रोहित-विराट और गिल पर दारोमदार... न्यूजीलैंड के उछाल से निपटने के लिए भारत को बनानी होगी खास रणनीति

रोहित-विराट और गिल पर दारोमदार... न्यूजीलैंड के उछाल से निपटने के लिए भारत को बनानी होगी खास रणनीति

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के पटल पर जब भी भारतीय टीम विदेशी सरजमीं पर तेज और उछाल भरी पिचों पर खेलने उतरती है, तो क्रिकेट प्रेमियों की धड़कनें अपने आप तेज हो जाती हैं। वर्तमान समय में भारतीय क्रिकेट टीम के सामने एक बहुत बड़ी और चुनौतीपूर्ण श्रृंखला खड़ी है, जहां उन्हें कीवी टीम यानी न्यूजीलैंड के खिलाफ उन्हीं के घर पर या उन पिचों पर मुकाबला करना है जो अपनी अतिरिक्त उछाल, सीम मूवमेंट और तेज गेंदबाजों के लिए जानी जाती हैं। इस कठिन और चुनौतीपूर्ण दौरे पर भारतीय बल्लेबाजी क्रम की रीढ़ माने जाने वाले कप्तान रोहित शर्मा, अनुभवी बल्लेबाज विराट कोहली और युवा सनसनी शुभमन गिल के कंधों पर सबसे बड़ा और भारी दारोमदार रहने वाला है। जब विरोधी टीम के पास ऐसे खूंखार तेज गेंदबाज हों जो पिच की दरारों से गेंद को अचानक हवा में उछालने की क्षमता रखते हों, तो बिना किसी ठोस और अचूक तकनीक के क्रीज पर टिक पाना किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं होता है। यही वजह है कि मुख्य कोच और टीम प्रबंधन को इस बार न्यूजीलैंड की इस खतरनाक उछालभरी चुनौती से निपटने के लिए एक एकदम अलग, अनुशासित और फुल-प्रूफ गेम प्लान तैयार करना होगा।

न्यूजीलैंड की पिचों का वह खौफनाक मिजाज और अतिरिक्त उछाल का सामना करने की असली चुनौती

कीवी पिचों की प्रकृति हमेशा से दुनिया भर के बल्लेबाजों के लिए एक बड़ी पहेली और अग्निपरीक्षा की तरह रही है, क्योंकि यहां की पिचें केवल हरी घास से ढकी नहीं होतीं बल्कि उनमें प्राकृतिक रूप से एक ऐसा अतिरिक्त उछाल होता है जो अच्छे से अच्छे तकनीकी रूप से दक्ष बल्लेबाजों को भी दुविधा में डाल देता है। जब गेंद पिच पर टप्पा खाने के बाद अचानक से छाती या कंधे की ऊंचाई तक उठती है, तो बल्लेबाजों के पास प्रतिक्रिया देने के लिए महज कुछ ही मिलीसेकंड का समय बचता है। ऐसे में यदि फुटवर्क सही न हो या शरीर के करीब खेलकर खेलने की आदत न हो, तो गेंद बल्ले का बाहरी किनारा लेकर सीधे विकेटकीपर या स्लिप में खड़े फील्डर के हाथों में चली जाती है। भारतीय बल्लेबाजों का पारंपरिक रूप से स्पिन गेंदबाजी खेलने का मजबूत इतिहास रहा है, लेकिन जब बात पर्थ, क्राइस्टचर्च या वेलिंगटन जैसी उछालभरी पिचों पर खेलने की आती है, तो कई बार तकनीक की यह कमजोरी खुलकर सामने आ जाती है। इसी कमजोरी को दूर करने के लिए इस बार टीम इंडिया के खिलाड़ियों ने नेट सत्र में शॉर्ट पिच गेंदों और बाउंसरों के खिलाफ विशेष अभ्यास करना शुरू कर दिया है ताकि मैच के दौरान कोई हैरानी न हो।

रोहित शर्मा का अनुभव और शुरुआती ओवरों में नई गेंद की चमक से निपटने की कला

भारतीय टीम के कप्तान और आक्रामक ओपनर रोहित शर्मा पर इस पूरी श्रृंखला के दौरान टीम को एक मजबूत और ठोस शुरुआत दिलाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी। न्यूजीलैंड की पिचों पर जब मैच की शुरुआत होती है, तो पहले पंद्रह से बीस ओवरों तक नई लाल या सफेद ड्यूक और कूकाबुरा गेंद हवा में इस कदर स्विंग करती है और पिच से सीम हासिल करती है कि दुनिया का कोई भी बल्लेबाज असहज हो सकता है। रोहित शर्मा अपनी शानदार टाइमिंग और पुल शॉट खेलने की महारत के लिए जाने जाते हैं, लेकिन जब गेंद बहुत अधिक उछाल लेती है, तो उन्हें अपनी इस नैसर्गिक आक्रामकता पर थोड़ा नियंत्रण रखते हुए शुरुआती दौर में डिफेंसिव खेल दिखाना होगा। यदि रोहित क्रीज पर टिककर शुरुआती खतरनाक स्पेल को निकाल देते हैं, तो उनके लिए बाद में रन बनाना काफी आसान हो जाएगा और वे अपनी पारी को बड़े स्कोर में बदलकर टीम को ड्राइवर सीट पर ला सकते हैं। कप्तान के रूप में उनकी यह जिम्मेदारी न केवल व्यक्तिगत रन बनाने की होगी, बल्कि मैदान पर उनके द्वारा लिया गया हर एक रणनीतिक फैसला टीम की जीत और हार की दिशा तय करेगा।

