हॉकी वर्ल्ड कप में भारत का सबसे बड़ा धुरंधर! अकेले 12 गोल दागकर मचाई थी भयंकर तबाही, आज भी कायम हैं ये 3 ऐतिहासिक रिकॉर्ड
भारतीय हॉकी इतिहास के पन्नों में कई ऐसे स्वर्णिम पल दर्ज हैं जिन्होंने पूरी दुनिया में देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है। जब-जब हॉकी वर्ल्ड कप (Hockey World Cup) के मैदान पर भारत के सबसे बड़े और खूंखार गोलकीपर या फॉरवर्ड खिलाड़ियों की बात होती है, तब-तब एक ऐसे महानायक का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है जिसने अपनी स्टिक के दम पर तबाही मचा दी थी। वर्ल्ड कप के एक ही संस्करण में अपनी तूफानी फॉर्म से विरोधियों की नींद उड़ाने वाले इस भारतीय धुरंधर ने टूर्नामेंट में कुल 12 गोल दागकर ऐसा इतिहास रचा था, जिसके रिकॉर्ड्स आज भी अमिट हैं और आज तक कोई दूसरा भारतीय खिलाड़ी उनके उन 3 बड़े रिकॉर्ड्स के आसपास भी नहीं पहुंच पाया है।
अकेले 12 गोल दागकर वर्ल्ड कप में मचाया था हाहाकार
हम बात कर रहे हैं भारतीय हॉकी के महान खिलाड़ी राजेंदर सिंह सीनियर (Rajinder Singh Sr.) की, जिन्होंने साल 1982 के पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप में अपने प्रदर्शन से पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी थी। मुंबई (तब बॉम्बे) में खेले गए उस विश्व कप के दौरान राजेंदर सिंह सीनियर का बल्ला नहीं बल्कि उनकी हॉकी स्टिक आग उगल रही थी। पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलने की उनकी कला इतनी अचूक थी कि दुनिया का बड़े से बड़ा डिफेंसिव गोलकीपर भी उनके शॉट्स को रोकने में नाकाम रहता था। उन्होंने उस पूरे टूर्नामेंट में अपनी टीम के लिए अकेले 12 गोल दागे और गोल करने की इस रफ्तार से तबाही मचा दी थी।
वे 3 बड़े रिकॉर्ड जो आज भी हैं अटूट और कायम
राजेंदर सिंह सीनियर द्वारा 1982 के विश्व कप में बनाए गए वे रिकॉर्ड्स आज भी भारतीय हॉकी के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखे हैं और पिछले चार दशकों से पूरी तरह सुरक्षित हैं:
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एक वर्ल्ड कप एडिशन में सर्वाधिक गोल: किसी भी एक हॉकी वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में भारत की ओर से सबसे ज्यादा गोल दागने का रिकॉर्ड आज भी राजेंदर सिंह सीनियर के नाम दर्ज है। उनके 12 गोल के इस जादुई आंकड़े को आज तक कोई भारतीय फॉरवर्ड या ड्रैग-फ्लिकर नहीं तोड़ पाया है।
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पेनल्टी कॉर्नर पर सबसे घातक कन्वर्जन रेट: उस दौर में जब ड्रैग-फ्लिक की तकनीक आज जितनी आधुनिक नहीं थी, तब राजेंदर सिंह ने अपनी सटीकता और पावरफुल हिट्स से पेनल्टी कॉर्नर को लगभग 100 प्रतिशत गोल में बदलने का जो रिकॉर्ड बनाया, वह आज भी एक मिसाल है।
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मजबूत टीमों के खिलाफ लगातार गोल: विश्व कप के उस संस्करण में पाकिस्तान, नीदरलैंड्स और ऑस्ट्रेलिया जैसी दुनिया की सबसे मजबूत और खूंखार टीमों के खिलाफ लगातार मैच में गोल दागने का जो कारनामा उन्होंने किया था, वैसा दबदबा किसी अन्य भारतीय खिलाड़ी का बड़े टूर्नामेंट में नहीं दिखा है।
भारतीय हॉकी के लिए आज भी प्रेरणा हैं राजेंदर सिंह
भले ही आधुनिक समय में भारतीय हॉकी टीम ने कई नए और शानदार ड्रैग-फ्लिकर पैदा किए हैं और ओलंपिक से लेकर वर्ल्ड कप तक कई मेडल अपने नाम किए हैं, लेकिन 1982 के विश्व कप में राजेंदर सिंह सीनियर द्वारा गढ़ा गया यह कीर्तिमान आज भी सबसे ऊपर है। उनकी वह ऐतिहासिक पारियां और गोल करने की भूख आज की युवा पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए हमेशा से एक बड़ी प्रेरणा रही है। जब भी भारत आगामी विश्व कप या अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स के मैदान पर उतरता है, तो फैंस को हमेशा किसी नए राजेंदर सिंह के उभरने का इंतजार रहता है जो उस पुराने रिकॉर्ड को चुनौती दे सके।