धनतेरस की खरीदारी में शामिल करें ये 6 शुभ वस्तुएं, बरकत और सकारात्मकता से भर जाएगा घर
भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में दीपावली के महापर्व का आरंभ जिस सबसे पहले और महत्वपूर्ण पर्व के साथ होता है, वह है 'धनतेरस'। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाए जाने वाले इस पावन पर्व पर खरीदारी करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस दिन को आरोग्यता के देवता भगवान धन्वंतररी, धन के राजा कुबेर और मां लक्ष्मी के पूजन का विशेष दिवस माना गया है। ऐसी मान्यता है कि धनतेरस के दिन यदि विधि-विधान से खरीदारी की जाए और घर में नई वस्तुओं का प्रवेश कराया जाए, तो माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की असीम कृपा पूरे वर्ष परिवार पर बनी रहती है। बाजार में इन दिनों रौनक अपने चरम पर है और हर कोई अपनी क्षमता के अनुसार कुछ नया खरीदने की तैयारी कर रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों और वास्तु के अनुसार इस दिन कौन सी ऐसी 6 विशेष वस्तुएं हैं जिन्हें घर लाना सबसे अधिक शुभ और फलदायी माना जाता है? आइए जानते हैं उन छह चमत्कारिक चीजों के बारे में जो आपके जीवन से दरिद्रता को दूर कर घर को बरकत और सकारात्मकता से भर देंगी।
1. पीतल या तांबे के बर्तन: आरोग्यता और स्थिरता का प्रतीक
धनतेरस के दिन बर्तन खरीदने की परंपरा बहुत पुरानी है और इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक व धार्मिक महत्व है। जब समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतररी प्रकट हुए थे, तब उनके हाथों में अमृत का कलश था। यही कारण है कि इस दिन धातु के बर्तन खरीदना अमृत प्राप्ति और अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन स्टील या लोहे के बर्तन खरीदने से बचना चाहिए क्योंकि लोहा शनि ग्रह का प्रतीक माना जाता है। इसके बजाय आपको पीतल या तांबे के बर्तन खरीदने चाहिए। पीतल भगवान धन्वंतररी की प्रिय धातु है। आप चाहें तो पीतल का कोई कलश, गिलास या पूजा का लोटा खरीदकर घर ला सकते हैं। घर में पीतल का बर्तन आने से परिवार के सदस्यों की सेहत अच्छी रहती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
2. सोना और चांदी के आभूषण या सिक्के: मां लक्ष्मी को प्रिय स्थिर धन
धनतेरस पर सोना या चांदी खरीदना सबसे उत्तम और श्रेष्ठ माना जाता है। कीमती धातुएं होने के साथ-साथ ज्योतिष शास्त्र में इन्हें अत्यंत पवित्र और मां लक्ष्मी को आकर्षित करने वाला माना गया है। यदि आप बड़े आभूषण या सोने के सिक्के नहीं खरीद सकते हैं, तो इसमें निराश होने की कोई आवश्यकता नहीं है। आप चांदी का एक छोटा सा सिक्का, गणेश-लक्ष्मी की आकृति वाला लॉकेट या चांदी का कोई छोटा आभूषण भी खरीद सकते हैं। चांदी चंद्रमा का प्रतिनिधित्व करती है जो मन को शांति और शीतलता प्रदान करती है। धनतेरस के दिन खरीदी गई चांदी या सोने को लाकर तिजोरी में रखना चाहिए और दीपावली की रात उसकी पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से मां लक्ष्मी आपके घर से कभी प्रस्थान नहीं करती हैं और धन के भंडार हमेशा भरे रहते हैं।
3. झाड़ू: दरिद्रता का नाश और मां लक्ष्मी का आगमन
धनतेरस पर खरीदी जाने वाली सबसे सरल और अचूक वस्तु है 'झाड़ू'। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार झाड़ू को मां लक्ष्मी का ही एक रूप माना गया है। जिस प्रकार झाड़ू हमारे घर के कचरे और गंदगी को बाहर कर उसे स्वच्छ बनाती है, उसी प्रकार यह हमारे जीवन से गरीबी, नकारात्मकता और दुखों को भी बाहर कर देती है। धनतेरस के दिन एक नई झाड़ू जरूर खरीदनी चाहिए। ध्यान रहे कि झाड़ू हमेशा बेजोड़ तिनकों की होनी चाहिए और प्लास्टिक वाली झाड़ू खरीदने से बचना चाहिए। झाड़ू को घर लाने के बाद उस पर एक सफेद रंग का सूती धागा बांध देना चाहिए ताकि उसकी पवित्रता बनी रहे। दीपावली के दिन इस नई झाड़ू की पूजा करने के बाद ही इसका उपयोग शुरू किया जाता है, जिससे घर की आर्थिक तंगी हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है।
