भगवान राम के धनुष और श्रीकृष्ण की बांसुरी पर क्या कह गए धीरेंद्र शास्त्री, क्यों होने लगे ट्रोल?
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर और प्रसिद्ध कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अक्सर अपने बयानों के चलते सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन इस बार उनका एक ऐसा बयान सामने आया है जिसने धार्मिक और सोशल मीडिया गलियारों में भूचाल ला दिया है। भगवान श्री राम के धनुष-बाण और भगवान श्रीकृष्ण की बांसुरी की तुलना को लेकर उन्होंने जो टिप्पणी की, उसके बाद से इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है। एक तरफ जहां उनके समर्थक उनके पक्ष में खड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया यूजर्स और कुछ धार्मिक विश्लेषक उनके इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्हें जमकर ट्रोल कर रहे हैं। आइए जानते हैं कि आखिर धीरेंद्र शास्त्री ने ऐसा क्या कहा था जिसके कारण वह विवादों के घेरे में आ गए हैं।
धीरेंद्र शास्त्री का वह विवादित बयान जिस पर मचा है घमासान
विवाद की शुरुआत तब हुई जब धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपनी एक कथा के दौरान भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूपों और उनके अस्त्र-शस्त्रों की तुलना कर रहे थे। कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम के हाथ में सुशोभित धनुष-बाण और भगवान श्रीकृष्ण के हाथ में रहने वाली बांसुरी को लेकर कुछ ऐसी बातें कहीं, जिन्हें उनके आलोचकों ने आराध्य देवताओं की तुलना या कमतर आंकने के रूप में ले लिया। आलोचकों का कहना है कि सनातन धर्म में हर देवी-देवता का अपना विशिष्ट स्थान और महत्व है, और इस तरह के बयानों से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है। जैसे ही यह वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई, वैसे ही कमेंट्स की बाढ़ आ गई।
सोशल मीडिया पर क्यों और कैसे शुरू हुई ट्रोलिंग?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और फेसबुक पर धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान के खिलाफ प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। कई यूजर्स ने उनके बयान को अपरिपक्व बताते हुए कहा कि लोकप्रिय कथावाचकों को मंच से बोलते समय शब्दों की मर्यादा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। लोगों ने लिखा कि भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं जो दुष्टों के संहार के लिए धनुष उठाते हैं, और भगवान श्रीकृष्ण प्रेम के प्रतीक के रूप में बांसुरी बजाते हैं, दोनों की अपनी अतुलनीय महिमा है और दोनों की तुलना करना उचित नहीं है। ट्रोलर्स ने उनके खिलाफ तरह-तरह के मीम्स और आलोचनात्मक पोस्ट शेयर करना शुरू कर दिए, जिससे यह मुद्दा कुछ ही घंटों में टॉप ट्रेंड बन गया।
समर्थकों का बचाव: बयान को गलत तरीके से पेश करने का आरोप
दूसरी ओर, धीरेंद्र शास्त्री के समर्थकों और अनुयायियों ने उनकी इस ट्रोलिंग का कड़ा विरोध किया है। समर्थकों का कहना है कि बाबा बागेश्वर के बयान के संदर्भ (Context) को पूरी तरह से नजरअंदाज करके उनके शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। उनके भक्तों का तर्क है कि धीरेंद्र शास्त्री हमेशा से सनातन धर्म, एकता और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में लगे हुए हैं और उनका उद्देश्य किसी भी आराध्य का अनादर करना बिल्कुल नहीं था। समर्थकों का मानना है कि जो लोग उनकी बढ़ती लोकप्रियता से असहज हैं, वे इस तरह के विवादों को हवा देकर उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
धार्मिक मंचों से दिए जाने वाले बयानों पर बढ़ती संवेदनशीलता
यह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी लोकप्रिय संत या कथावाचक के बयान पर इस तरह का विवाद खड़ा हुआ हो। आजकल सोशल मीडिया के दौर में धार्मिक मंचों से कही गई हर बात पर बारीक नजर रखी जाती है। देश के विभिन्न हिस्सों में कथा कहने वाले युवा संतों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है कि वे जनसमूह को संबोधित करते समय भाषा और उदाहरणों का चयन बेहद सावधानी से करें। जानकारों का कहना है कि धार्मिक मामलों में जनता की भावनाएं बहुत संवेदनशील होती हैं, इसलिए जरा सी चूक भारी विवाद का रूप ले सकती है।
विवाद के बाद आगे क्या स्थिति बनी हुई है?
फिलहाल धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के इस बयान पर सोशल मीडिया पर वार-पलटवार का सिलसिला लगातार जारी है। जहां एक तरफ आलोचना करने वाले लोग उनसे स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके भक्त उनके समर्थन में एकजुट होकर खड़े हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया के इस दौर में सार्वजनिक मंचों पर दिए जाने वाले हर एक शब्द का समाज और धर्म के दायरे में कितना बड़ा असर पड़ता है।