8600 से ज्यादा रन, टीम इंडिया में बार-बार बुलावा... फिर भी नहीं मिला मौका
भारतीय घरेलू क्रिकेट (Domestic Cricket) के गलियारों से लेकर राष्ट्रीय चयन समिति के कमरों तक, इन दिनों एक ही नाम पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है और वह नाम है अभिमन्यु ईश्वरन (Abhimanyu Easwaran)। बंगाल के इस शानदार सलामी बल्लेबाज ने पिछले कई वर्षों से लगातार रणजी ट्रॉफी और भारत 'ए' (India A) के दौरों पर रनों का अंबार लगाया है, लेकिन इसके बावजूद उनके हाथ केवल निराशा ही लगी है। घरेलू क्रिकेट में 8,600 से अधिक रनों का विशाल पहाड़ खड़ा करने और दर्जनों शतकों की झड़ी लगाने वाले अभिमन्यु ईश्वरन आज भी भारतीय टेस्ट टीम (Indian Test Team) में अपने पहले आधिकारिक डेब्यू का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। बार-बार भारतीय स्क्वाड में चुने जाने और ट्रेवलिंग रिजर्व या बैक-अप ओपनर के रूप में टीम के साथ यात्रा करने के बावजूद, उन्हें प्लेइंग इलेवन (Playing XI) में अंतिम ग्यारह खिलाड़ियों में शामिल होने का एक भी मौका नहीं मिल पाया है।
घरेलू क्रिकेट में रनों का महासागर, बंगाल और भारत 'ए' के लिए साबित हुए सबसे बड़े संकटमोचन
अभिमन्यु ईश्वरन की क्रिकेट यात्रा संघर्ष, अनुशासन और रनों की अविश्वसनीय भूख की एक मिसाल है। उन्होंने घरेलू सर्किट में अपनी तकनीकी दृढ़ता, लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने की क्षमता और बड़े मैचों में शानदार पारियां खेलकर खुद को साबित किया है। जब भी भारत 'ए' की टीम ने विदेशी दौरों (जैसे दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड या ऑस्ट्रेलिया) पर कड़ी परिस्थितियों में मैच खेले हैं, तब-तब अभिमन्यु ने ओपनिंग करते हुए अपनी तकनीक का लोहा मनवाया है। उनके बल्ले से निकले 8600 से ज्यादा प्रथम श्रेणी रन इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि वे किसी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के गेंदबाजी आक्रमण का सामना करने के लिए तकनीकी रूप से पूरी तरह परिपक्व हैं। इसके बावजूद, मुख्य टेस्ट टीम में स्थापित सलामी बल्लेबाजों के मौजूद होने के कारण उन्हें हमेशा बेंच पर ही बैठना पड़ा है।
चयनकर्ताओं के फैसलों पर उठे गंभीर सवाल, आखिर कब खत्म होगा अभिमन्यु का लंबा इंतजार?
क्रिकेट विशेषज्ञों, पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के मन में अब यह बड़ा सवाल उठने लगा है कि यदि घरेलू क्रिकेट में रिकॉर्ड बनाने वाले खिलाड़ी को भी लंबे समय तक बाहर बैठना पड़े, तो युवा पीढ़ी घरेलू टूर्नामेंट्स को लेकर कितना प्रेरित होगी। कई क्रिकेट पंडितों का मानना है कि जब टीम में ओपनिंग स्लॉट या बैक-अप की जरूरत होती है, तब अभिमन्यु ईश्वरन का नाम सबसे पहले स्क्वाड में शामिल किया जाता है, लेकिन जब मैच खेलने की बारी आती है, तो टीम प्रबंधन किसी अन्य विकल्प पर भरोसा जता देता है। लगातार टीम के साथ बने रहने, नेट्स पर पसीना बहाने और हर बार खुद को मानसिक रूप से तैयार रखने के बाद भी प्लेइंग इलेवन में जगह न मिलना किसी भी प्रतिभावान खिलाड़ी के मनोबल को प्रभावित कर सकता है।
क्या भविष्य की योजनाओं में शामिल हैं अभिमन्यु? दिग्गजों ने दिया समर्थन
भारतीय टीम के पूर्व कप्तानों और महान बल्लेबाजों ने कई बार खुलकर यह कहा है कि अभिमन्यु ईश्वरन टेस्ट क्रिकेट के लिए पूरी तरह से तैयार हैं और उन्हें उनकी मेहनत का फल जरूर मिलना चाहिए। जिस तरह से उन्होंने इंडिया 'ए' के लिए विदेशी पिचों पर रन बनाए हैं, वह काबिल-ए-तारीफ है। वर्तमान में भारतीय टेस्ट टीम में बदलाव और ट्रांजिशन का दौर चल रहा है, ऐसे में आने वाले समय में जब सीनियर खिलाड़ियों का कार्यभार प्रबंधन देखा जाएगा, तो अभिमन्यु जैसे अनुभवी और तकनीक के पक्के खिलाड़ी की उपयोगिता और बढ़ जाएगी। उनके फैंस और बंगाल के क्रिकेट प्रेमी लगातार यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि आने वाली टेस्ट सीरीज में चयनकर्ता उन्हें सिर्फ स्क्वाड में नहीं, बल्कि मैदान पर देश की जर्सी पहनकर ओपनिंग करने का सुनहरा अवसर देंगे।
صبر और संघर्ष का दूसरा नाम अभिमन्यु, घरेलू शेरों की फेर में उलझा करियर
करियर के इस पड़ाव पर आकर जहां कई खिलाड़ी हताश हो जाते हैं, वहीं अभिमन्यु ईश्वरन ने कभी भी अपनी मेहनत और अनुशासन में कोई कमी नहीं आने दी है। वे हर रणजी मैच में मैदान पर उतरते हैं और अपने बल्ले से आलोचकों को करारा जवाब देते हैं। उनका यह अटूट संघर्ष और खेल के प्रति समर्पण यह सिखाता है कि सफलता का शॉर्टकट नहीं होता। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि राष्ट्रीय चयनकर्ता और टीम मैनेजमेंट आने वाले दिनों में इस प्रतिभावान बल्लेबाज को टेस्ट कैप पहनने का मौका कब देते हैं, क्योंकि 8600 से ज्यादा रनों की तपस्या करने वाले इस खिलाड़ी का मैदान पर उतरना भारतीय क्रिकेट के लिए न्यायोचित कदम साबित होगा।