कौन अपना है और कौन पराया? संकट के वक्त इन 5 बातों से तुरंत पहचानें
जिंदगी के रास्ते हमेशा एक जैसे नहीं रहते। अच्छे दिनों में तो हर कोई साथ होने का दावा करता है और महफिलें भी सजती हैं, लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब इंसान किसी मुसीबत या संकट के दौर से गुजरता है। कहते हैं कि बुरा वक्त जिंदगी का वह पैमाना है जो अपनों और परायों के बीच का फर्क बहुत साफ तरीके से दिखा देता है। जब इंसान टूट रहा होता है, तब समझ आता है कि कौन सच में साथ खड़ा है और कौन सिर्फ दिखावा कर रहा था।
अगर आप भी जीवन में ऐसे ही किसी दोराहे पर खड़े हैं और यह पहचान नहीं पा रहे हैं कि कौन अपना है और कौन पराया, तो संकट के वक्त नजर आने वाली ये 5 बातें आपकी आंखें खोलने के लिए काफी हैं। आइए जानते हैं उन खास संकेतों के बारे में:
1. मुसीबत के समय तुरंत साथ खड़े होना या कन्नी काट लेना
जब आप किसी बड़ी परेशानी में फंसते हैं, तो अपनों की पहली पहचान यही होती है कि वे बिना किसी बहाने के आपके साथ खड़े नजर आते हैं। इसके उलट, जो लोग सिर्फ मतलबी रिश्ते निभाते हैं, वे संकट की आहट सुनते ही तरह-तरह के बहाने बनाने लगते हैं और धीरे-धीरे आपसे दूरी बना लेते हैं। संकट के वक्त फोन पर व्यस्तता दिखाना या मदद से पीछे हटना ही परायेपन की सबसे बड़ी निशानी है।
2. पीठ पीछे बुराई करना या हौसला बढ़ाना
मुश्किल दौर में यह देखना बहुत जरूरी है कि आपके करीबी लोग दूसरों के सामने आपके बारे में क्या बोल रहे हैं। जो अपने होते हैं, वे आपकी कमजोरी का फायदा उठाने के बजाय आपका हौसला बढ़ाते हैं और आपको अंदर से मजबूत करते हैं। वहीं, जो लोग पराये या अवसरवादी होते हैं, वे ऐसे वक्त का फायदा उठाकर आपकी पीठ पीछे आपकी कमजोरियों का मजाक उड़ाते हैं या दूसरों के सामने आपकी छवि खराब करने की कोशिश करते हैं।
3. सलाह के नाम पर ज्ञान देना या सच्ची हमदर्दी जताना
संकट के समय जब आप किसी से अपना दुख साझा करते हैं, तो अपनों की आंखों में फिक्र साफ झलकती है और वे आपको संभालने की कोशिश करते हैं। इसके विपरीत, पराये या ईर्ष्या रखने वाले लोग अक्सर ज्ञान देने लगते हैं, ताने मारते हैं या फिर आपकी स्थिति का उपहास उड़ाते हैं। वे यह दिखाने की कोशिश करते हैं कि आपके साथ जो हुआ, आप उसी के काबिल थे।
4. आर्थिक या मानसिक मदद के लिए आगे आना
मुसीबत चाहे पैसों की हो या मानसिक तनाव की, असली अपना वह है जो अपनी क्षमता के अनुसार आपकी मदद करने के लिए आगे आता है। पराया व्यक्ति कभी भी अपनी तरफ से कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता। वह सिर्फ दूर बैठकर तमाशा देखता है या स्थिति का आकलन करता है कि इस संकट से उसका अपना क्या फायदा या नुकसान हो रहा है।
5. समय बीतने के बाद भी रिश्ता निभाना
कई लोग तब तक साथ रहते हैं जब तक उनका स्वार्थ पूरा होता रहता है। लेकिन असली अपना वही है जो संकट का यह बुरा वक्त गुजर जाने के बाद भी आपके साथ वैसे ही खड़ा रहता है, जैसे पहले था। मतलबी लोग मुसीबत टलते ही दोबारा अपनी पुरानी दुनिया में लौट जाते हैं और आपसे ऐसे मुंह मोड़ लेते हैं जैसे कभी जानते ही न हों।