11 या 12 अगस्त, कब है सावन शिवरात्रि? रात में शिव चालीसा पढ़ने के साथ जरूर करें इन मंत्रों का जाप
सनातन धर्म में सावन मास का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इस दौरान आने वाली शिवरात्रि का आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत बड़ा महत्व है। सावन शिवरात्रि के दिन देश भर के शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है और लोग भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं। इस साल सावन शिवरात्रि की तारीख को लेकर कई लोगों के मन में संशय बना हुआ है कि यह व्रत 11 अगस्त को रखा जाएगा या 12 अगस्त को। आइए जानते हैं सावन शिवरात्रि की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और इस पावन रात्रि में किन शक्तिशाली मंत्रों का जाप करना फलदायी होता है।
11 या 12 अगस्त, जानिए सावन शिवरात्रि की सही तारीख
पंचांग के अनुसार, सावन मास की चतुर्दशी तिथि का आरंभ और समापन समय इस प्रकार है:
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चतुर्दशी तिथि आरंभ: 11 अगस्त 2026 को दोपहर या शाम के समय से शुरू होकर।
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चतुर्दशी तिथि समाप्त: 12 अगस्त 2026 को रात 11:06 बजे तक रहेगी। चूंकि शिवरात्रि की मुख्य पूजा और निशीथ काल (मध्यरात्रि) का समय 12 अगस्त को प्राप्त हो रहा है, इसलिए उदयातिथि और पंचांग की गणना के अनुसार इस वर्ष सावन शिवरात्रि 12 अगस्त 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन व्रत रखकर रात्रि जागरण करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
रात्रि जागरण और शिव चालीसा का महत्व
सावन शिवरात्रि की पूरी रात सोने की मनाही होती है और भक्त चार प्रहर की पूजा के साथ रात्रि जागरण करते हैं। इस रात विधि-विधान से भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने के बाद शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए। शिव चालीसा का पाठ करने से मन को शांति मिलती है, मानसिक तनाव दूर होता है और महादेव की असीम कृपा प्राप्त होती है।
सावन शिवरात्रि की रात जरूर करें इन शक्तिशाली मंत्रों का जाप
शिवरात्रि की इस दिव्य रात्रि में एकाग्र होकर नीचे दिए गए चमत्कारी मंत्रों का जाप करने से जीवन के सभी कष्ट और ग्रह दोष दूर हो जाते हैं:
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महामृत्युंजय मंत्र:
'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्' (यह मंत्र अकाल मृत्यु के भय को दूर करने और उत्तम स्वास्थ्य व आयु के लिए अचूक माना जाता है।)
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शिव मूल मंत्र:
'ॐ नमः शिवाय' (यह पंचाक्षर मंत्र ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली मंत्र है, जिसके निरंतर जाप से मन की हर मुराद पूरी होती है।)
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रुद्र गायत्री मंत्र:
'ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्' (इस मंत्र के जाप से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और बुद्धि व विवेक में वृद्धि होती है।)