साइकिल के सहारे सत्ता में वापसी की समाजवादी जद्दोजद, सरल नहीं है डगर

lucknow। समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर साइकिल के सहारे सत्ता का सफर शुरू किया है। इसका आगाज गत शुक्रवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने किया। उन्होंने 11 किलोमीटर तक साइकिल चलाई थी। शनिवार को रामपुर से बरेली के लिए रवाना हुई साइकिल यात्रा को सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल और विधानसभा में नेता विरोधी दल रामगोविंद चौधरी ने आंबेडकर पार्क से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। साइकिल यात्रा 21 मार्च को लखनऊ पहुंचेगी।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012 में विधानसभा चुनाव के पहले भी सपा ने प्रदेश भर में साइकिल यात्रा निकाली थी। अखिलेश यादव ने खुद राजधानी समेत कई जगहों पर साइकिल यात्रा का नेतृत्व किया था। इसका पार्टी को लाभ भी मिला और चुनाव में सपा को पूर्ण बहुमत मिला। अगले वर्ष फिर यूपी में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसलिए सभी की निगाहें इस साइकिल यात्रा पर है। हालाँकि सपा का कहना है कि यह साईकिल यात्रा का मकसद पार्टी सांसद आजम खां के समर्थन में और जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए निकाली जा रही है।

रामपुर में साइकिल यात्रा की शुरुवात करते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जनसभा को संबोधित किया। साइकिल यात्रा को 2022 के विधानसभा चुनाव प्रचार का आरंभ बताते हुए उन्होंने कहा कि अब भाजपा सरकार के दिन ज्यादा नहीं बचे हैं। अगली सरकार समाजवादी की होगी। अखिलेश यादव ने कहा कि इस साइकिल यात्रा में पार्टी के विधायक ही हिस्सा ले रहे हैं। यदि हमने कार्यकर्ताओं से या जनता से साइकिल चलाने की अपील कर दी तो फिर हर तरफ साइकिल ही नजर आएगी।

बड़ी खबर: आजम के समर्थन में सपा रामपुर से लखनऊ तक निकालेगी साइकिल यात्रा 

सीएम योगी पर निशाना साधते हुए अखिलेश ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री ठोक दो, पटक कर मारा जाएगा जैसी बातें करते हैं। ऐसे में जनता को उनसे कोई उम्मीद नहीं है। केंद्र की मोदी सरकार से भी जनता त्रस्त है। उन्होंने कहा कि केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। मंहगाई, शिक्षा, रोजगार आदि का कोई पुरसाहाल नहीं है। अखिलेश ने कहा कि भाजपा हिंदू-मुस्लिम के नाम पर एक-दूसरे को लड़ाती है।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि आम जनता से जुड़ने में पदयात्रा और साइकिल यात्रा सबसे सहज मार्ग है। वर्ष 2012 में साइकिल यात्रा के जरिये समाजवादी पार्टी ने विधानसभा चुनाव में बहुमत भी हांसिल किया था। लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। वर्ष 2012 में सपा का सीधा मुकाबला बसपा से था। 2022 में यूपी में बहुकोणीय मुकाबले के आसार बन रहे हैं। सपा को भाजपा, बसपा और कांग्रेस के अलावा क्षेत्रीय पार्टियों से भी चुनौती मिलेगी।

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