विधायक पद के बाद अब शुभेंदु ने छोड़ी तृणमूल, सभी पदों से दिया इस्तीफा

पश्चिम बंगाल के धाकड़ नेता शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का साथ छोड़ ही दिया। बुधवार को उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दिया था।

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के धाकड़ नेता शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का साथ छोड़ ही दिया। बुधवार को उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दिया था। उसके बाद गुरुवार को पता चला है कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता समेत सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।
Shubhendu resigned

कारण नहीं बताया

शुभेंदु के करीबी सूत्रों ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चिट्ठी लिखी है जिसमें उन्होंने प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की बात कही है। इसका कोई कारण उन्होंने नहीं बताया है। अपनी चिट्ठी में उन्होंने केवल इतना लिखा है कि वह तृणमूल के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं।

पार्टी में स्वागत को तैयार भाजपा

इधर तृणमूल के सभी पदों से शुभेंदु के इस्तीफे के तुरंत बाद भाजपा उन्हें अपनी और लेने के लिए तैयार है। पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा है कि शुभेंदु अगर भाजपा में आना चाहें तो उनका स्वागत है। दिलीप ने कहा कि शुभेंदु बड़े जनाधार वाले नेता हैं और उनका तृणमूल से नाता तोड़ना इस बात का संकेत है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व पर अब किसी को भरोसा नहीं रहा। आगामी विधानसभा चुनाव में जनता भी यही कहेगी।

शुभेंदु का रसूख

टीएमसी में शुभेंदु अधिकारी का कद काफी बड़ा था। दरअसल, पश्चिम बंगाल की 65 विधानसभा सीटों पर अधिकारी परिवार की मजबूत पकड़ है। ये सीटें राज्य के छह जिलों में फैली हैं।

शुभेंदु अधिकारी के प्रभाव वाली सीटों की संख्या राज्य की कुल 294 सीटों के पांचवें हिस्से से ज्यादा है। शुभेंदु अधिकारी पूर्वी मिदनापुर जिले के एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी 1982 में कांथी दक्षिण से कांग्रेस के विधायक थे, लेकिन बाद में वे तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक बन गए।

शुभेंदु अधिकारी 2009 से ही कांथी सीट से तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं। 2007 में शुभेंदु अधिकारी ने पूर्वी मिदनापुर जिले के नंदीग्राम में एक इंडोनेशियाई रासायनिक कंपनी के खिलाफ भूमि-अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन खड़ा किया। इस आंदोलन ने ही 34 साल से सत्ता पर काबिज वाम दलों को सत्ता से बाहर करने में अहम भूमिका निभाई थी।

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