निर्जला एकादशी 24 या 25 जून? जानें उदयातिथि के अनुसार व्रत की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पारण का समय

निर्जला एकादशी 24 या 25 जून? जानें उदयातिथि के अनुसार व्रत की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पारण का समय

काशी (धर्म-कर्म डेस्क): हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और कठिन मानी जाने वाली निर्जला एकादशी व्रत को लेकर इस बार श्रद्धालुओं के बीच तारीखों का भ्रम बना हुआ है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि दो दिनों तक व्याप्त रह रही है। ऐसे में लोग असमंजस में हैं कि निर्जला एकादशी का व्रत बुधवार, 24 जून को रखा जाएगा या फिर गुरुवार, 25 जून को।

शास्त्रों और सनातन परंपरा के अनुसार, किसी भी व्रत-त्योहार के संकल्प के लिए सूर्योदय के समय की तिथि यानी 'उदयातिथि' को ही सबसे प्रामाणिक और उत्तम माना जाता है। आइए जानते हैं ज्योतिषीय गणना के अनुसार निर्जला एकादशी व्रत की सही तारीख, इस दिन बनने वाले महासंयोग और व्रत खोलने का शुभ मुहूर्त।

जानें किस दिन व्रत रखना शास्त्र सम्मत?

ज्योतिष गणना के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जून 2026, बुधवार को दोपहर 02 बजकर 42 मिनट पर हो जाएगी। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन 25 जून 2026, गुरुवार को शाम 04 बजकर 39 मिनट पर होगा।

चूंकि 24 जून को सूर्योदय के समय दशमी तिथि होगी और एकादशी दोपहर के बाद लग रही है, वहीं 25 जून को सूर्योदय एकादशी तिथि के साक्षी भाव में हो रहा है। इसलिए उदयातिथि के सार्वभौमिक नियम के अनुसार, निर्जला एकादशी का मुख्य व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को ही रखना पूरी तरह से मान्य और शास्त्र सम्मत होगा।

इस बार बन रहा है त्रिपुष्कर और तीन शुभ योगों का महासंयोग

साल 2026 की निर्जला एकादशी धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत फलदायी मानी जा रही है। इस दिन आकाश मंडल में एक साथ तीन अत्यंत शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, जिसमें रवि योग, शिव योग और सिद्ध योग शामिल हैं। मान्यता है कि इन दिव्य योगों में जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु और धन की देवी माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा-अर्चना करने, मंत्रों का जाप करने और दान-पुण्य करने से साधक को जीवन में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

निर्जला एकादशी पर जरूर करें ये काम

  • मंत्र जाप: इस दिन भगवान विष्णु के सबसे प्रिय और प्रभावशाली मंत्र "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः" का तुलसी की माला से यथासंभव जाप करें।

  • स्तोत्र पाठ: आर्थिक संकटों और दुखों से मुक्ति पाने के लिए इस दिन 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ करना अत्यंत चमत्कारी और लाभकारी माना जाता है।

  • कथा श्रवण: मान्यता है कि निर्जला एकादशी के दिन व्रत की पौराणिक कथा को केवल सुनने मात्र से ही मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं और उसे अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।

जल और घट दान का है विशेष महत्व

ज्येष्ठ महीने की इस भीषण गर्मी में निर्जला एकादशी के दिन जल दान को ब्रह्मांड का सबसे बड़ा दान माना गया है। इस दिन मिट्टी के नए घड़े (मटके) में शीतल जल भरकर, उसमें तुलसी दल और चीनी या मिश्री डालकर जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को दान करना चाहिए। इसके साथ ही राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाना या मीठा शर्बत पिलाना अक्षय पुण्य की प्राप्ति कराता है।

निर्जला एकादशी व्रत पारण का सटीक समय

जो श्रद्धालु 25 जून (गुरुवार) को निर्जला एकादशी का कठोर व्रत रखेंगे, वे अगले दिन यानी 26 जून 2026, शुक्रवार को अपने व्रत का पारण (व्रत खोलना) करेंगे।

  • पारण का शुभ मुहूर्त: शुक्रवार सुबह 05 बजकर 49 मिनट से लेकर सुबह 09 बजकर 03 मिनट तक रहेगा। इसी समयावधि के बीच शुद्ध सात्विक भोजन या तुलसी दल ग्रहण करके व्रत खोलना सबसे उत्तम रहेगा।

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