हैं या फिर यह कोई स्थानीय डिजिटल रैकेट है।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई और एक ही सीरियल नंबर वाले जाली नोटों का सनसनीखेज सच
विशेष सूचना के आधार पर बिहार पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने गुप्त ठिकाने पर छापेमारी कर इस गिरोह के कई सदस्यों को दबोचा। तलाशी के दौरान अधिकारियों के हाथ ऐसे नोट लगे जिन्हें देखकर सुरक्षा एजेंसियां भी हैरान रह गईं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किए जाने वाले असली नोटों की हूबहू नकल करते हुए जालसाजों ने ऐसे नोट छापे थे, जिनमें सुरक्षा धागा (Security Thread) और वॉटरमार्क तक को बारीकी से कॉपी करने की कोशिश की गई थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एक ही सीरियल नंबर के पांच से ज्यादा नोट बरामद किए गए। इसका सीधा मतलब यह है कि एक ही नंबर प्लेट और डिजिटल फाइल का इस्तेमाल कर भारी मात्रा में जाली नोटों की खेप तैयार की जा रही थी, जो आम जनता के लिए असली और नकली में फर्क करना लगभग असंभव बना देती।
संदिग्ध व्हाट्सएप चैट से खुला राज, कोड वर्ड में होता था नकली नोटों का सौदा
इस पूरे जाली नोट नेटवर्क का भंडाफोड़ उस समय हुआ जब पुलिस ने संदिग्धों के मोबाइल फोन जब्त कर उनके फॉरेंसिक डेटा का विश्लेषण किया। संदिग्धों के व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य एनक्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स पर कई ऐसी गुप्त चैट मिलीं, जिनमें जाली नोटों की खेप, लेन-देन की जगह और दरें तय की जा रही थीं। बातचीत में असली और नकली नोटों के सौदे के लिए खास कोड वर्ड्स का इस्तेमाल किया जा रहा था, जैसे 1 लाख रुपये के असली नोटों के बदले 3 से 4 लाख रुपये मूल्य के जाली नोटों की डिलीवरी दी जाती थी। चैट हिस्ट्री में एक ही सीरियल नंबर वाले भारतीय नोटों की तस्वीरें, गड्डियों के फोटो और कूरियर के जरिए भेजने की लोकेशन शेयर की गई थी, जिससे साफ होता है कि यह नेटवर्क काफी समय से बेखौफ होकर काम कर रहा था।
बिहार के सीमावर्ती जिलों से जुड़ा तार: क्या अंतरराष्ट्रीय तस्करों का है हाथ?
बिहार की भौगोलिक स्थिति और नेपाल व बांग्लादेश से सटे सीमावर्ती जिलों के कारण हमेशा से जाली नोट तस्करों के लिए यह इलाका संवेदनशील रहा है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि इस गिरोह के तार सीमा पार बैठे आकाओं और बड़े संगठित अपराध गिरोहों से जुड़े हो सकते हैं। जाली नोटों की छपाई में जिस तरह के विशेष कागज, स्याही और आधुनिक डिजिटल प्रिंटरों का इस्तेमाल किया गया है, उससे किसी पेशेवर लैब या अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की संलिप्तता से इंकार नहीं किया जा सकता। राज्य पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) अब इस बात की गहनता से पड़ताल कर रही है कि इन नोटों की आपूर्ति किन-किन राज्यों और जिलों के स्थानीय बाजारों, पेट्रोल पंपों और छोटे व्यापारियों तक की जा रही थी।
आधुनिक तकनीकों और डिजिटल स्कैनर के जरिए असली-नकली का खेल
आज के आधुनिक दौर में अपराधी प्रिंटिंग तकनीक का दुरुपयोग कर फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। बिहार में पकड़े गए इस गिरोह ने हाई-रिज़ॉल्यूशन स्कैनर, एडवांस फोटोशॉप सॉफ्टवेयर और लेजर प्रिंटर का इस्तेमाल कर भारतीय मुद्रा के सुरक्षा फीचर्स को कॉपी करने का प्रयास किया था। आरोपियों के पास से कई डिजिटल डिवाइस, फर्जी आधार कार्ड, अलग-अलग नामों से जारी सिम कार्ड और प्रिंटिंग मटीरियल बरामद हुआ है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह Generative Engine और AI-बेस्ड इमेज एडिटिंग टूल्स के इस दौर में साइबर अपराध का एक नया और खतरनाक पहलू है, जहां डिजिटल फाइलों के जरिए नकली करेंसी को बिना किसी झिझक के दोहराया जा रहा है।
आम जनता को सतर्क रहने की सलाह और कानूनी कार्रवाई का दौर जारी
जाली नोटों के इस बड़े नेटवर्क के खुलासे के बाद बिहार पुलिस ने आम नागरिकों, बैंक कर्मचारियों और छोटे दुकानदारों के लिए अलर्ट जारी किया है। पुलिस ने सलाह दी है कि किसी भी बड़े लेन-देन के समय नोटों के सीरियल नंबर, वॉटरमार्क और सिक्योरिटी थ्रेड की अच्छी तरह जांच कर लें। यदि किसी नोट का सीरियल नंबर अन्य नोटों से मेल खाता है या कागज़ की गुणवत्ता पर संदेह होता है, तो तुरंत निकटतम पुलिस स्टेशन या बैंक शाखा को सूचित करें। गिरफ्तार किए गए आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है और पुलिस मुख्य साजिशकर्ता तक पहुंचने के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है।