राजस्थान निकाय चुनाव 2026: पहले चरण में भारी-भरकम 76.41% वोटिंग दर्ज
राजस्थान के राजनीतिक गलियारों और शहरी इलाकों में इन दिनों स्थानीय निकाय चुनावों (Rajasthan Nikay Chunav 2026) की गूंज पूरी तरह से छाई हुई है, जहाँ पहले चरण का मतदान संपन्न होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने फाइनल आंकड़े जारी कर दिए हैं. इस पहले चरण के दौरान प्रदेश के 39 जिलों के कुल 162 शहरी स्थानीय निकायों में वोट डाले गए, जिसमें चार नगर निगम, 27 नगर परिषद और 131 नगरपालिकाएं शामिल रहीं. सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं और कुल मिलाकर 76.41 प्रतिशत भारी मतदान दर्ज किया गया. इस चुनाव में मैदान में उतरे 20 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों की किस्मत अब इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम में पूरी तरह से कैद हो चुकी है, और हर किसी की निगाहें अब परिणामों पर टिकी हुई हैं.
#प्रतापगढ़ के अरनोद में टूटा रिकॉर्ड, बना प्रदेश का सबसे अव्वल मतदान केंद्र
पहले चरण के मतदान के जो आंकड़े सामने आए हैं उनमें सबसे दिलचस्प बात यह रही कि ग्रामीण और आदिवासी अंचल के मतदाताओं ने शहरी इलाकों के मुकाबले कहीं ज्यादा उत्साह दिखाया है. प्रतापगढ़ जिले की ऐतिहासिक अरनोद नगर पालिका में रिकॉर्ड 91.98 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसके साथ ही अरनोद पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर चमक रहा है. इसके अलावा धौलपुर के सैपू में 90.87 प्रतिशत और भरतपुर की पहाड़ी नगर पालिका में 90.36 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई, जहाँ मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल किया. इन आंकड़ों से यह साफ जाहिर होता है कि छोटे कस्बों और नवगठित नगर निकायों के स्थानीय लोग अपने क्षेत्र के विकास को लेकर कितने अधिक जागरूक और सक्रिय हैं.
#भीलवाड़ा में सुस्त रहा मतदाताओं का रुख, जानिए सबसे कम वोटिंग वाले जिलों का हाल
एक तरफ जहाँ कई जिलों में मतदान का ग्राफ नब्बे प्रतिशत के आंकड़े को पार कर गया, वहीं दूसरी तरफ कुछ बड़े शहरों और निगम क्षेत्रों में लोगों का रुझान थोड़ा सुस्त नजर आया. राज्य निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे कम मतदान भीलवाड़ा नगर निगम क्षेत्र में दर्ज किया गया, जहाँ महज 63.84 प्रतिशत मतदाताओं ने ही अपने मत का प्रयोग किया. इसके अलावा अलवर नगर निगम में 65.75 प्रतिशत, बांसवाड़ा नगर परिषद में 67.14 प्रतिशत और बीकानेर नगर निगम में 68.97 प्रतिशत वोटिंग रिकॉर्ड की गई. बड़े शहरों में इस प्रकार का कम मतदान हमेशा से राजनीतिक दलों और विश्लेषकों के लिए मंथन का विषय रहा है, क्योंकि तमाम प्रशासनिक और सामाजिक जागरूकता अभियानों के बावजूद शहरी कोटे के मतदाता कई बार मतदान के दिन घरों से बाहर निकलने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाते हैं.
#विवाद, ईवीएम की तकनीकी खराबी और छिटपुट घटनाओं के बीच शांतिपूर्ण रहा मतदान
राजस्थान के इस पहले चरण के चुनाव में ज्यादातर जगहों पर मतदान पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कुछ जिलों से छिटपुट झड़पों, फर्जी वोटिंग की शिकायतों और ईवीएम में तकनीकी खराबी की खबरें भी सामने आईं. जयपुर, बारां, भीलवाड़ा, जालोर और भरतपुर के कुछ चुनिंदा वार्डों में फर्जी मतदान को लेकर हल्की नोकझोंक और विवाद की स्थिति बनी, जिसे मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अमले ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए संभाल लिया. इसके अलावा सवाई माधोपुर, जोधपुर और बीकानेर के कुछ मतदान केंद्रों पर ईवीएम मशीनों में तकनीकी खामी आने के कारण कुछ समय के लिए वोटिंग प्रक्रिया बाधित हुई, जिसे बाद में तकनीकी टीम ने दुरुस्त कर सुचारू रूप से चालू करवाया. इन छोटी-मोटी बाधाओं को छोड़ दिया जाए तो कुल मिलाकर यह पहला चरण सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था के लिहाज से काफी हद तक नियंत्रण में रहा.
#अब दूसरे चरण के रण की तैयारी और 14 सितंबर को तय होगी दिग्गजों की किस्मत
पहले चरण का मतदान का यह पड़ाव पार होने के बाद अब राजनीतिक दलों का पूरा फोकस आगामी चरणों और बचे हुए निकायों के चुनाव प्रचार पर टिक गया है, क्योंकि सत्ताधारी दल और विपक्ष दोनों ही इस स्थानीय चुनाव को आगामी राजनीतिक दिशा का सेमीफाइनल मानकर चल रहे हैं. राज्य के कई दिग्गज नेता और मंत्री इस चुनाव में अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगाए बैठे हैं, और यही वजह है कि चुनावी सभाओं और बयानों का दौर लगातार तेज बना हुआ है. अब देखना यह होगा कि 11 सितंबर को होने वाले अगले चरण के मतदान में जनता कितना उत्साह दिखाती है और आगामी 14 सितंबर को जब मतगणना होगी, तब किस पार्टी के पाले में जीत का सेहरा बंधता है.