4. धनिया के बीज (साबुत धनिया): अखंड समृद्धि और अन्नपूर्णा की कृपा
धनतेरस के दिन साबुत सूखा धनिया खरीदना बहुत ही शुभ और चमत्कारिक परिणाम देने वाला माना जाता है। उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में इस दिन मां लक्ष्मी और धन्वंतररी को साबुत धनिया अर्पित करने की परंपरा है। आप बाजार से सूखा साबुत धनिया खरीदकर घर लाएं और इसे दीपावली की पूजा के दौरान मां लक्ष्मी को अर्पित करें। पूजा संपन्न होने के बाद इसमें से कुछ धनिए के बीजों को अपने घर की तिजोरी या पैसे रखने के स्थान पर रख लें और शेष बीजों को अपने घर के गमले या बगीचे में बो दें। ऐसी मान्यता है कि बोए गए धनिए से जितनी हरी-भरी फसल उगती है, आपके घर में धन-धान्य की बरकत उतनी ही तेजी से बढ़ती है। यह उपाय घर में मां अन्नपूर्णा और लक्ष्मी दोनों का आशीर्वाद बनाए रखता है।
5. गोमती चक्र और कौड़ियां: तंत्र और वास्तु के अनुसार विशेष अचूक उपाय
गोमती चक्र और पीली कौड़ियां मां लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय हैं। समुद्र से प्राप्त होने वाली ये वस्तुएं साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप मानी जाती हैं। धनतेरस के दिन 5 या 11 गोमती चक्र और पीली कौड़ियां जरूर खरीदनी चाहिए। दीपावली की रात इन सभी गोमती चक्रों और कौड़ियों को हल्दी और केसर से रंगकर लाल रंग के रेशमी कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी, लॉकर या दुकान के गल्ले में रख लेना चाहिए। वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि इस उपाय को करने से घर में किसी भी प्रकार की नजर, बाधा या नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती है और व्यापार में अप्रत्याशित लाभ होना शुरू हो जाता है। यह उपाय उन लोगों के लिए विशेष रूप से कारगर है जिन्हें लगातार धन हानि का सामना करना पड़ रहा हो।
6. खील-बताशे और मिट्टी के दीपक: प्रकाश और मिठास से भरा पारिवारिक जीवन
धनतेरस की खरीदारी में खील और बताशे तथा मिट्टी के दीयों का होना अनिवार्य माना गया है। धान (चावल) की खील मां लक्ष्मी को बहुत पसंद है, क्योंकि धान को नई फसल का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही मिट्टी के सुंदर और साफ दीपक खरीदना इस बात का प्रतीक है कि आप अपने जीवन से अंधकार को मिटाकर प्रकाश का स्वागत कर रहे हैं। इस दिन खरीदे गए मिट्टी के दीयों को दीपावली की शाम को तेल और घी के साथ प्रज्वलित कर पूरे घर में रखा जाता है। यह प्रकाश आपके घर के कोने-कोने से नकारात्मकता को भगा देता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। खील-बताशे का भोग लगाने से पारिवारिक जीवन में मिठास बनी रहती है और आपसी प्रेम प्रगाढ़ होता है।
निष्कर्ष: विश्वास और सकारात्मकता के साथ करें धनतेरस का स्वागत
धनतेरस का यह पावन पर्व केवल भौतिक वस्तुएं खरीदने का दिन नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर छिपी नकारात्मकता को त्यागकर नई ऊर्जा और सकारात्मकता को अपनाने का अवसर है। इन छह शुभ वस्तुओं में से यदि आप अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार कुछ खास चीजों को भी अपने घर ले आते हैं, तो यह आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि के नए द्वार खोल देगा। इस धनतेरस अपने घर में मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर का स्वागत पूरे विधि-विधान और सच्चे मन से करें, ताकि आपका पूरा साल खुशहाली और बरकत से महकता रहे।