आखिर क्यों पाकिस्तान की तुलना में कोसों आगे है भारत का डिफेंस सिस्टम
भारत और पाकिस्तान के बीच रक्षा तकनीक और सामरिक ताकत के मामले में हमेशा से एक बहुत बड़ा अंतर रहा है, जिसे लेकर अक्सर दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञ तुलना करते रहते हैं। हाल ही में पाकिस्तान की ओर से अपनी नई हाइपरसोनिक या उन्नत मिसाइल 'फतह-3' को लेकर तमाम दावे किए गए, जिसके बाद से यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह हथियार भारत की अजेय ब्रह्मोस (BrahMos) मिसाइल के सामने कहीं टिकता है। भारतीय रक्षा अनुसंधान और रणनीतिक क्षमताओं की बात की जाए, तो भारत को ग्लोबल डिफेंस प्लेटफॉर्म पर यूं ही तकनीकी रूप से 'बाप' नहीं कहा जाता है। वास्तविकता यह है कि पाकिस्तान की कागजी और सीमित तकनीक और भारत के स्वदेशी तथा अत्याधुनिक मिसाइल तंत्र के बीच जमीन-आसमान का फर्क है। आइए इस विशेष रिपोर्ट में गहराई से समझते हैं कि आखिर क्यों पाकिस्तान कभी भी ब्रह्मोस जैसी विश्वस्तरीय मिसाइल के सामने बराबरी नहीं कर सकता और इसके पीछे की असली इनसाइड स्टोरी क्या है।
क्या है पाकिस्तान की 'फतह-3' मिसाइल और इसके दावों की जमीनी हकीकत क्या है?
पड़ोसी देश पाकिस्तान लंबे समय से अपनी रक्षा प्रणालियों को लेकर बड़े-बड़े दावे करता रहा है, और इसी कड़ी में उसने 'फतह' श्रृंखला के तहत अपनी नई मिसाइल प्रणालियों को दुनिया के सामने पेश करने की कोशिश की है। पाकिस्तानी मीडिया और सेना का दावा है कि 'फतह-3' एक आधुनिक गाइडेड रॉकेट या मिसाइल सिस्टम है जो सटीकता के साथ अपने लक्ष्य को भेद सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय रक्षा विश्लेषकों का यह मानना है कि पाकिस्तान के अधिकांश रक्षा प्रोजेक्ट्स या तो विदेशी तकनीक की नकल होते हैं या फिर आर्थिक बदहाली के कारण केवल कागजों और परेड तक ही सीमित रह जाते हैं। पाकिस्तान के पास न तो उस स्तर का मजबूत रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) इंफ्रास्ट्रक्चर है और न ही वित्तीय संसाधन, जो एक स्वदेशी, अत्याधुनिक और उच्च-सटीकता वाली हाइपरसोनिक या सुपरसोनिक मिसाइल विकसित करने के लिए अनिवार्य रूप से जरूरी होता है। इसके विपरीत, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है, जहां देश की जनता बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रही है और सेना अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए ऐसे दिखावटी दावे करती रहती है।
ब्रह्मोस मिसाइल: दुनिया की सबसे तेज और अजेय क्रूज़ मिसाइल का बेजोड़ रुतबा
जब हम भारत की ब्रह्मोस (BrahMos) मिसाइल की बात करते हैं, तो यह केवल एक हथियार नहीं बल्कि आधुनिक सैन्य इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट और अचूक करिश्मा है। भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस के एनपीओ माशिनोस्ट्रोयेनिया के संयुक्त उपक्रम से विकसित ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में गिनी जाती है। यह मिसाइल हवा में आवाज की गति से भी कई गुना अधिक रफ्तार (मैक 2.8 से लेकर अब नए संस्करणों में और अधिक) से उड़ान भरती है, जिससे दुनिया के किसी भी आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे हवा में ही रोक पाना या इंटरसेप्ट करना लगभग असंभव हो जाता है। इसकी पिॉइंट-एक्यूरेसी यानी सटीक निशाना लगाने की क्षमता इतनी जबरदस्त है कि यह बिना चूके दुश्मन के बंकरों, कमांड सेंटर्स और रणनीतिक ठिकानों को पूरी तरह मटियामेट कर सकती है। यही वजह है कि आज दुनिया के कई अन्य देश भी भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने के लिए कतार में खड़े हैं, जो भारत की ग्लोबल डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
टेक्नोलॉजी, रेंज और एक्यूरेसी के मामले में पाकिस्तान और भारत का कोई मुकाबला क्यों नहीं है?
रक्षा तकनीक के जानकारों का यह स्पष्ट मानना है कि भारत और पाकिस्तान की सैन्य क्षमताओं के बीच तुलना करना ही अपने आप में तकनीकी रूप से बेमानी है। भारत ने पिछले एक दशक में 'मेक इन इंडिया' और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत अंतरिक्ष विज्ञान से लेकर डिफेंस सेक्टर में जो ऐतिहासिक छलांग लगाई है, वह दुनिया के चुनिंदा महाशक्तियों के बराबर है। हमारे पास अग्नि, शौर्य, आकाश और ब्रह्मोस जैसी स्वदेशी मिसाइलों का ऐसा घातक जखीरा है जो जमीन, हवा और समुद्र तीनों मोर्चों से दुश्मन पर एक साथ कहर बरपा सकता है। इसके विपरीत, पाकिस्तान आज भी अपनी सैन्य जरूरतों के लिए दूसरे देशों की भीख या कर्ज पर निर्भर रहता है। 'फतह-3' जैसी प्रणालियों की रेंज, पेलोड क्षमता, गाइडेंस सिस्टम और रडार से बचने की तकनीक (Stealth Technology) ब्रह्मोस के आसपास भी नहीं ठहरती है। जब भारत की मिसाइलें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अत्याधुनिक सैटेलाइट नेविगेशन से लैस होकर चलती हैं, तो पाकिस्तानी प्रणालियाँ तकनीक के मामले में कई दशक पीछे नजर आती हैं।
आत्मनिर्भर भारत और डिफेंस एक्सपोर्ट में भारत की बढ़ती धमक
एक समय था जब भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए पूरी तरह से विदेशी हथियारों और आयातों पर निर्भर हुआ करता था, लेकिन आज का भारत दुनिया का एक बहुत बड़ा डिफेंस निर्यातक (Exporter) बनता जा रहा है। ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों के सफल परीक्षण और फिलीपींस जैसे मित्र देशों के साथ हुए बड़े रक्षा समझौतों ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय रक्षा तकनीक अब ग्लोबल मार्केट में अपनी धाक जमा चुकी है। देश के वैज्ञानिक और इंजीनियर लगातार हाइपरसोनिक तकनीक पर काम कर रहे हैं, जो आने वाले समय में भारत की सामरिक ताकत को और अधिक अजेय बना देगी। ऐसे में पाकिस्तान द्वारा किसी भी प्रकार के प्रोपोगंडा या 'फतह' जैसे हथियारों के झूठे ढिंढोरे पीटने से जमीनी हकीकत नहीं बदलने वाली है। भारत की सैन्य ताकत और रक्षा अनुसंधान आज जिस मुकाम पर हैं, वहां तक पहुंचना पाकिस्तान के लिए केवल एक अधूरा सपना बनकर रह गया है।