रन मशीन विराट कोहली की तकनीक और मानसिक दृढ़ता की होगी सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा

आधुनिक क्रिकेट के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में शुमार विराट कोहली के लिए न्यूजीलैंड के खिलाफ यह दौरा उनके करियर के सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव में से एक साबित हो सकता है। विराट कोहली को ऑफ स्टार्क से बाहर जाती हुई स्विंग होती गेंदों और शॉर्ट पिच गेंदों पर हल्का सा संघर्ष करते हुए कई बार देखा गया है, और कीवी गेंदबाज इसी कमजोरी का फायदा उठाने के लिए पूरी तरह से रणनीति बनाकर मैदान पर उतरेंगे। हालांकि, कोहली के पास जो अनुभव, मैदान को पढ़ने की क्षमता और रनों की भूख है, वह उन्हें दुनिया के किसी भी गेंदबाज के सामने खड़े होने का साहस देती है। उन्हें अपनी उस पुरानी तकनीक पर लौटना होगा जहां वे गेंद को अपने शरीर के बहुत करीब खेलते थे और ड्राइव लगाने के लालच से बचते थे। यदि विराट कोहली क्रीज पर कुछ समय बिताने में सफल हो जाते हैं और अपने गुस्से या जल्दबाजी पर काबू पा लेते हैं, तो वे अपनी उसी क्लासिकल बैटिंग का नजारा पेश कर सकते हैं जिसके लिए वे पूरी दुनिया में जाने जाते हैं और यही बात विपक्षी टीम के गेंदबाजों के मन में सबसे बड़ा खौफ पैदा करती है।

युवा बल्लेबाज शुभमन गिल पर भी रहेगा निगाहों का पहरा, नंबर तीन की पोजीशन पर साबित करना होगा खुद को

भारतीय टेस्ट और वनडे बल्लेबाजी क्रम में शुभमन गिल ने पिछले कुछ समय से नंबर तीन की बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई है, जो एक समय पर राहुल द्रविड़ और चेतेश्वर पुजारा जैसे महान खिलाड़ियों की बपौती हुआ करती थी। शुभमन गिल की क्लास, उनका ग्रेसफुल स्ट्रोक प्ले और तकनीक की सुचिता हर किसी को आकर्षित करती है, लेकिन विदेशी दौरों पर अतिरिक्त उछाल और सीम के खिलाफ उनका प्रदर्शन अभी भी कसौटी पर कसा जाना बाकी है। न्यूजीलैंड की उछालभरी पिचों पर जब नई गेंद पुरानी हो जाती है या शुरुआती झटकों के बाद पारी को संभालने की जरूरत पड़ती है, तो शुभमन गिल की यह भूमिका और अधिक अहम हो जाती है। उन्हें यह सीखना होगा कि कैसे खराब गेंदों को छोड़ना है और कैसे कठिन परिस्थितियों में अपने विकेट को बचाए रखते हुए स्कोरबोर्ड को चलाना है। यदि गिल इस श्रृंखला में अपनी तकनीक का लोहा मनवाने में सफल रहते हैं, तो भारतीय टीम का मध्य क्रम लंबे समय के लिए बेहद मजबूत और सुरक्षित हो जाएगा।

समग्र टीम रणनीति और आगामी श्रृंखला से भारत की जीत की उम्मीदें

रोहित, विराट और गिल के अलावा भी टीम के अन्य बल्लेबाजों और गेंदबाजों को एकजुट होकर एक ऐसी सामूहिक रणनीति के तहत मैदान पर उतरना होगा जो न्यूजीलैंड की घरेलू परिस्थितियों को मात दे सके। गेंदबाजी आक्रमण में भी जसप्रीत बुमराह और अन्य तेज गेंदबाजों को कीवी बल्लेबाजों पर दबाव बनाने के लिए अपनी सटीक लाइन और लेंथ का पूरा इस्तेमाल करना होगा ताकि मैच के हर विभाग में भारत का पलड़ा भारी रह सके। क्रिकेट प्रेमियों की नजरें अब इस महामुकाबले पर टिकी हुई हैं और हर कोई यही उम्मीद कर रहा है कि भारतीय टीम अपनी पुरानी गलतियों से सीखते हुए इस बार न्यूजीलैंड के कठिन किलों को फतह करने में पूरी तरह कामयाब होगी।