राजस्थान में करवा चौथ पर कब दिखेगा चांद? जयपुर, जोधपुर, उदयपुर समेत जानें अपने शहर का समय
पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ रखा जाने वाला सुहागिनों का सबसे बड़ा पर्व करवा चौथ इस साल पूरे देश के साथ-साथ मरुधरा राजस्थान में भी बेहद भव्य और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही निर्जला उपवास रखकर सोलह सिंगार करने वाली सुहागिन महिलाओं को अब केवल एक ही इंतजार है और वह है आसमान में सजी चांदनी रात में चांद के दीदार का। राजस्थान जैसे विशाल भौगोलिक क्षेत्रफल वाले राज्य में हर जिले की दूरी और स्थिति के अनुसार चंद्रोदय के समय में थोड़ा बहुत अंतर होना स्वाभाविक है। राजधानी जयपुर से लेकर ऐतिहासिक शहर जोधपुर, झीलों की नगरी उदयपुर, अजमेर, कोटा, बीकानेर और जैसलमेर तक हर जगह महिलाओं के मन में यही उत्सुकता बनी हुई है कि उनके शहर में चांद किस वक्त अपनी छटा बिखेरेगा। मौसम विभाग के साफ आसमान और सुहावने माहौल के बीच आइए जानते हैं कि राजस्थान के आपके अपने शहर में चांद निकलने का सटीक और पक्का समय क्या रहने वाला है।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय और मौसम का हाल
पिंकसिटी जयपुर में करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए इस बार मौसम पूरी तरह से मेहरबान नजर आ रहा है। गुलाबी ठंडक के बीच सुहागिनें अपने सुहाग की लंबी उम्र की दुआएं मांग रही हैं। जयपुर के ज्योतिषीय पंचांग और मौसम की गणना के अनुसार, राजधानी जयपुर में करवा चौथ के दिन चांद रात को लगभग 8 बजकर 15 मिनट से 8 बजकर 22 मिनट के बीच आसमान में अपनी पहली झलक दिखा देगा। हालांकि, कई बार बादलों या क्षितिज की स्थिति के कारण दो-तीन मिनट का अंतर आ सकता है, लेकिन इस बार आसमान के साफ रहने के कारण जयपुर की महिलाओं को चांद के दीदार के लिए ज्यादा लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। चांद निकलने के साथ ही महिलाएं छलनी से पति का चेहरा देखकर अपना यह कठिन निर्जला व्रत खोलेंगी और पूजा-अर्चना संपन्न करेंगी।
जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर समेत पश्चिमी राजस्थान में कब निकलेगा चांद
मारवाड़ और थार मरुस्थल के जिलों जैसे जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर में भौगोलिक स्थिति के कारण पूर्वी राजस्थान की तुलना में चांद थोड़ा सा देर से निकलता है। सूर्य ढलने के बाद रेगिस्तानी हवाओं के बीच इन इलाकों में करवा चौथ का उत्साह देखते ही बनता है। जोधपुर में चांद निकलने का संभावित समय रात 8 बजकर 28 मिनट से 8 बजकर 35 मिनट के आसपास का रहेगा। वहीं, स्वर्ण नगरी जैसलमेर और भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित इलाकों में चांद का दीदार रात 8 बजकर 38 मिनट से 8 बजकर 45 मिनट के बीच होने की पूरी संभावना है। पश्चिमी राजस्थान की इन खूबसूरत हवेलियों और छतों पर सजी सुहागिनों की महफिलें इस रात चांद के दीदार के बाद अपने व्रत का पारण करेंगी और पारंपरिक लोकगीतों के साथ इस पर्व का आनंद उठाएंगी।
उदयपुर, कोटा, अजमेर और मेवाड़-वागड़ आंचल में चंद्रोदय का सटीक समय
झीलों की नगरी उदयपुर और आसपास के मेवाड़-वागड़ आंचल (चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा) में करवा चौथ का यह पावन पर्व बेहद धूमधाम से मनाया जा रहा है। उदयपुर में चांद रात को लगभग 8 बजकर 20 मिनट से 8 बजकर 27 मिनट के बीच प्रकट होगा। इसके साथ ही शिक्षा नगरी कोटा और हाड़ौती क्षेत्र में चंद्रोदय का समय रात 8 बजकर 17 मिनट के आसपास का बताया गया है। अजमेर और पुष्कर की पवित्र धरती पर महिलाएं अरावली की पहाड़ियों के बीच चांद का इंतजार करेंगी, जहां चांद निकलने का समय लगभग 8 बजकर 18 मिनट तय किया गया है। सीकर, झुंझुनूं और शेखावाटी बेल्ट में भी रात 8 बजकर 15 मिनट से 8 बजकर 20 मिनट के बीच चांद के दर्शन होने की पूरी उम्मीद है।
व्रत खोलने की सही विधि, चलनी की रस्म और करवा चौथ पूजा का महत्व
चांद निकलने से ठीक पहले सुहागिनों को माता करवा, भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय की षोडशोपचार विधि से पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान करवा चौथ की कथा सुनना या पढ़ना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। जब आसमान में चांद दिखाई दे जाए, तब सबसे पहले छलनी में दीपक रखकर चांद को देखा जाता है और उसके बाद उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखकर उन्हें तिलक लगाया जाता है। पति अपने हाथों से अपनी पत्नी को जल पिलाकर और मिठाई खिलाकर उनका उपवास तुड़वाते हैं। इस पवित्र रस्म को निभाने के बाद परिवार में आपसी प्रेम और विश्वास की डोर और अधिक मजबूत हो जाती है।
राजस्थान में सुहागिनों का उत्साह और इस खास पर्व की सामाजिक रौनक
पूरे राजस्थान में करवा चौथ के इस पर्व पर बाजारों से लेकर घरों तक भारी रौनक देखने को मिल रही है। मेहंदी लगवाने, श्रृंगार का सामान खरीदने और पारंपरिक राजस्थानी परिधानों में सजी महिलाओं का उत्साह देखते ही बनता है। आधुनिकता के इस दौर में भी राजस्थान की संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव का यह अनूठा रूप पूरी दुनिया को आकर्षित करता है। चांद के दीदार के साथ ही मरुधरा के हर घर में खुशियों की चमक बिखर जाती है, और सभी सुहागिनें अपने सुहाग की लंबी उम्र की प्रार्थना के साथ इस खूबसूरत त्योहार को हंसते-खेलते संपन्न करती हैं।