संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई का परचम, एबीवीपी का सफाया

वाराणसी भारतीय धर्म, दर्शन एवं शिक्षा का प्रख्यात केंद्र है। यह कशी के नाम से विख्यात है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां गंगा में डुबकी लगाकर भगवान् विश्वनाथ का दर्शन करते हैं।

लखनऊ।। वाराणसी स्थित विश्वविख्यात संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई ने सभी पदों पर जीत हासिल की है। इस चुनाव में एबीवीपी चारो खाने चित्त हो गई है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय भारतीय सनातन धर्म-दर्शन और कर्मकांड की शिक्षा के लिए जाना जाता है। इसमें अध्ययन करने वाले छात्र सनातन मतावलंबी परिवारों से ही आते हैं। इसलिए यहां के छात्रसंघ चुनाव परिणाम के गहरे राजनीतिक निहितार्थ हैं।

उल्लेखनीय है की वाराणसी भारतीय धर्म, दर्शन एवं शिक्षा का प्रख्यात केंद्र है। यह कशी के नाम से विख्यात है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां गंगा में डुबकी लगाकर भगवान् विश्वनाथ का दर्शन करते हैं। वाराणसी का संदेश विश्व में गूंजता है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में अध्ययन कर निकले छात्र देश-समाज को सामाजिक और सांस्कृतिक संस्कार देते हैं। वर्तमान में यह नगरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र भी है। इसलिए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में बड़े-बड़े सियासी वीरों की निगाहें लगी थी।

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में मुख्य मुकाबला एनएसयूआई और एबीवीपी के बीच था। एनएसयूआई ने सभी पदों पर जीत हासिल की है। अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई के कृष्ण मोहन शुक्ला, उपाध्यक्ष पद पर अजीत कुमार चौबे, महामंत्री पद पर शिवम चौबे और पुस्तकालय मंत्री के पद पर आशुतोष कुमार मिश्रा को जीत हासिल हुई है। छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी चारो खाने चित्त हो गई है। बताते चलें कि चुनाव में बीजेपी के कई बड़े नेता एबीवीपी प्रत्याशियों की मदद कर रहे थे।

यूपी एनएसयूआई के पूर्व अध्यक्ष राघवेंद्र नारायण ने छात्रसंघ चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि छात्रसंघ का यह चुनाव युवाओं का बीजेपी को करारा जवाब है। अराजकता और बेरोजगारी की समस्या से त्रस्त युवाओं ने देश और प्रदेश में सत्ता परिवर्तन का संकेत दिया है। राघवेंद्र नारायण ने कहा कि छात्रों और युवाओं के साथ ही समाज का हर तबका देश और प्रदेश में परिवर्तन का मन बना चुका है।

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