विश्वकर्मा जयंती 2026: जानिए इस साल कब मनाई जाएगी भगवान विश्वकर्मा की जयंती, शुभ पूजा मुहूर्त

विश्वकर्मा जयंती 2026: जानिए इस साल कब मनाई जाएगी भगवान विश्वकर्मा की जयंती, शुभ पूजा मुहूर्त

भारतीय सनातन संस्कृति और परंपरा में शिल्प, वास्तुकला और इंजीनियरिंग के आदिदेव भगवान विश्वकर्मा की जयंती का पर्व हर साल बड़े ही उत्साह, श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया जाता है, जिसे लेकर देश भर के कारखानों, उद्योगों, दफ्तरों और निर्माण इकाइयों में विशेष तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। कल-पुर्जों, औजारों, मशीनों और भवनों के सृजनकर्ता भगवान विश्वकर्मा को समर्पित यह पावन पर्व इस वर्ष यानी 2026 में किस दिन मनाया जाएगा और इसके सटीक पूजन का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, इसे लेकर श्रद्धालुओं और कामगारों के मन में काफी उत्सुकता बनी हुई है। धार्मिक पंचांग और गणना के अनुसार, हर साल कन्या संक्रांति के पावन अवसर पर विश्वकर्मा पूजा का यह महापर्व मनाया जाता है, जो इस बार भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहने वाला है। इस दिन देश भर के श्रमिक, इंजीनियर, तकनीकी विशेषज्ञ और व्यापारी अपने काम आने वाले औजारों और उपकरणों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं ताकि आने वाले पूरे वर्ष में उन्हें रोजगार में तरक्की, सुख-समृद्धि और सुरक्षा की प्राप्ति हो सके।

#विश्वकर्मा जयंती 2026 की सही तिथि और पंचांग के अनुसार शुभ पूजा मुहूर्त

हर साल विश्वकर्मा पूजा अंग्रेजी कैलेंडर के सितंबर महीने के मध्य में पड़ती है, और इस बार भी पंचांग के जानकारों के अनुसार यह पावन पर्व सितंबर के तीसरे सप्ताह में बेहद शुभ योग के बीच मनाया जाएगा। पंचांग की गणना के मुताबिक, कन्या संक्रांति का क्षण और सूर्य के सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करने के साथ ही भगवान विश्वकर्मा की पूजा का मुख्य मुहूर्त निर्धारित होता है। इस वर्ष विश्वकर्मा जयंती के दिन सुबह से ही सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग जैसे बेहद मंगलकारी संयोग बन रहे हैं, जो पूजा-पाठ और अनुष्ठान के लिए अत्यंत उत्तम माने जाते हैं। सुबह ब्रह्म बेला से लेकर दोपहर तक का समय औजारों और मशीनों की पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है, जिसमें उद्यमी और कामगार बिना किसी राहुकाल की बाधा के अपने कार्यस्थलों पर अनुष्ठान संपन्न कर सकेंगे। ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि इस शुभ मुहूर्त में की गई पूजा से न केवल व्यापार में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, बल्कि धन-धान्य और यश में भी बेजोड़ वृद्धि होती है।

#भगवान विश्वकर्मा की पूजा की सरल और संपूर्ण विधि-विधान

शिल्पकारिता के देवता भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने की एक बेहद प्राचीन, वैज्ञानिक और व्यवस्थित परंपरा रही है, जिसमें शारीरिक श्रम और उपकरणों के प्रति सम्मान प्रकट किया जाता है। विश्वकर्मा जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण किए जाते हैं, और इसके बाद अपने कारखाने, ऑफिस, दुकान या घर में रखे सभी प्रकार के औजारों, कंप्यूटर, मशीनों और वाहनों की साफ-सफाई की जाती है। पूजा के लिए एक साफ चौकी पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाकर भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित की जाती है, और साथ ही जल से भरा कलश रखा जाता है। इसके बाद रोली, मौली, अक्षत, पीले फूल, धूप, दीप, और नैवेद्य अर्पित करके उनकी वंदना की जाती है और साथ ही अपने कार्यक्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले औजारों पर हल्दी, कुमकुम और कलावा बांधकर उनकी भी पूजा की जाती है। पूजा संपन्न होने के बाद सभी कर्मचारियों और उपस्थित लोगों में प्रसाद वितरित किया जाता है और भगवान से यह प्रार्थना की जाती है कि वे पूरे वर्ष उनके हाथों और बुद्धि को निरंतर सृजन और सेवा के मार्ग पर अग्रसर रखें।

#आधुनिक युग में विश्वकर्मा पूजा का महत्व और इसका सामाजिक तथा आर्थिक संदेश

भले ही आज की दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और अत्याधुनिक तकनीक की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हो, लेकिन अपनी संस्कृति और श्रम के प्रति सम्मान प्रकट करने का यह पर्व आज के दौर में और अधिक प्रासंगिक हो गया है। भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का पहला वास्तुकार और इंजीनियर माना जाता है, जिन्होंने प्राचीन काल से लेकर देवताओं के महलों, अस्त्र-शस्त्रों और नगरों का निर्माण अपने दिव्य ज्ञान से किया था, और आज के आधुनिक युग में हर वह व्यक्ति जो अपने हुनर और औजारों से कुछ नया रच रहा है, वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विश्वकर्मा का ही अनुयायी है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि हमें अपने काम के उपकरणों को केवल लोहे या प्लास्टिक की वस्तु न मानकर अपनी आजीविका का प्रत्यक्ष देवता मानना चाहिए, क्योंकि इन्हीं के बहमूल्य सहयोग से हमारा और हमारे परिवार का जीवन चलता है। इस पावन अवसर पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने श्रम की गरिमा को बनाए रखेंगे और पूरी ईमानदारी तथा निष्ठा के साथ देश के विकास और निर्माण कार्य में अपना योगदान देते रहेंगे।

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