यूपी में पदोन्नति के बाद जेल अफसरों को मिली नई जिम्मेदारी, 5 जिलों को मिले नए अधीक्षक

यूपी में पदोन्नति के बाद जेल अफसरों को मिली नई जिम्मेदारी, 5 जिलों को मिले नए अधीक्षक

उत्तर प्रदेश सरकार ने कानून व्यवस्था और कारागार प्रशासन को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा फेरबदल किया है। राज्य में हाल ही में पदोन्नत (Promoted) हुए वरिष्ठ कारागार अधिकारियों को शासन द्वारा नई जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इस बड़े बदलाव के तहत सूबे के पांच महत्वपूर्ण जिलों को नए जेल अधीक्षक (जेल सुपरिटेंडेंट) मिल गए हैं। महानिदेशक कारागार (DG Prisons) कार्यालय और शासन के संयुक्त आदेश के बाद इन सभी अफसरों को तत्काल प्रभाव से अपने नए तैनाती स्थलों पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

पदोन्नति के साथ प्रशासनिक तंत्र को मजबूत करने की कवायद

कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग के अनुसार, यह फेरबदल प्रशासनिक कार्यकुशलता को बढ़ाने और जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के उद्देश्य से किया गया है। पदोन्नत हुए अधिकारियों को उनके अनुभव और ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर संवेदनशील और बड़े जिलों की कमान सौंपी गई है। शासन का मानना है कि नए अधीक्षकों की तैनाती से जेलों के भीतर बंदियों के सुधार कार्यक्रमों में तेजी आएगी और साथ ही जेल नियमावली (Jail Manual) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

इन 5 जिलों को मिले नए जेल अधीक्षक

इस तबादला सूची में प्रदेश के कई महत्वपूर्ण और बड़े कारागार शामिल हैं, जहां लंबे समय से नियमित अधीक्षकों की तैनाती का इंतजार था:

  • गोरखपुर और वाराणसी मंडल के कारागार: पूर्वांचल के सबसे महत्वपूर्ण जिलों में शुमार वाराणसी और मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर क्षेत्र की जेलों में सुरक्षा और प्रशासनिक कमान को मजबूत करते हुए नए अधीक्षकों को भेजा गया है।

  • पश्चिम यूपी के संवेदनशील जिले: वेस्ट यूपी के कुछ चुनिंदा जिलों की जेलों, जहां कुख्यात अपराधियों और गैंगस्टर्स को रखा गया है, वहां कड़क छवि वाले पदोन्नत अफसरों को कमान दी गई है।

  • केंद्रीय और जिला कारागारों में फेरबदल: इस सूची में जिला जेलों (District Jails) के साथ-साथ कुछ केंद्रीय कारागारों (Central Jails) के प्रशासनिक ढांचे में भी बदलाव शामिल है, जिससे आंतरिक सुरक्षा को और सख्त किया जा सके।

जेलों की सुरक्षा और 5G जैमिंग सिस्टम को लागू करना होगी प्राथमिकता

सूत्रों के मुताबिक, नए प्रभार संभालने वाले जेल अधीक्षकों के सामने कई बड़ी चुनौतियां और प्राथमिकताएं होंगी। शासन की ओर से साफ निर्देश हैं कि जेलों के भीतर से होने वाली किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधियों पर पूर्णविराम लगाया जाए। नए अधीक्षकों को अपने-अपने कारागारों में आधुनिक सुरक्षा उपकरणों, जैसे बॉडी वॉर्न कैमरा, एआई-आधारित सीसीटीवी सर्विलांस और हाल ही में अपडेट हो रहे हाई-टेक मोबाइल जैमिंग सिस्टम की निगरानी को और पुख्ता करना होगा।

बंदियों के कौशल विकास और मानवाधिकारों पर भी रहेगा जोर

उत्तर प्रदेश की जेलों को 'सुधार गृह' के रूप में विकसित करने के राज्य सरकार के विजन के तहत, नए अफसरों को बंदियों के कौशल विकास (Skill Development) पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। जेलों के भीतर उद्योगों को बढ़ावा देना, बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण देना और उनके स्वास्थ्य व भोजन की गुणवत्ता में सुधार करना भी नए कप्तानों के एजेंडे में शीर्ष पर रहेगा। इसके अलावा, जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों (Overcrowding) की समस्या के प्रबंधन के लिए भी नए अधिकारी स्थानीय जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के साथ मिलकर काम करेंगे।

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