करवा चौथ के लिए 2 दिन पहले पति ने करवाई थी खरीदारी, व्रत रख पाती उससे पहले ही आरती की हो गई मौत

करवा चौथ के लिए 2 दिन पहले पति ने करवाई थी खरीदारी, व्रत रख पाती उससे पहले ही आरती की हो गई मौत

करवा चौथ का त्योहार किसी भी सुहागिन स्त्री के जीवन में खुशियों, उमंग और अपने पति की लंबी उम्र की प्रार्थना का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। हर पत्नी अपने पति के लंबे और सुखद जीवन की कामना के लिए महीनों पहले से तैयारियां शुरू कर देती है। लेकिन जब यही खुशियां चंद पलों में मातम और चीख-पुकार में बदल जाएं, तो नियति का यह क्रूर रूप पूरे समाज को झकझोर कर रख देता है। एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला और मर्मस्पर्शी मामला सामने आया है, जहां आरती नाम की एक नवविवाहिता अपने पहले करवा चौथ का व्रत रखने के लिए बेहद उत्साहित थी। महज दो दिन पहले ही उसके पति ने प्यार और चाव से उसके लिए करवा चौथ के व्रत की खरीदारी कराई थी—लाल जोड़ा, कंगन, बिंदी, चूड़ियां और पूजा का हर वो सामान खरीदा गया था जिसकी उम्मीद एक सुहागिन करती है। हालांकि, विधि का विधान देखिए कि आरती अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत का संकल्प ले पाती, उससे पहले ही एक दर्दनाक हादसे ने उसकी जिंदगी की डोर हमेशा-हमेशा के लिए काट दी और आरती इस दुनिया को अलविदा कह गईं।

आरती की मौत से खुशियों वाले घर में छाया सन्नाटा और बिखरी पड़ी रह गईं करवा चौथ की सामग्रियां

जिस घर में दो दिन पहले तक करवा चौथ की तैयारियों को लेकर हंसी-थिठोली और उल्लास का माहौल था, वहां अब केवल आरती के परिजनों की चीखें और सिसकियां सुनाई दे रही हैं। परिजनों ने बताया कि आरती अपने करवा चौथ को लेकर काफी उत्सुक थी और उसने अपने हाथों में खूबसूरत मेहंदी रचाने की भी तैयारी कर रखी थी। पति ने भी अपनी जीवनसंगिनी की हर छोटी-बड़ी ख्वाहिश को पूरा करते हुए बाजार से उसके लिए सबसे सुंदर साड़ी और सुहाग की सामग्रियां खरीदकर दी थीं। लेकिन हादसे की अचानक आई काली खबर ने आरती के सपनों को एक ही झटके में चकनाचूर कर दिया। जिस थाली में वह करवा चौथ की रात चांद को अर्घ्य देने वाली थी, आज वही सुहाग का सामान आरती के बेजान शरीर के पास बिखरा पड़ा है। इस खौफनाक मोड़ ने केवल उस परिवार को ही नहीं, बल्कि जिसने भी इस वाकये के बारे में सुना, उसकी आंखें नम कर दीं।

हादसे की पूरी कहानी और पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई की जमीनी हकीकत

स्थानीय सूत्रों और पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, आरती अपने किसी पारिवारिक या निजी काम से घर से बाहर निकली थी, तभी रास्ते में तेज रफ्तार और अनियंत्रित वाहन ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि आरती को संभलने तक का मौका नहीं मिला और वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ी। राहगीरों की मदद से उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल शुरू की और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना कारित करने वाले अज्ञात वाहन और उसके चालक की तलाश के लिए आसपास के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं और दोषी के खिलाफ कड़ी से कड़ा कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बिलखते पति और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, गांव और मोहल्ले में पसरा शोक

अस्पताल के बाहर और घर पर मौजूद आरती के पति का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार अपनी पत्नी के उन सुहाग के सामानों को देखकर बिलख रहा है जो उसने दो दिन पहले ही अपनी हाथों से आरती को उपहार स्वरूप दिए थे। पति का कहना है कि उसे यकीन ही नहीं हो रहा है कि जो पत्नी कल तक उसके साथ करवा चौथ की योजनाएं बना रही थी, वह आज उसे हमेशा के लिए अकेला छोड़कर चली गई है। गांव और मोहल्ले के लोग भी इस घटना से गहरे सदमे में हैं। पड़ोसियों का कहना है कि आरती बेहद हंसमुख और मिलनसार स्वभाव की महिला थी। पूरे इलाके में चूल्हे नहीं जले हैं और हर कोई इस अनहोनी पर दुख व्यक्त कर रहा है। करवा चौथ से ठीक पहले हुए इस हादसे ने त्योहार की पूरी चमक को मातम के काले बादलों में ढंक दिया है।

आधुनिक दौर में सड़क सुरक्षा और अनियंत्रित हादसों पर उठते गंभीर सवाल

यह दर्दनाक हादसा केवल एक परिवार की तबाही की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमारी सड़कों पर दौड़ते काल और यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते अनियंत्रित वाहनों पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। हर साल त्योहारों के मौसम में तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण न जाने कितनी ही बेकसूर जिंदगियां चिराग की तरह बुझ जाती हैं। आरती की असमय मृत्यु यह सोचने पर मजबूर करती है कि जब तक सड़कों पर सख्त पुलिस चेकिंग और स्पीड लिमिट का सख्ती से पालन नहीं कराया जाएगा, तब तक ऐसे मासूम परिवार उजड़ते रहेंगे। यह समय है कि हम सड़क सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क हों ताकि किसी और आरती के सुहाग का सामान यूं बेजान न बिखरे।

नियति का निष्ठुर खेल और सुहागिन के अमर प्रेम की दास्तान जो हमेशा याद रखी जाएगी

आरती का इस दुनिया से अचानक चले जाना यह साबित करता है कि इंसान भले ही अपनी ओर से हजार योजनाएं बना ले, लेकिन कुदरत के फैसले के आगे किसी का बस नहीं चलता। जो आरती अपने पति की लंबी उम्र मांगने के लिए एक-एक पल का इंतजार कर रही थी, उसने बिना व्रत रखे ही अपने पति के प्रति अपने अटूट प्रेम की दास्तान पीछे छोड़ दी। करवा चौथ का यह दिन अब उस परिवार के लिए कभी न भूलने वाला एक काला दिन बन चुका है, लेकिन आरती का वो मुस्कराता चेहरा और उसकी अधूरी रह गई करवा चौथ की खरीदारी हमेशा-हमेशा के लिए उनके दिलों में एक गहरी कसक बनकर अमर रहेगी।