एशियन गेम्स में क्रिकेट की फ्लॉप कहानी, ना कवर्स, ना रिजर्व डे और बिना खेले ही टीमें को मिल जाता है मेडल

एशियन गेम्स में क्रिकेट की फ्लॉप कहानी, ना कवर्स, ना रिजर्व डे और बिना खेले ही टीमें को मिल जाता है मेडल

अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में जब भी एशियाड यानी एशियन गेम्स का आयोजन होता है, तो पूरी दुनिया की नजरें एशिया के सबसे बड़े महाकुंभ पर टिक जाती हैं। हालांकि, दुनिया के सबसे लोकप्रिय और अरबों प्रशंसकों वाले खेल क्रिकेट को जब इस बहु-खेल प्रतियोगिता में शामिल किया जाता है, तो इसके आयोजन और प्रशासनिक कुप्रबंधन को देखकर खेल प्रेमियों के हाथ सिर्फ निराशा और मायूसी ही लगती है। एशियन गेम्स में क्रिकेट मुकाबलों के दौरान जिस प्रकार की अव्यवस्थाएं, सुविधाओं का अभाव और अजीबो-गरीब नियम देखने को मिलते हैं, उसने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) और एशियाई ओलंपिक परिषद (OCA) की साख पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। बारिश के दौरान मैदान को ढकने के लिए प्रॉपर कवर्स का न होना, बारिश से धुले मुकाबलों के लिए किसी रिजर्व डे का न होना और सबसे हैरान करने वाली बात यह कि बिना एक भी गेंद फेंके रैंकिंग के आधार पर टीमों को सीधे मेडल बांट दिया जाना, इस टूर्नामेंट को एक गंभीर खेल प्रतियोगिता के बजाय किसी शौकिया आयोजन की तरह दिखाता है।

सुविधाओं का भारी अभाव: बारिश आते ही मैदान में कवर्स तक की व्यवस्था नहीं

अंतरराष्ट्रीय स्तर के किसी भी क्रिकेट मैच में जब बारिश शुरू होती है, तो अत्याधुनिक ग्राउंड कवर तकनीक और ड्रेनेज सिस्टम के जरिए पूरे मैदान को कुछ ही मिनटों में सुरक्षित कर लिया जाता है ताकि खेल जल्द से जल्द दोबारा शुरू हो सके। इसके ठीक उलट, एशियन गेम्स के क्रिकेट मुकाबलों के दौरान आयोजकों की तरफ से बुनियादी सुविधाओं का ऐसा अकाल देखने को मिलता है कि बारिश शुरू होने पर केवल पिच के छोटे से हिस्से को ढकने के लिए ही प्लास्टिक की पन्नियां या साधारण कवर लाए जाते हैं। पूरे आउटफील्ड के खुले रहने के कारण थोड़ी सी भी बारिश के बाद मैदान दलदल में तब्दील हो जाता है और धूप निकलने के बाद भी मैच शुरू करा पाना नामुमकिन हो जाता है। मैदान सुखाने के लिए आधुनिक सुपर सोपर जैसी मशीनों की गैरमौजूदगी यह साबित करती है कि एशियन गेम्स में क्रिकेट को उस गंभीरता और पेशेवर रवैये के साथ नहीं आयोजित किया जा रहा है जिसका यह खेल वास्तविक रूप से हकदार है।

रिजर्व डे का ना होना: बारिश से मैच धुला तो किस्मत और अंकों का अजीब खेल

आधुनिक क्रिकेट में आईसीसी के लगभग सभी बड़े टूर्नामेंट्स और नॉकआउट मुकाबलों के लिए कम से कम एक 'रिजर्व डे' यानी आरक्षित दिन का प्रावधान रखा जाता है ताकि बारिश या खराब मौसम के कारण मैच रद्द न हो और नतीजे का फैसला क्रिकेट के मैदान पर ही हो। एशियन गेम्स की समय-सारणी में आयोजकों ने रिजर्व डे जैसी किसी भी व्यवस्था को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है। यदि किसी महत्वपूर्ण नॉकआउट या सेमीफाइनल मुकाबले में बारिश बाधा बनती है और मैच का नतीजा नहीं निकल पाता, तो खेल को अगले दिन कराने के बजाय सीधे रद्द घोषित कर दिया जाता है। इसका खामियाजा उन टीमों को भुगतना पड़ता है जो मैदान पर पसीना बहाकर जीत हासिल करने का हुनर रखती हैं, लेकिन मौसम की मार और खराब नियमों की वजह से बिना खेले ही टूर्नामेंट से बाहर हो जाती हैं।

बिना खेले ही मिल जाता है मेडल: आईसीसी रैंकिंग का यह कौन सा न्याय है

एशियन गेम्स में क्रिकेट के नियमों की सबसे बड़ी और हास्यास्पद विडंबना तब देखने को मिलती है जब नॉकआउट या मेडल मैच बारिश के कारण पूरी तरह से धुल जाते हैं। ऐसी स्थिति में टॉस या डकवर्थ-लुईस नियम लागू करने के बजाय आयोजक उस टीम को विजेता घोषित कर देते हैं जिसकी अंतरराष्ट्रीय आईसीसी टी20 रैंकिंग उच्च होती है। यानी अगर कोई कमजोर टीम मैदान पर किसी मजबूत टीम को पछाड़ने की स्थिति में भी हो और मैच बारिश में धुल जाए, तो ऊंची रैंकिंग वाली टीम को बिना कोई मेहनत किए या बिना एक भी गेंद खेले सीधे मेडल थमा दिया जाता है। बिना बल्ला चलाए और बिना गेंद फेंके मेडल जीतने की यह परिपाटी खेल भावना और निष्पक्षता के सभी सिद्धांतों का सरेआम मजाक उड़ाती है, जिससे प्रशंसकों और खिलाड़ियों दोनों के बीच भारी आक्रोश देखने को मिलता है।

क्या ऐसे नियमों के साथ ओलिंपिक में अपनी जगह और साख बचा पाएगा क्रिकेट

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने क्रिकेट को आने वाले ओलंपिक खेलों में शामिल करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है, ताकि दुनिया भर में ओलंपिक की लोकप्रियता को और बढ़ाया जा सके। ऐसे में जब ओलंपिक से पहले एशियन गेम्स जैसे विशाल मंच पर क्रिकेट का इतना घटिया और गैर-पेशेवर प्रदर्शन देखने को मिलता है, तो यह वैश्विक खेल संस्थाओं के सामने एक बेहद नकारात्मक संदेश जाता है। यदि एशियन गेम्स में क्रिकेट को एक शीर्ष स्तरीय अंतरराष्ट्रीय खेल के रूप में स्थापित करना है, तो एशियाई क्रिकेट परिषद और आयोजकों को अपने बुनियादी ढांचे, ड्रेनेज सिस्टम, कवर्स और मैच नियमों में आमूल-चूल बदलाव करने होंगे। जब तक बारिश से निपटने के पुख्ता इंतजाम, रिजर्व डे की व्यवस्था और मैदान पर पारदर्शी तरीके से फैसला करने के नियम लागू नहीं किए जाते, तब तक एशियन गेम्स में क्रिकेट की यह कहानी एक फ्लॉप शो और मजाक ही बनी रहेगी।