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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल एक पुराने मानहानि मामले में अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट को चुनौती दे रहे हैं। चंडीगढ़ की एक जिला अदालत ने करीब 8 साल पुराने मानहानि मामले में उनकी अनुपस्थिति के कारण यह गैर-जमानती वारंट (Non-bailable warrant) जारी किया था, जिसे बादल अब बापस लेने की मांग कर रहे हैं। इसके संबंध में अगली सुनवाई 17 जनवरी, 2026 को निर्धारित की गई है। 

सुखबीर बादल के खिलाफ यह मामला काफी पहले दर्ज किया गया था और तब से यह कोर्ट के रास्ते से गुजर रहा है। गैर-जमानती वारंट का मतलब है कि अगर अदालत की तय तारीख पर व्यक्ति हाज़िर नहीं होता, तो गिरफ्तारी के आदेश भी जारी हो सकते हैं। ऐसे केस में पक्षकार यह तर्क दे सकते हैं कि अदालत को वारंट जारी करने से पहले कानूनी प्रक्रिया का ठीक से पालन करना चाहिए — उदाहरण के तौर पर दिल्ली हाई कोर्ट ने इसी तरह के मामलों में कुछ शर्तों को स्पष्ट किया है कि गैर-जमानती वारंट तभी जारी किया जा सकता है जब तीन निर्धारित परिस्थितियाँ मौजूद हों। 

इस प्रकार की कानूनी लड़ाई अक्सर निर्णय, सबूत और पक्षकार की उपस्थिति से जुड़ी जटिलताओं पर केंद्रित होती है, और 17 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई में कोर्ट दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आदेश पारित करेगी।