Opinion: वनडे में यशस्वी जायसवाल का भी हुआ वैभव सूर्यवंशी जैसा हाल, न सह पा रहे न कह पा रहे!

Opinion: वनडे में यशस्वी जायसवाल का भी हुआ वैभव सूर्यवंशी जैसा हाल, न सह पा रहे न कह पा रहे!

भारतीय क्रिकेट जगत के गलियारों में इन दिनों एक ऐसे युवा और प्रतिभाशाली बल्लेबाज की चर्चा बहुत तेजी से हो रही है, जिसने टेस्ट क्रिकेट में अपनी विस्फोटक और शानदार बल्लेबाजी से पूरी दुनिया में अपनी एक अलग ही अमिट छाप छोड़ी है। हम बात कर रहे हैं विस्फोटक ओपनर यशस्वी जायसवाल की, जिन्होंने रेड-बॉल क्रिकेट यानी टेस्ट फॉर्मेट में अपनी आक्रामक बैटिंग से दिग्गजों को भी हैरान कर दिया है, लेकिन जब बात लिमिटेड ओवर क्रिकेट यानी वनडे फॉर्मेट की आती है, तो उनकी कहानी बिल्कुल उलट नजर आती है। पिछले कुछ समय से वनडे सेटअप के भीतर यशस्वी जायसवाल के साथ जो कुछ भी घटित हो रहा है, उसे देखकर खेल पंडित भी यही कह रहे हैं कि उनका हाल भी युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी जैसा ही होता जा रहा है। टीम प्रबंधन की रणनीतियों और चयन के अजीबोगरीब पैमानों के बीच फंसे इस युवा खिलाड़ी की स्थिति इस वक्त ऐसी हो चुकी है कि वे ना तो अपनी इस बेबसी को खुलकर किसी से कह पा रहे हैं और ना ही इस दबाव को चुपचाप सह पा रहे हैं, जिससे उनके भविष्य को लेकर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं।

टेस्ट क्रिकेट के बेताज बादशाह लेकिन वनडे फॉर्मेट में लगातार नजरअंदाज हो रहे हैं जायसवाल

यशस्वी जायसवाल ने जब से अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में कदम रखा है, तब तक उन्होंने अपनी तकनीक, आक्रामकता और रनों की भूख से यह साबित कर दिया है कि वे भविष्य के बहुत बड़े मैच विनर बल्लेबाज हैं। विरोधी गेंदबाजों के छक्के छुड़ाने वाले इस बाएं हाथ के ओपनर ने टेस्ट मुकाबलों में कई ऐतिहासिक पारियां खेली हैं और टीम की ओपनिंग समस्या को लंबे समय के लिए दूर कर दिया है। इसके बावजूद, जब बात वनडे अंतरराष्ट्रीय मैचों की आती है, तो चयनकर्ता और टीम मैनेजमेंट उन्हें लगातार बेंच पर बिठाए रखते हैं या फिर उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका देने से कतराते हैं। सीमित ओवरों के इस फॉर्मेट में उन्हें पर्याप्त मौके न मिलना और जब मौके मिलें भी तो उन्हें तुरंत बाहर कर देना इस बात का संकेत है कि टीम की रणनीतिक योजना में उनके लिए वनडे का दरवाजा अभी पूरी तरह नहीं खुला है, जो उनके जैसे फॉर्म में चल रहे खिलाड़ी के साथ एक बहुत बड़ा अन्याय माना जा रहा है।

वैभव सूर्यवंशी की तरह अवसरों की कमी और चयनकर्ताओं के दोहरे मापदंड का शिकार

बिहार के युवा और रिकॉर्ड तोड़ने वाले बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा है, जिन्हें उनकी प्रतिभा के अनुसार लगातार और स्थाई मौके मिलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। कम उम्र में ही अपनी तूफानी पारियों से तहलका मचाने वाले खिलाड़ियों को जब घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सर्किट के बीच में नजरअंदाज किया जाता है, तो उनका आत्मविश्वास डगमगाने लगता है। यशस्वी जायसवाल के साथ भी कुछ ऐसी ही मानसिक कश्मकश चल रही है क्योंकि टी20 और टेस्ट में शानदार प्रदर्शन करने के बाद भी जब उन्हें वनडे टीम में अपनी जगह पक्की करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है, तो यह उनके प्रशंसकों के लिए भी काफी निराशाजनक होता है। एक तरफ जहां अन्य खिलाड़ियों को लगातार असफलता के बाद भी मौके मिलते रहते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रतिभाशाली युवाओं को चयन के इस अजीबोगरीब चक्रव्यूह में उलझाकर रख दिया जाता है, जिससे उनके करियर का ग्राफ बुरी तरह प्रभावित होने लगता है।

मानसिक दबाव और करियर की इस उहापोह की स्थिति से कैसे पार पाएंगे युवा सितारे

किसी भी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के लिए यह स्थिति सबसे ज्यादा पीड़ादायक होती है जब वह अपनी काबिलियत साबित करने के लिए पूरी तरह तैयार बैठा हो, लेकिन उसे मैदान पर उतरने का मौका ही न मिले। यशस्वी जायसवाल जैसे आक्रामक बल्लेबाज के लिए यह दौर यकीनन एक मानसिक परीक्षा की तरह है, जहां उन्हें धैर्य रखते हुए अपने समय का इंतजार करना पड़ रहा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि चयनकर्ताओं और टीम के मुख्य कोच को यह समझना होगा कि जायसवाल जैसे खिलाड़ियों को केवल एक फॉर्मेट तक सीमित रखने के बजाय उन्हें वनडे क्रिकेट में भी लगातार मौके देकर तराशा जाना चाहिए ताकि वे भविष्य में भारत के लिए तीनों फॉर्मेट के एक स्थाई और भरोसेमंद मैच विनर बन सकें। जब तक उन्हें खुला वातावरण और भरोसे का हाथ नहीं मिलेगा, तब तक वे अपनी असली क्षमता का सौ प्रतिशत प्रदर्शन इस प्रारूप में नहीं कर पाएंगे।

भारतीय क्रिकेट का भविष्य और फैंस की उम्मीदें, क्या जल्द बदलेगी चयन नीति

भारतीय क्रिकेट टीम का भविष्य इस बात पर बहुत अधिक निर्भर करता है कि बोर्ड और चयनकर्ता नई पीढ़ी के इन बेहतरीन खिलाड़ियों को किस प्रकार संभालते हैं और उन्हें कैसे आगे बढ़ाते हैं। यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी किसी भी टीम की रीढ़ बन सकते हैं, बशर्ते उन्हें समय रहते उचित दिशा और पूरा समर्थन मिले। क्रिकेट प्रेमियों और खेल समीक्षकों की निगाहें अब आगामी श्रृंखलाओं पर टिकी हुई हैं, जहां यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या टीम प्रबंधन यशस्वी जायसवाल को वनडे फॉर्मेट में उनकी मनपसंद ओपनिंग पोजीशन पर उतारकर उनके साथ इंसाफ करता है या फिर उनका यह संघर्ष यूं ही लगातार जारी रहता है।