वोटर लिस्ट में नाम छूटा तो क्या करें? नोट कर लें तारीख कब क्या करना है, अफसरों के तबादले पर भी रोक
भारतीय लोकतंत्र में हर एक वोट कीमती होता है और देश तथा प्रदेश के भाग्य का फैसला करने में प्रत्येक नागरिक की मतदाता सूची (Voter List) में भागीदारी सबसे अहम मानी जाती है। यदि आगामी चुनावों में आप अपने मताधिकार का सही इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो सबसे पहले यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि मतदाता सूची में आपका नाम सही सलामत दर्ज है या नहीं। कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि मामूली तकनीकी कमियों, पते में बदलाव या अधिकारियों की अनदेखी के चलते सूची से योग्य मतदाताओं के नाम कट जाते हैं, जिससे मतदान के दिन भारी निराशा हाथ लगती है। इस समस्या से निपटने और चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान का पूरा खाका तैयार कर लिया है। यदि आपका या आपके परिवार के किसी सदस्य का नाम वोटर लिस्ट में छूट गया है, तो अब बिना घबराए तय समय सीमा के भीतर निर्धारित चरणों का पालन करके इसे ठीक कराया जा सकता है।
मतदाता सूची के इस विशेष संशोधन और पुनरीक्षण अभियान के तहत नागरिकों के लिए तारीखों का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया गया है। प्रक्रिया के शुरुआती चरण में निर्वाचन विभाग द्वारा ड्राफ्ट वोटर लिस्ट (Draft Electoral Roll) सार्वजनिक की जाती है, ताकि आम लोग उसमें अपने और अपने परिजनों के नाम की आसानी से जांच कर सकें। ड्राफ्ट पब्लिश होने के बाद नागरिकों को अपने दावे और आपत्तियां (Claims and Objections) दर्ज कराने के लिए एक महीने का पूरा समय दिया जाता है। इस निर्धारित अवधि के दौरान यदि किसी का नाम सूची में शामिल होने से रह गया है, किसी मृत व्यक्ति का नाम सूची से हटवाना है, या फिर नाम, उम्र, पते व फोटो में किसी प्रकार की अशुद्धता को ठीक कराना है, तो संबंधित फॉर्म भरकर जमा किए जा सकते हैं। प्रशासनिक अमला इन सभी प्राप्त आवेदनों की घर-घर जाकर और दस्तावेजों के आधार पर भौतिक सत्यापन करता है, जिसके बाद अंतिम और अपडेटेड मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाता है ताकि निर्वाचन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की त्रुटि की गुंजाइश न बचे।
यदि जांच के दौरान आपको पता चलता है कि मतदाता सूची से आपका नाम गायब है, तो आपको परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। नए मतदाताओं के रूप में नाम जुड़वाने या छूटे हुए नाम को दोबारा दर्ज कराने के लिए भारत निर्वाचन आयोग के निर्धारित फॉर्म 6 (Form 6) का उपयोग करना होता है। इस फॉर्म के साथ आयु प्रमाण पत्र (जैसे जन्म प्रमाण पत्र या शैक्षणिक मार्कशीट), निवास प्रमाण पत्र (जैसे आधार कार्ड, बिजली का बिल या राशन कार्ड) और पासपोर्ट साइज फोटो संलग्न करके बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के पास जमा करना होता है या फिर आप 'वोटर सर्विस पोर्टल' (voters.eci.gov.in) के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं। इसी प्रकार, यदि किसी मृत या शिफ्ट हो चुके व्यक्ति का नाम सूची से हटवाना हो तो फॉर्म 7 (Form 7) का प्रयोग किया जाता है, जबकि नाम, स्पेलिंग, पता या अन्य प्रविष्टियों में सुधार के लिए फॉर्म 8 (Form 8) भरना पड़ता है। समय रहते इन फॉर्म्स को भरकर जमा करने से यह सुनिश्चित हो जाता है कि मतदान के दिन आपको बिना किसी रुकावट के वोट डालने का अधिकार मिल सके।
मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य को पूरी निष्पक्षता, सटीकता और बिना किसी राजनीतिक दबाव के संपन्न कराने के लिए निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि इस पूरी प्रक्रिया से जुड़े किसी भी निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी (DM), उपजिलाधिकारी (SDM), तहसीलदार या बूथ स्तर के मुख्य पर्यवेक्षकों के तबादलों पर आगामी आदेशों तक पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। आयोग का मानना है कि यदि इस संवेदनशील प्रक्रिया के दौरान बीच में अधिकारियों के तबादले किए जाएंगे, तो कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है और पात्र नागरिकों के नाम जुड़ने से छूट सकते हैं। चुनाव आयोग ने यह भी साफ किया है कि विशेष परिस्थितियों में यदि ट्रांसफर करना बेहद आवश्यक हो, तो उसके लिए आयोग से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इस कड़े प्रशासनिक फैसले से यह संदेश गया है कि निर्वाचन आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के प्रति कितना गंभीर है, और आम नागरिकों को भी चाहिए कि वे इस अभियान का हिस्सा बनकर अपने लोकतांत्रिक दायित्व को पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाएं।