21 साल की सरपंच प्रेरणा नरुका का गांव बदलने का सपना, बेटियों के लिए लाइब्रेरी तो महिलाओं को रोजगार
ग्रामीण भारत की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है, और इस बड़े बदलाव की बागडोर अब युवाओं के हाथों में आती दिख रही है। इसकी सबसे ज्वलंत और प्रेरणादायक मिसाल पेश की है महज 21 साल की युवा सरपंच प्रेरणा नरुका ने। इतनी छोटी सी उम्र में जहां ज्यादातर युवा अपने करियर और व्यक्तिगत सपनों को आकार देने में लगे रहते हैं, वहीं प्रेरणा नरुका ने अपने पूरे गांव की तकदीर और तस्वीर को बदलने का बीड़ा उठाया है। रूढ़िवादी सोच और पुरानी परंपराओं को दरकिनार करते हुए उन्होंने गांव की सरपंच पद की जिम्मेदारी संभाली और पद संभालते ही धरातल पर काम करना शुरू कर दिया। उनके इस साहसिक और क्रांतिकारी कदम की चर्चा अब केवल आसपास के गांवों में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में एक रोल मॉडल के रूप में हो रही है। उनका सपना केवल बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना नहीं है, बल्कि अपने गांव को एक डिजिटल और आत्मनिर्भर आदर्श गांव के रूप में स्थापित करना है।
सरपंच प्रेरणा नरुका का मानना है कि किसी भी समाज या गांव का असली विकास तब तक संभव नहीं है जब तक कि वहां की महिलाओं और बेटियों को बराबरी के अवसर न मिलें। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने विकास एजेंडे में शिक्षा और महिला सशक्तिकरण को सबसे शीर्ष पर रखा है। वे गांव की बेटियों के लिए उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के वास्ते एक अत्याधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित कर रही हैं। इसके साथ ही, गांव की गृहिणियों और महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए स्वरोजगार और कौशल विकास केंद्र स्थापित करने पर तेजी से काम चल रहा है। एक युवा रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो प्रेरणा नरुका की यह पहल केवल एक प्रशासनिक काम नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवेश में सामाजिक क्रांति का एक मजबूत शंखनाद है।
बेटियों के सपनों को लगेंगे पंख: गांव में बन रही है सर्वसुविधायुक्त डिजिटल लाइब्रेरी
ग्रामीण इलाकों में अक्सर देखा जाता है कि प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं होती, लेकिन सही संसाधनों और मार्गदर्शन के अभाव में गांव की बेटियां आगे नहीं बढ़ पातीं। शहरों में जाकर पढ़ाई करना या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग जॉइन करना हर गरीब परिवार के बस की बात नहीं होती। इसी जमीनी हकीकत को प्रेरणा नरुका ने अपनी आंखों से देखा और समझा। उन्होंने सरपंच बनते ही निर्णय लिया कि गांव की बेटियों को पढ़ाई के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। वे गांव में ही एक सर्वसुविधायुक्त और वातानुकूलित लाइब्रेरी का निर्माण करवा रही हैं जिसमें हाई-स्पीड इंटरनेट, कंप्यूटर, डिजिटल स्टडी मटेरियल और देश भर की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जरूरी पुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इस लाइब्रेरी की सबसे खास बात यह है कि यहां केवल पुस्तकें ही नहीं होंगी, बल्कि बेटियों को ऑनलाइन गाइडेंस और करियर काउंसलिंग की सुविधा भी मिलेगी। प्रेरणा खुद युवाओं से मिलकर उन्हें विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे यूपीएससी, एसएससी, बैंकिंग और राज्य लोक सेवा आयोगों की तैयारी के लिए प्रेरित करती हैं। उनका उद्देश्य है कि उनके गांव से निकलकर बेटियां प्रशासनिक सेवाओं, सेना, पुलिस और कॉरपोरेट सेक्टर में बड़े-बड़े पदों पर पहुंचे। इस पहल से गांव के अभिभावकों में भी भारी उत्साह है और वे अब अपनी बेटियों को आगे पढ़ाने के लिए खुशी-खुशी राजी हो रहे हैं, जिससे गांव का ड्रॉपआउट रेट शून्य होने की राह पर है।
महिलाओं को मिलेगा रोजगार: कुटीर उद्योग और स्व-सहायता समूहों से बनेंगी आत्मनिर्भर
केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि गांव की उन महिलाओं के लिए भी प्रेरणा नरुका ने एक बेहद दूरदर्शी योजना बनाई है जो घर के काम-काज तक सीमित थीं। उनका मानना है कि जब गांव की महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी, तो पूरे परिवार का जीवन स्तर स्वतः ही सुधर जाएगा। इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए उन्होंने गांव में स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) का गठन करवाया है और महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई, हस्तशिल्प, ऑर्गेनिक खेती, खाद्य प्रसंस्करण और डेयरी उत्पादों के निर्माण का मुफ्त प्रशिक्षण देने की शुरुआत की है।
इन महिला समूहों द्वारा तैयार किए गए सामानों को शहर के बाजारों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के जरिए बेचने की व्यवस्था भी की जा रही है, ताकि महिलाओं को उनके हुनर का सही और पूरा मूल्य मिल सके। प्रेरणा खुद प्रशासनिक अधिकारियों और वित्तीय संस्थाओं के संपर्क में रहकर इन समूहों को आसान किस्तों पर लोन और सरकारी योजनाओं का लाभ दिला रही हैं। आज गांव की कई महिलाएं अपने घर के काम के साथ-साथ महीने में अच्छी-खासी कमाई कर रही हैं। इससे न केवल उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास जागा है, बल्कि घर के फैसलों में भी उनकी भागीदारी और सम्मान कई गुना बढ़ गया है।
पारदर्शी प्रशासन और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से बनेगी गांव की नई पहचान
एक युवा और शिक्षित सरपंच होने के नाते प्रेरणा नरुका ने गांव के प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा लिया है। अब गांव के विकास कार्यों का लेखा-जोखा, ग्राम सभा की बैठकें और सरकारी योजनाओं की जानकारी सीधे पंचायत भवन के डिजिटल बोर्ड और व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से ग्रामीणों तक पहुंचाई जाती है। इससे भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह से खत्म हो गई है। गांव में हर नागरिक अपनी बात सीधे अपनी सरपंच से बिना किसी झिझक के कह सकता है।
गांव के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए पक्की सड़कों का निर्माण, हर घर में साफ पेयजल की व्यवस्था, सौर ऊर्जा से चलने वाली स्ट्रीट लाइट्स और जल संरक्षण के लिए चेक डैम का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है। गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सुदृढ़ किया जा रहा है ताकि ग्रामीणों को इलाज के लिए बार-बार शहर के चक्कर न काटने पड़ें। कचरा प्रबंधन के लिए डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की व्यवस्था की गई है, जिससे गांव स्वच्छ और हरित नजर आने लगा है। प्रेरणा का यह मॉडल दिखाता है कि अगर इरादे बुलंद हों और नीयत साफ हो, तो सीमित संसाधनों के बावजूद किसी भी गांव की कायापलट की जा सकती है।
देश भर के युवाओं और पंचायती राज व्यवस्था के लिए बनीं मिसाल
21 वर्ष की उम्र में प्रेरणा नरुका की यह असाधारण उपलब्धि केवल उनके अपने गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की पंचायती राज व्यवस्था के लिए एक मिसाल बन चुकी है। वे उन तमाम शिक्षित युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं जो राजनीति या समाज सेवा से दूरी बनाए रखते हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर देश के पढ़े-लिखे और तकनीक-प्रेमी युवा पंचायतों की कमान संभालें, तो भारत के ग्रामीण क्षेत्रों का कायाकल्प बहुत कम समय में संभव हो सकता है।
प्रेरणा का सपना है कि उनका गांव पूरे देश में एक "स्मार्ट मॉडल विलेज" के रूप में जाना जाए, जहां हर बेटी शिक्षित हो, हर महिला आत्मनिर्भर हो और हर नागरिक को सम्मानजनक जीवन मिले। उनके इस जज्बे और समर्पण की सराहना अब उच्च स्तर के अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों द्वारा भी की जा रही है। प्रेरणा नरुका की यह संघर्ष और सफलता की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब युवा सोच और आधुनिक दृष्टिकोण ग्रामीण धरातल पर उतरता है, तो विकास की एक ऐसी इबारत लिखी जाती है जो आने वाली कई पीढ़ियों का भविष्य संवार देती है।